| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| घटना | बंगाल विभाजन |
| वर्ष | 1905 |
| तत्कालीन वायसराय | लॉर्ड कर्जन |
| घोषणा | जुलाई 1905 |
| विभाजन लागू | 16 अक्टूबर 1905 |
| नया प्रांत | पूर्वी बंगाल और असम |
| विरोध का प्रमुख रूप | स्वदेशी और बहिष्कार |
| प्रमुख विरोध केंद्र | बंगाल, विशेषकर कलकत्ता |
| प्रमुख उद्देश्य/आलोचना | राष्ट्रवादी शक्ति को कमजोर करना और विभाजनकारी राजनीति |
| प्रमुख परिणाम | स्वदेशी आंदोलन, राष्ट्रीय चेतना और उग्र राष्ट्रवाद को बढ़ावा |
| विभाजन रद्द | 1911 |
| राजधानी परिवर्तन | कलकत्ता से दिल्ली |
बंगाल विभाजन 1905 आधुनिक भारतीय इतिहास की उन घटनाओं में से है जिसने राष्ट्रीय आंदोलन की दिशा को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ब्रिटिश सरकार ने इसे प्रशासनिक पुनर्गठन के रूप में प्रस्तुत किया, लेकिन भारतीय राष्ट्रवादियों ने इसे राजनीतिक उद्देश्य और ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति से जोड़ा। विभाजन के विरोध ने स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को मजबूत किया तथा राष्ट्रीय शिक्षा और आर्थिक राष्ट्रवाद को नई गति दी।
प्रश्न: बंगाल विभाजन 1905 कब लागू हुआ और इसके पीछे तत्कालीन वायसराय कौन थे?
उत्तर: बंगाल विभाजन 16 अक्टूबर 1905 को प्रभावी हुआ। इसके समय भारत के वायसराय लॉर्ड कर्जन थे। ब्रिटिश सरकार ने इसे प्रशासनिक सुविधा का कदम बताया, लेकिन भारतीय राष्ट्रवादियों ने इसे बंगाल की बढ़ती राष्ट्रीय चेतना को कमजोर करने और राजनीतिक रूप से भारतीयों को विभाजित करने की नीति के रूप में देखा। इसके विरोध में स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन तेज हुआ।
संक्षिप्त परिचय
20वीं शताब्दी के प्रारंभ में बंगाल भारतीय राष्ट्रवादी गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र बन चुका था। प्रेस, सार्वजनिक सभाओं, राजनीतिक संगठनों और शिक्षित मध्यम वर्ग के माध्यम से ब्रिटिश शासन की आलोचना बढ़ रही थी।
इसी पृष्ठभूमि में लॉर्ड कर्जन की सरकार ने बंगाल के पुनर्गठन की योजना बनाई। ब्रिटिश सरकार ने तर्क दिया कि बंगाल बहुत बड़ा प्रशासनिक क्षेत्र था और उसका कुशल प्रशासन कठिन था। लेकिन राष्ट्रवादी नेताओं ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
1905 में बंगाल का विभाजन हुआ और पूर्वी बंगाल तथा असम नामक नया प्रांत बनाया गया। विभाजन 16 अक्टूबर 1905 से प्रभावी हुआ। इसके विरोध ने स्वदेशी, बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा जैसे कार्यक्रमों को मजबूत किया।
बंगाल विभाजन क्या था?
बंगाल विभाजन 1905 में ब्रिटिश सरकार द्वारा बंगाल प्रांत के पुनर्गठन की प्रक्रिया थी, जिसके परिणामस्वरूप बंगाल के एक बड़े हिस्से को अलग करके पूर्वी बंगाल और असम नामक नया प्रांत बनाया गया।
ब्रिटिश सरकार का आधिकारिक तर्क प्रशासनिक सुविधा था, लेकिन भारतीय राष्ट्रवादी नेताओं को आशंका थी कि विभाजन का वास्तविक राजनीतिक उद्देश्य बंगाल की राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रवादी आंदोलन को कमजोर करना था।
इस घटना को इतिहास में बंग-भंग के नाम से भी जाना जाता है।
बंगाल विभाजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
19वीं शताब्दी के अंतिम वर्षों और 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में बंगाल राजनीतिक जागरण का प्रमुख केंद्र बन गया था।
- समाचार पत्रों के माध्यम से राजनीतिक चेतना बढ़ रही थी।
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की गतिविधियों का प्रभाव बढ़ रहा था।
- शिक्षित मध्यम वर्ग ब्रिटिश नीतियों की आलोचना कर रहा था।
- राष्ट्रवादी संगठनों का विस्तार हो रहा था।
- आर्थिक शोषण के विरुद्ध आवाज उठ रही थी।
- बंगाली भाषा और सांस्कृतिक पहचान के कारण सामाजिक एकता मजबूत थी।
ब्रिटिश सरकार के लिए यह बढ़ती राष्ट्रवादी चेतना चिंता का विषय बन रही थी।
बंगाल विभाजन के कारण
1. प्रशासनिक सुविधा का तर्क
ब्रिटिश सरकार का कहना था कि बंगाल बहुत बड़ा प्रांत था और एक ही प्रशासन के लिए उसका प्रबंधन कठिन था।
सरकार के अनुसार बड़े क्षेत्र को छोटे प्रशासनिक क्षेत्रों में विभाजित करने से प्रशासन अधिक प्रभावी बनाया जा सकता था।
लेकिन भारतीय राष्ट्रवादियों ने इसे केवल प्रशासनिक समस्या का समाधान नहीं माना।
2. राष्ट्रवादी आंदोलन को कमजोर करना
बंगाल उस समय राष्ट्रीय आंदोलन का प्रमुख केंद्र था। विभाजन के माध्यम से इस राजनीतिक शक्ति को कमजोर करने की कोशिश के रूप में ब्रिटिश नीति की आलोचना की गई।
3. ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति
बंगाल विभाजन को ब्रिटिश Divide and Rule नीति के महत्वपूर्ण उदाहरणों में गिना जाता है।
विभाजन से ऐसे क्षेत्र बने जिनमें धार्मिक और क्षेत्रीय आधार पर सामाजिक संरचना अलग थी। इससे राष्ट्रवादी एकता को कमजोर करने की आशंका बढ़ी।
4. बंगाल की राजनीतिक एकता को तोड़ना
बंगाल में राष्ट्रवादी प्रेस और राजनीतिक संगठनों का प्रभाव काफी मजबूत था। विभाजन से इस संगठित राजनीतिक प्रभाव को कम करने की कोशिश की गई।
5. ब्रिटिश शासन के प्रति बढ़ते विरोध को नियंत्रित करना
बंगाल में ब्रिटिश शासन की आर्थिक और राजनीतिक नीतियों के खिलाफ आलोचना बढ़ रही थी। विभाजन को इस विरोध को नियंत्रित करने की व्यापक औपनिवेशिक रणनीति से भी जोड़ा गया।
बंगाल विभाजन कब हुआ?
यह प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं में बहुत महत्वपूर्ण है।
| घटना | तिथि/वर्ष |
| विभाजन की घोषणा | जुलाई 1905 |
| विरोध में प्रमुख टाउन हॉल सभा | 7 अगस्त 1905 |
| बंगाल विभाजन लागू | 16 अक्टूबर 1905 |
| स्वदेशी-बहिष्कार आंदोलन का विस्तार | 1905 के बाद |
| राष्ट्रीय शिक्षा आंदोलन का विस्तार | 1905–06 |
| बंगाल विभाजन रद्द | 1911 |
विभिन्न स्रोतों में घोषणा की तारीख के संदर्भ में 19 या 20 जुलाई का उल्लेख मिलता है; इसलिए परीक्षा की दृष्टि से “जुलाई 1905 में घोषणा” और “16 अक्टूबर 1905 को लागू” को अलग-अलग याद रखना अधिक सुरक्षित है।
बंगाल विभाजन किसने किया?
बंगाल विभाजन लॉर्ड कर्जन के वायसराय काल में किया गया।
लॉर्ड कर्जन उस समय भारत के वायसराय थे। विभाजन की योजना को ब्रिटिश सरकार ने प्रशासनिक पुनर्गठन के रूप में प्रस्तुत किया, लेकिन राष्ट्रवादी नेताओं ने इसके राजनीतिक उद्देश्यों का विरोध किया।
Exam Trick:
कर्जन → बंगाल विभाजन → 1905 → स्वदेशी आंदोलन
1905 में बंगाल को कैसे विभाजित किया गया?
विभाजन के बाद पूर्वी बंगाल और असम नामक नया प्रांत बनाया गया। इसका प्रशासनिक केंद्र ढाका बनाया गया।
दूसरी ओर पश्चिमी भाग बंगाल के रूप में रहा और कलकत्ता उसका प्रमुख प्रशासनिक केंद्र बना रहा।
विभाजन का सरल स्वरूप
पूर्वी बंगाल और असम
मुख्य केंद्र — ढाका
पश्चिमी बंगाल क्षेत्र
मुख्य केंद्र — कलकत्ता
यह विभाजन केवल नक्शे का प्रशासनिक परिवर्तन नहीं था। भारतीय राष्ट्रवादियों ने इसे राजनीतिक रूप से भारतीय समाज को विभाजित करने की कोशिश माना।
बंगाल विभाजन का विरोध
बंगाल विभाजन की योजना सामने आने के बाद बंगाल में व्यापक विरोध शुरू हुआ।
प्रारंभ में विरोध का स्वरूप मुख्यतः:
- सभाएँ
- जुलूस
- भाषण
- समाचार पत्रों में अभियान
- सरकारी अधिकारियों को ज्ञापन
- सार्वजनिक विरोध
तक सीमित था।
जब इन संवैधानिक तरीकों का अपेक्षित प्रभाव नहीं पड़ा, तो आंदोलन ने बहिष्कार और स्वदेशी जैसे अधिक प्रभावशाली कार्यक्रमों का रूप लिया।
7 अगस्त 1905 की टाउन हॉल सभा
7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में एक महत्वपूर्ण सभा आयोजित हुई।
इस सभा में ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार का प्रस्ताव सामने आया और आंदोलन को नया राजनीतिक स्वरूप मिला।
यही वह चरण था जब स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन ने बंगाल विभाजन के विरोध को व्यापक आर्थिक और सामाजिक आंदोलन में बदलने में मदद की।
16 अक्टूबर 1905: बंगाल विभाजन लागू
16 अक्टूबर 1905 को विभाजन प्रभावी हुआ।
इस दिन बंगाल में विरोध और शोक का वातावरण था। लोगों ने जुलूस निकाले और एकता का संदेश दिया। रवींद्रनाथ टैगोर से जुड़ी रक्षा बंधन की प्रतीकात्मक पहल ने हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक भाईचारे का संदेश देने का प्रयास किया।
यह दिन बंगाल विभाजन विरोधी आंदोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण माना जाता है।
बंगाल विभाजन और स्वदेशी आंदोलन
बंगाल विभाजन और स्वदेशी आंदोलन एक-दूसरे से सीधे जुड़े हुए हैं।
स्वदेशी आंदोलन का मूल विचार था:
विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार + भारतीय वस्तुओं का उपयोग + भारतीय उद्योगों का प्रोत्साहन
इस आंदोलन ने आर्थिक राष्ट्रवाद को राजनीतिक आंदोलन से जोड़ा।
स्वदेशी का अर्थ केवल भारतीय वस्तु खरीदना नहीं था, बल्कि आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सम्मान की भावना से भी जुड़ा था।
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बहिष्कार आंदोलन क्या था?
बहिष्कार आंदोलन स्वदेशी आंदोलन का महत्वपूर्ण पक्ष था।
इसमें लोगों से विदेशी वस्तुओं, विशेषकर ब्रिटिश निर्मित वस्तुओं का उपयोग छोड़ने का आग्रह किया गया।
इसके प्रमुख रूप थे:
- विदेशी कपड़ों का बहिष्कार
- विदेशी वस्तुओं की दुकानों का विरोध
- स्वदेशी वस्तुओं को अपनाना
- विदेशी वस्त्रों की सार्वजनिक होली
- भारतीय उद्योगों को प्रोत्साहन
1905 के बंगाल विभाजन के विरोध में स्वदेशी और बहिष्कार को संघर्ष के महत्वपूर्ण तरीकों के रूप में अपनाया गया, जिसे UPSC के प्रश्नों में भी पूछा गया है।
राष्ट्रीय शिक्षा आंदोलन
बंगाल विभाजन विरोधी आंदोलन का एक महत्वपूर्ण परिणाम राष्ट्रीय शिक्षा आंदोलन था।
ब्रिटिश नियंत्रित शिक्षा व्यवस्था के विकल्प के रूप में भारतीयों ने राष्ट्रीय शिक्षा संस्थानों के निर्माण पर जोर दिया।
1906 में National Council of Education की स्थापना हुई।
इसके साथ बंगाल नेशनल कॉलेज और बंगाल टेक्निकल इंस्टीट्यूट जैसे संस्थानों के विकास को गति मिली। अरविंद घोष बंगाल नेशनल कॉलेज के प्राचार्य बने।
इस प्रकार आंदोलन केवल विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा और औद्योगिक विकास तक भी पहुँचा।
बंगाल विभाजन के प्रमुख नेता
बंगाल विभाजन विरोधी आंदोलन और स्वदेशी आंदोलन से अनेक राष्ट्रवादी नेता जुड़े।
सुरेंद्रनाथ बनर्जी
उन्होंने बंगाल विभाजन के विरोध में जनमत तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बिपिन चंद्र पाल
वे स्वदेशी, बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा के प्रबल समर्थक थे।
अरविंद घोष
उन्होंने स्वदेशी आंदोलन को अधिक सक्रिय राष्ट्रवादी दिशा देने में भूमिका निभाई और राष्ट्रीय शिक्षा से भी जुड़े।
बाल गंगाधर तिलक
उन्होंने बंगाल के आंदोलन को व्यापक भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन से जोड़ने में योगदान दिया।
लाला लाजपत राय
वे उग्र राष्ट्रवादी धारा के प्रमुख नेताओं में थे और स्वदेशी तथा बहिष्कार के समर्थक थे।
रवींद्रनाथ टैगोर
उन्होंने सांस्कृतिक माध्यमों और रक्षा बंधन जैसे प्रतीकों के माध्यम से सामाजिक एकता का संदेश दिया।
लाल-बाल-पाल और बंगाल विभाजन
लाला लाजपत राय + बाल गंगाधर तिलक + बिपिन चंद्र पाल = लाल-बाल-पाल
यह त्रयी उग्र राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़ी थी।
बंगाल विभाजन के बाद स्वदेशी, बहिष्कार और राष्ट्रीय आंदोलन को अधिक सक्रिय रूप देने में इस धारा की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
Exam Trick:
लाल = लाला लाजपत राय
बाल = बाल गंगाधर तिलक
पाल = बिपिन चंद्र पाल
बंगाल विभाजन का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पर प्रभाव
बंगाल विभाजन ने कांग्रेस के भीतर विचारधारात्मक मतभेदों को भी अधिक स्पष्ट किया।
एक ओर नरमपंथी नेता संवैधानिक तरीकों, प्रार्थना, निवेदन और राजनीतिक दबाव के माध्यम से परिवर्तन चाहते थे।
दूसरी ओर गरमपंथी नेता स्वदेशी, बहिष्कार और अधिक सक्रिय जन-आंदोलन पर जोर दे रहे थे।
इन मतभेदों ने आगे चलकर कांग्रेस के 1907 के सूरत अधिवेशन में महत्वपूर्ण रूप लिया।
बंगाल विभाजन के प्रमुख परिणाम
1. स्वदेशी आंदोलन को गति
बंगाल विभाजन के विरोध ने स्वदेशी आंदोलन को मजबूत किया।
2. बहिष्कार आंदोलन का विस्तार
विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार को राजनीतिक संघर्ष का महत्वपूर्ण साधन बनाया गया।
3. राष्ट्रीय चेतना का विस्तार
आंदोलन ने आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को एक साथ जोड़ने में मदद की।
4. भारतीय उद्योगों को प्रोत्साहन
स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग पर जोर देने से भारतीय उद्योगों और उद्यमिता को प्रोत्साहन मिला।
5. राष्ट्रीय शिक्षा का विकास
ब्रिटिश शिक्षा व्यवस्था के विकल्प के रूप में राष्ट्रीय शिक्षा संस्थानों का विकास हुआ।
6. उग्र राष्ट्रवाद को बढ़ावा
आंदोलन ने सक्रिय राष्ट्रवादी राजनीति को मजबूत किया।
7. महिलाओं और विद्यार्थियों की भागीदारी
स्वदेशी आंदोलन के दौरान विद्यार्थी और समाज के अन्य वर्ग भी आंदोलन से जुड़े।
8. कांग्रेस में मतभेद बढ़े
नरमपंथी और गरमपंथी विचारधाराओं के बीच मतभेद अधिक स्पष्ट हुए।
9. ब्रिटिश सरकार पर राजनीतिक दबाव
बंगाल विभाजन के खिलाफ लगातार विरोध ने ब्रिटिश सरकार को अंततः 1911 में विभाजन रद्द करने के लिए प्रेरित किया।
10. राजधानी का दिल्ली स्थानांतरण
1911 में बंगाल विभाजन रद्द करने के साथ भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा की गई।
बंगाल विभाजन 1911 में क्यों रद्द किया गया?
लगातार विरोध, स्वदेशी आंदोलन और राजनीतिक दबाव के कारण बंगाल विभाजन ब्रिटिश सरकार के लिए गंभीर राजनीतिक चुनौती बन गया।
1911 में बंगाल विभाजन रद्द किया गया।
इसी वर्ष राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा भी की गई।
इसलिए परीक्षा में यह संयोजन बहुत महत्वपूर्ण है:
1905 → बंगाल विभाजन
1911 → बंगाल विभाजन रद्द + राजधानी दिल्ली स्थानांतरित
महत्वपूर्ण समयरेखा
| वर्ष/तिथि | घटना |
| 1905 | बंगाल विभाजन |
| जुलाई 1905 | विभाजन की घोषणा |
| 7 अगस्त 1905 | कलकत्ता टाउन हॉल में बहिष्कार प्रस्ताव |
| 16 अक्टूबर 1905 | बंगाल विभाजन प्रभावी |
| 1905–06 | स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन का विस्तार |
| 1906 | National Council of Education |
| 1906 | कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन |
| 1907 | सूरत अधिवेशन और कांग्रेस में विभाजन |
| 1911 | बंगाल विभाजन रद्द |
| 1911 | राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित |
बंगाल विभाजन और स्वदेशी आंदोलन में अंतर
| आधार | बंगाल विभाजन | स्वदेशी आंदोलन |
| प्रकृति | ब्रिटिश प्रशासनिक-राजनीतिक निर्णय | राष्ट्रवादी विरोध आंदोलन |
| वर्ष | 1905 | 1905 |
| प्रमुख व्यक्ति | लॉर्ड कर्जन | अनेक राष्ट्रवादी नेता |
| मुख्य उद्देश्य | बंगाल का पुनर्गठन | विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार और स्वदेशी को बढ़ावा |
| प्रमुख क्षेत्र | बंगाल | बंगाल से शुरू होकर अन्य क्षेत्रों तक |
| प्रमुख प्रभाव | व्यापक विरोध | राष्ट्रीय चेतना और आर्थिक राष्ट्रवाद |
बंगाल विभाजन: घटना और परिणाम
| विषय | महत्वपूर्ण जानकारी |
| विभाजन | 1905 |
| वायसराय | लॉर्ड कर्जन |
| लागू | 16 अक्टूबर 1905 |
| नया प्रांत | पूर्वी बंगाल और असम |
| विरोध | स्वदेशी एवं बहिष्कार |
| राष्ट्रीय शिक्षा | आंदोलन का महत्वपूर्ण भाग |
| रद्द | 1911 |
| राजधानी परिवर्तन | कलकत्ता → दिल्ली |
प्रमुख व्यक्तित्व और भूमिका
| व्यक्तित्व | भूमिका/संबंध |
| लॉर्ड कर्जन | बंगाल विभाजन के समय वायसराय |
| सुरेंद्रनाथ बनर्जी | बंगाल विभाजन विरोधी आंदोलन के प्रमुख नेता |
| कृष्ण कुमार मित्र | बहिष्कार के प्रारंभिक समर्थकों में |
| बिपिन चंद्र पाल | स्वदेशी और बहिष्कार के समर्थक |
| अरविंद घोष | उग्र राष्ट्रवादी एवं राष्ट्रीय शिक्षा से जुड़े |
| बाल गंगाधर तिलक | स्वदेशी आंदोलन के समर्थक |
| लाला लाजपत राय | उग्र राष्ट्रवादी नेता |
| रवींद्रनाथ टैगोर | एकता और रक्षा बंधन के प्रतीकात्मक कार्यक्रम से जुड़े |

बंगाल विभाजन MCQs:
प्रश्न 1: बंगाल विभाजन किस वर्ष हुआ?
A. 1903
B. 1905
C. 1907
D. 1911
उत्तर: B. 1905
व्याख्या: बंगाल विभाजन 1905 में लॉर्ड कर्जन के वायसराय काल में किया गया था।
प्रश्न 2: बंगाल विभाजन के समय भारत का वायसराय कौन था?
A. लॉर्ड रिपन
B. लॉर्ड मिंटो
C. लॉर्ड कर्जन
D. लॉर्ड हार्डिंग
उत्तर: C. लॉर्ड कर्जन
व्याख्या: 1905 में बंगाल विभाजन लॉर्ड कर्जन के वायसराय काल में हुआ।
प्रश्न 3: बंगाल विभाजन कब प्रभावी हुआ?
A. 7 अगस्त 1905
B. 19 जुलाई 1905
C. 16 अक्टूबर 1905
D. 26 जनवरी 1906
उत्तर: C. 16 अक्टूबर 1905
व्याख्या: बंगाल विभाजन 16 अक्टूबर 1905 से प्रभावी हुआ।
प्रश्न 4: बंगाल विभाजन के बाद कौन-सा नया प्रांत बनाया गया?
A. बिहार और उड़ीसा
B. पूर्वी बंगाल और असम
C. पश्चिमी बंगाल और बिहार
D. बंगाल और पंजाब
उत्तर: B. पूर्वी बंगाल और असम
व्याख्या: विभाजन के बाद पूर्वी बंगाल और असम नामक नया प्रांत बनाया गया।
प्रश्न 5: 7 अगस्त 1905 की महत्वपूर्ण सभा कहाँ आयोजित हुई?
A. दिल्ली
B. मुंबई
C. कलकत्ता टाउन हॉल
D. लखनऊ
उत्तर: C. कलकत्ता टाउन हॉल
व्याख्या: कलकत्ता टाउन हॉल की सभा में बहिष्कार आंदोलन को महत्वपूर्ण समर्थन मिला।
प्रश्न 6: बंगाल विभाजन के विरोध से कौन-सा आंदोलन प्रमुख रूप से जुड़ा?
A. भारत छोड़ो आंदोलन
B. स्वदेशी आंदोलन
C. खिलाफत आंदोलन
D. होम रूल आंदोलन
उत्तर: B. स्वदेशी आंदोलन
व्याख्या: 1905 के बंगाल विभाजन के विरोध ने स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को गति दी।
प्रश्न 7: National Council of Education की स्थापना किस वर्ष हुई?
A. 1905
B. 1906
C. 1907
D. 1911
उत्तर: B. 1906
व्याख्या: स्वदेशी आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 1906 में National Council of Education की स्थापना हुई।
प्रश्न 8: ‘लाल-बाल-पाल’ में ‘पाल’ किसे कहा जाता है?
A. सुरेंद्रनाथ बनर्जी
B. बिपिन चंद्र पाल
C. अरविंद घोष
D. गोपाल कृष्ण गोखले
उत्तर: B. बिपिन चंद्र पाल
व्याख्या: लाल-बाल-पाल में लाल = लाला लाजपत राय, बाल = बाल गंगाधर तिलक और पाल = बिपिन चंद्र पाल।
प्रश्न 9: बंगाल विभाजन किस वर्ष रद्द किया गया?
A. 1907
B. 1909
C. 1911
D. 1919
उत्तर: C. 1911
व्याख्या: ब्रिटिश सरकार ने 1911 में बंगाल विभाजन रद्द किया।
प्रश्न 10: 1911 में भारत की राजधानी कलकत्ता से कहाँ स्थानांतरित की गई?
A. मुंबई
B. दिल्ली
C. लखनऊ
D. इलाहाबाद
उत्तर: B. दिल्ली
व्याख्या: 1911 में भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा की गई।
प्रश्न 11: बंगाल विभाजन का प्रमुख विरोध किस नीति से जुड़ा था?
A. केवल कर सुधार
B. स्वदेशी और बहिष्कार
C. सैन्य भर्ती
D. पृथक निर्वाचन
उत्तर: B. स्वदेशी और बहिष्कार
व्याख्या: विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार और भारतीय वस्तुओं को अपनाना आंदोलन का प्रमुख आधार था।
प्रश्न 12: बंगाल विभाजन को भारतीय राष्ट्रवादियों ने किस औपनिवेशिक नीति से जोड़ा?
A. उदारवाद
B. फूट डालो और राज करो
C. आर्थिक उदारीकरण
D. पंचायती राज
उत्तर: B. फूट डालो और राज करो
व्याख्या: राष्ट्रवादियों ने विभाजन को भारतीय राजनीतिक एकता कमजोर करने की ब्रिटिश नीति के रूप में देखा।
प्रश्न 13: बंगाल विभाजन के विरोध में राष्ट्रीय शिक्षा का उद्देश्य क्या था?
A. केवल अंग्रेजी शिक्षा बढ़ाना
B. ब्रिटिश शिक्षा व्यवस्था का विकल्प विकसित करना
C. सेना तैयार करना
D. प्रशासनिक प्रशिक्षण देना
उत्तर: B. ब्रिटिश शिक्षा व्यवस्था का विकल्प विकसित करना
व्याख्या: राष्ट्रीय शिक्षा आंदोलन ने भारतीय आवश्यकताओं और राष्ट्रवादी विचारों पर आधारित शिक्षा संस्थानों को बढ़ावा दिया।
प्रश्न 14: 1907 का सूरत अधिवेशन किससे संबंधित है?
A. बंगाल विभाजन
B. कांग्रेस में नरमपंथी-गरमपंथी विभाजन
C. भारत छोड़ो आंदोलन
D. असहयोग आंदोलन
उत्तर: B. कांग्रेस में नरमपंथी-गरमपंथी विभाजन
व्याख्या: 1907 का सूरत अधिवेशन कांग्रेस के भीतर नरमपंथी और गरमपंथी मतभेदों के लिए प्रसिद्ध है।
प्रश्न 15: बंगाल विभाजन के विरोध में विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किस विचार से जुड़ा था?
A. साम्राज्यवाद
B. स्वदेशी
C. साम्यवाद
D. उदारीकरण
उत्तर: B. स्वदेशी
व्याख्या: स्वदेशी विचार भारतीय वस्तुओं के उपयोग और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार से जुड़ा था।
प्रश्न 16: बंगाल विभाजन के बाद नए प्रांत का प्रशासनिक केंद्र कौन-सा शहर था?
A. कलकत्ता
B. ढाका
C. दिल्ली
D. पटना
उत्तर: B. ढाका
व्याख्या: पूर्वी बंगाल और असम का प्रमुख प्रशासनिक केंद्र ढाका था।
प्रश्न 17: बंगाल विभाजन के विरोध में रवींद्रनाथ टैगोर किस प्रतीकात्मक कार्यक्रम से जुड़े?
A. सत्याग्रह
B. रक्षा बंधन
C. नमक सत्याग्रह
D. व्यक्तिगत सत्याग्रह
उत्तर: B. रक्षा बंधन
व्याख्या: टैगोर ने रक्षा बंधन के माध्यम से सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश देने का प्रयास किया।
प्रश्न 18: बंगाल विभाजन के विरोध का एक प्रमुख आर्थिक उद्देश्य क्या था?
A. विदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देना
B. भारतीय उद्योगों को प्रोत्साहित करना
C. कर बढ़ाना
D. ब्रिटिश कंपनियों को सहायता देना
उत्तर: B. भारतीय उद्योगों को प्रोत्साहित करना
व्याख्या: स्वदेशी आंदोलन ने भारतीय उत्पादों और उद्योगों को प्रोत्साहित किया।
प्रश्न 19: बंगाल विभाजन रद्द होने और राजधानी परिवर्तन की घोषणा किस वर्ष हुई?
A. 1905
B. 1907
C. 1911
D. 1919
उत्तर: C. 1911
व्याख्या: 1911 में बंगाल विभाजन रद्द किया गया और राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा हुई।
प्रश्न 20: UPSC के अनुसार ‘स्वदेशी’ और ‘बहिष्कार’ को संघर्ष के तरीकों के रूप में पहली बार किस घटना के विरोध में अपनाया गया?
A. बंगाल विभाजन
B. साइमन कमीशन
C. रॉलेट एक्ट
D. भारत छोड़ो आंदोलन
उत्तर: A. बंगाल विभाजन
बंगाल विभाजन FAQs:
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बंगाल विभाजन क्या था?
1905 में ब्रिटिश सरकार द्वारा बंगाल प्रांत का पुनर्गठन बंगाल विभाजन कहलाया। इसके परिणामस्वरूप पूर्वी बंगाल और असम नामक नया प्रांत बनाया गया।
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बंगाल विभाजन कब हुआ था?
बंगाल विभाजन 1905 में हुआ और 16 अक्टूबर 1905 से प्रभावी हुआ।
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बंगाल विभाजन किसने किया था?
बंगाल विभाजन लॉर्ड कर्जन के वायसराय काल में किया गया था।
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बंगाल विभाजन का मुख्य कारण क्या था?
ब्रिटिश सरकार ने प्रशासनिक सुविधा को आधिकारिक कारण बताया, लेकिन भारतीय राष्ट्रवादियों ने इसे राजनीतिक उद्देश्य और ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति से जोड़ा।
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बंगाल विभाजन के विरोध में कौन-सा आंदोलन शुरू हुआ?
बंगाल विभाजन के विरोध ने स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को गति दी।
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बंगाल विभाजन 1911 में क्यों रद्द किया गया?
लगातार विरोध, स्वदेशी आंदोलन और राजनीतिक दबाव के कारण ब्रिटिश सरकार ने 1911 में बंगाल विभाजन रद्द किया।
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बंगाल विभाजन के बाद कौन-सा नया प्रांत बनाया गया?
पूर्वी बंगाल और असम नामक नया प्रांत बनाया गया।
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बंगाल विभाजन और स्वदेशी आंदोलन में क्या संबंध था?
1905 का बंगाल विभाजन स्वदेशी आंदोलन के प्रमुख कारणों में था। इसके विरोध में विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और भारतीय वस्तुओं के उपयोग का अभियान तेज हुआ।
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1911 में राजधानी कलकत्ता से दिल्ली क्यों स्थानांतरित की गई?
1911 में बंगाल विभाजन रद्द करने के साथ भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा की गई।
निष्कर्ष
बंगाल विभाजन 1905 भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। लॉर्ड कर्जन द्वारा किए गए इस विभाजन ने भारतीयों में व्यापक असंतोष पैदा किया और इसके विरोध में स्वदेशी, बहिष्कार तथा राष्ट्रीय शिक्षा आंदोलन को नई गति मिली। इससे राष्ट्रीय चेतना का विस्तार हुआ, भारतीय उद्योगों को प्रोत्साहन मिला और जन-आंदोलन की परंपरा मजबूत हुई।
16 अक्टूबर 1905 को लागू हुआ बंगाल विभाजन अंततः लगातार राष्ट्रवादी विरोध के कारण 1911 में रद्द कर दिया गया। इसी वर्ष भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा भी हुई।https://gkdost.com/history/asahyog-andolan/

