असहयोग आंदोलन Notes PDF, कारण, कार्यक्रम, चौरी-चौरा, परिणाम, MCQ एवं PYQ

असहयोग आंदोलन (1920–1922): सम्पूर्ण नोट्स, कारण, कार्यक्रम, चौरी-चौरा, परिणाम

Table of Contents

बिंदुजानकारी
आंदोलनअसहयोग आंदोलन
English NameNon-Cooperation Movement
काल1920–1922
प्रमुख नेतामहात्मा गांधी
प्रमुख सहयोगी संदर्भखिलाफत आंदोलन
मुख्य आधारअहिंसा और असहयोग
कांग्रेस में स्वीकृतिकलकत्ता विशेष अधिवेशन, सितंबर 1920
अंतिम अनुमोदननागपुर अधिवेशन, दिसंबर 1920
आंदोलन की शुरुआत1 अगस्त 1920 से कार्यक्रम का औपचारिक आरंभ
प्रमुख कार्यक्रमसरकारी संस्थाओं, विदेशी वस्तुओं और उपाधियों का बहिष्कार
प्रमुख घटनाचौरी-चौरा कांड
चौरी-चौरा4 फरवरी 1922
आंदोलन वापसी12 फरवरी 1922
प्रमुख परिणामभारतीय राजनीति का व्यापक जनाधार मजबूत हुआ

असहयोग आंदोलन को 1920 में कांग्रेस ने कलकत्ता और नागपुर के अधिवेशनों के माध्यम से राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में स्वीकार किया। इसके केंद्र में ब्रिटिश शासन के साथ सहयोग समाप्त करना, विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार और स्वदेशी-खादी को बढ़ावा देना था।

प्रश्न: महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन को किस घटना के बाद वापस ले लिया था?

उत्तर: चौरी-चौरा कांड (1922) के बाद। 4 फरवरी 1922 को चौरी-चौरा में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक संघर्ष हुआ। पुलिस थाने में आग लगाए जाने और पुलिसकर्मियों की मृत्यु के बाद गांधीजी ने आंदोलन की अहिंसक प्रकृति को बनाए रखने के लिए 12 फरवरी 1922 को इसे वापस लेने का निर्णय किया।


संक्षिप्त परिचय

असहयोग आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ था। यह गांधीजी के नेतृत्व में चलाया गया ऐसा व्यापक आंदोलन था जिसमें आम जनता को ब्रिटिश शासन के साथ सहयोग समाप्त करने के लिए प्रेरित किया गया।

इस आंदोलन का आधार अहिंसा, सत्याग्रह, बहिष्कार और स्वदेशी था। विद्यार्थियों, वकीलों, किसानों, व्यापारियों, महिलाओं और अन्य सामाजिक वर्गों ने अलग-अलग क्षेत्रों में इसकी गतिविधियों में भाग लिया।

आंदोलन की पृष्ठभूमि में प्रथम विश्व युद्ध के बाद की आर्थिक कठिनाइयाँ, रॉलेट एक्ट, जलियांवाला बाग हत्याकांड और खिलाफत प्रश्न जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण थे।


असहयोग आंदोलन क्या है?

असहयोग आंदोलन का अर्थ था—ब्रिटिश शासन को भारतीय जनता द्वारा प्राप्त सहयोग को वापस लेना।

गांधीजी का मूल विचार था कि ब्रिटिश शासन केवल ब्रिटिश अधिकारियों की शक्ति से नहीं, बल्कि भारतीयों के सहयोग से भी चलता है। यदि भारतीय जनता सरकारी संस्थाओं, उपाधियों, विदेशी वस्तुओं और अन्य औपनिवेशिक व्यवस्थाओं से शांतिपूर्ण तरीके से दूरी बनाए, तो ब्रिटिश शासन की वैधता और प्रशासनिक आधार कमजोर किया जा सकता है।

इसलिए आंदोलन का प्रमुख हथियार हिंसा नहीं बल्कि अहिंसक असहयोग था।

असहयोग आंदोलन कब शुरू हुआ?

इस प्रश्न में परीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण distinction याद रखना चाहिए।

  • 1 अगस्त 1920: गांधीजी द्वारा असहयोग कार्यक्रम के औपचारिक आरंभ की तिथि।
  • सितंबर 1920: कलकत्ता के विशेष अधिवेशन में कांग्रेस ने असहयोग प्रस्ताव को स्वीकार किया।
  • दिसंबर 1920: नागपुर अधिवेशन में कार्यक्रम को अंतिम रूप से अनुमोदित किया गया।

इसलिए MCQ में “असहयोग आंदोलन कब शुरू हुआ?” पूछा जाए तो सामान्य उत्तर 1920 है; जबकि कांग्रेस द्वारा प्रस्ताव की स्वीकृति के लिए कलकत्ता और नागपुर अधिवेशन याद रखना चाहिए।


ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

असहयोग आंदोलन अचानक शुरू नहीं हुआ था। इसके पीछे कई राजनीतिक और सामाजिक घटनाएँ थीं।

प्रथम विश्व युद्ध के बाद की स्थिति

1914–1918 के प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारत से सैनिकों, संसाधनों और आर्थिक सहयोग की बड़ी मात्रा में मांग की गई। युद्ध के बाद महँगाई, आर्थिक कठिनाइयों और बेरोजगारी जैसी समस्याओं ने जनता में असंतोष बढ़ाया।

रॉलेट एक्ट, 1919

रॉलेट एक्ट ने सरकार को राजनीतिक गतिविधियों पर कठोर नियंत्रण और बिना सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के गिरफ्तारी जैसे अधिकार दिए। इसके विरोध ने राष्ट्रीय असंतोष को बढ़ाया।

जलियांवाला बाग हत्याकांड

13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में जनरल डायर के आदेश पर निहत्थी सभा पर गोली चलाए जाने की घटना ने भारतीयों के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति गहरा आक्रोश पैदा किया।

खिलाफत प्रश्न

प्रथम विश्व युद्ध के बाद उस्मानी साम्राज्य और खलीफा से संबंधित प्रश्न ने भारतीय मुसलमानों में असंतोष पैदा किया। अली बंधुओं सहित खिलाफत नेताओं ने आंदोलन चलाया। गांधीजी ने खिलाफत आंदोलन के साथ सहयोग किया और इसे व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया।


असहयोग आंदोलन के प्रमुख कारण

1. रॉलेट एक्ट का विरोध

रॉलेट एक्ट ने राजनीतिक स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों के प्रति असंतोष को बढ़ाया।

2. जलियांवाला बाग हत्याकांड

जलियांवाला बाग की घटना ने ब्रिटिश शासन की नीतियों के विरुद्ध जनता के आक्रोश को तीव्र किया।

3. खिलाफत आंदोलन

खिलाफत प्रश्न ने मुस्लिम समुदाय के एक बड़े वर्ग को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ने का अवसर दिया।

4. प्रथम विश्व युद्ध के बाद आर्थिक संकट

युद्धोत्तर महँगाई, बेरोजगारी और आर्थिक कठिनाइयों ने आम जनता में असंतोष बढ़ाया।

5. ब्रिटिश शासन से राजनीतिक असंतोष

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में संवैधानिक सुधारों की सीमाओं से असंतोष बढ़ रहा था।

6. स्वराज्य की मांग

राष्ट्रीय नेताओं और जनता के बीच स्वशासन की मांग मजबूत हो चुकी थी।


असहयोग आंदोलन के उद्देश्य

असहयोग आंदोलन के प्रमुख उद्देश्य थे:

  1. ब्रिटिश शासन के साथ शांतिपूर्ण असहयोग करना।
  2. स्वराज्य की दिशा में आगे बढ़ना।
  3. पंजाब की घटनाओं के प्रति न्याय की मांग करना।
  4. खिलाफत प्रश्न के समाधान के लिए समर्थन देना।
  5. विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करना।
  6. स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देना।
  7. खादी और चरखे को लोकप्रिय बनाना।
  8. जनता को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ना।
  9. ब्रिटिश संस्थाओं पर निर्भरता कम करना।
  10. अहिंसक जन-आंदोलन के माध्यम से राजनीतिक दबाव बनाना।

असहयोग आंदोलन का कार्यक्रम क्या था?

असहयोग आंदोलन का कार्यक्रम केवल विरोध तक सीमित नहीं था। इसमें बहिष्कार के साथ रचनात्मक कार्यक्रम भी शामिल थे।

सरकारी उपाधियों का त्याग

भारतीयों से ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रदान की गई उपाधियों और सम्मान को छोड़ने की अपील की गई।

सरकारी स्कूल और कॉलेजों का बहिष्कार

विद्यार्थियों को सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों से दूरी बनाने के लिए प्रेरित किया गया।

इसके स्थान पर राष्ट्रीय शिक्षा संस्थानों को प्रोत्साहन मिला।

न्यायालयों का बहिष्कार

वकीलों से ब्रिटिश न्यायालयों का बहिष्कार करने की अपील की गई। सी. आर. दास और मोतीलाल नेहरू जैसे प्रमुख वकीलों ने अपनी कानूनी प्रैक्टिस छोड़कर आंदोलन का समर्थन किया।

विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार

विदेशी कपड़ों के बहिष्कार और स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को आंदोलन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया।

खादी और चरखा

चरखा केवल आर्थिक साधन नहीं बल्कि स्वावलंबन और स्वदेशी का प्रतीक बन गया।

शराब की दुकानों का पिकेटिंग

कई स्थानों पर शराब की दुकानों के सामने शांतिपूर्ण धरना और पिकेटिंग की गई।

राष्ट्रीय शिक्षा को बढ़ावा

सरकारी संस्थाओं के विकल्प के रूप में राष्ट्रीय शिक्षण संस्थाओं को बढ़ावा दिया गया।


असहयोग आंदोलन और खिलाफत आंदोलन का संबंध

असहयोग आंदोलन और खिलाफत आंदोलन के बीच महत्वपूर्ण राजनीतिक संबंध था।

खिलाफत आंदोलन मुख्य रूप से प्रथम विश्व युद्ध के बाद खलीफा के प्रश्न और मुस्लिम धार्मिक-राजनीतिक भावनाओं से जुड़ा था।

गांधीजी ने खिलाफत नेताओं के साथ सहयोग करके हिंदू-मुस्लिम एकता को मजबूत करने का प्रयास किया। इससे असहयोग आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन प्राप्त करने में मदद मिली।

परीक्षा ट्रिक:
खिलाफत + असहयोग = 1920 का व्यापक जन-आंदोलन

खिलाफत नेताओं में मुहम्मद अली और शौकत अली विशेष रूप से महत्वपूर्ण थे। SSC CGL के एक प्रश्न में शौकत अली की भूमिका पर भी प्रश्न पूछा गया था।


कांग्रेस के कलकत्ता और नागपुर अधिवेशन का महत्व

असहयोग आंदोलन से जुड़े दो कांग्रेस अधिवेशन विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।

अधिवेशनवर्षमहत्व
कलकत्ता विशेष अधिवेशन1920असहयोग प्रस्ताव को स्वीकार किया गया
नागपुर अधिवेशन1920असहयोग कार्यक्रम को अंतिम स्वीकृति और संगठनात्मक रूप दिया गया

इसलिए परीक्षा में यदि पूछा जाए कि असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव किस अधिवेशन में स्वीकार किया गया? तो उत्तर कलकत्ता विशेष अधिवेशन होगा।

यदि पूछा जाए कि कांग्रेस ने असहयोग कार्यक्रम को अंतिम रूप से किस अधिवेशन में अनुमोदित किया? तो उत्तर नागपुर अधिवेशन, 1920 होगा।


असहयोग आंदोलन में प्रमुख नेताओं की भूमिका

नेताभूमिका / योगदान
महात्मा गांधीआंदोलन के प्रमुख नेता
सी. आर. दासवकालत छोड़कर आंदोलन का समर्थन
मोतीलाल नेहरूवकालत छोड़ी और आंदोलन में सक्रिय भूमिका
जवाहरलाल नेहरूजन-आंदोलन और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय
सरदार वल्लभभाई पटेलगुजरात में आंदोलन को मजबूत किया
राजेंद्र प्रसादबिहार में राष्ट्रीय आंदोलन के प्रमुख नेता
अली बंधुखिलाफत आंदोलन के प्रमुख नेता
मौलाना अबुल कलाम आजादखिलाफत और राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय

असहयोग आंदोलन का विस्तार

असहयोग आंदोलन का प्रभाव कई क्षेत्रों में दिखाई दिया। शहरों में विद्यार्थियों और वकीलों ने बहिष्कार में भाग लिया। विदेशी कपड़ों के बहिष्कार और खादी के प्रचार ने आर्थिक राष्ट्रवाद को मजबूत किया।

ग्रामीण क्षेत्रों में आंदोलन की व्याख्या स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार हुई। कई किसानों और श्रमिक समूहों ने इसे अपने स्थानीय आर्थिक और सामाजिक संघर्षों से जोड़ा।

यही कारण है कि असहयोग आंदोलन केवल कांग्रेस का राजनीतिक कार्यक्रम न रहकर व्यापक जन-आंदोलन में बदल गया।


महिलाओं की भागीदारी

असहयोग आंदोलन ने भारतीय महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को भी बढ़ाया।

महिलाओं ने:

  • विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार में सहयोग किया।
  • खादी के प्रचार में भूमिका निभाई।
  • शराब की दुकानों के पिकेटिंग में भाग लिया।
  • राष्ट्रीय आंदोलन के लिए जनसमर्थन जुटाया।

यह भागीदारी आगे के राष्ट्रीय आंदोलनों में महिलाओं की सक्रिय भूमिका की आधारभूमि बनी।


चौरी-चौरा कांड क्या था?

चौरी-चौरा कांड असहयोग आंदोलन के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है।

4 फरवरी 1922 को वर्तमान उत्तर प्रदेश के गोरखपुर क्षेत्र के चौरी-चौरा में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक संघर्ष हुआ। पुलिस की गोलीबारी के बाद भीड़ ने पुलिस थाने को आग लगा दी, जिससे पुलिसकर्मियों की मृत्यु हुई।

यह घटना गांधीजी की अहिंसा की नीति के बिल्कुल विपरीत थी।


गांधीजी ने असहयोग आंदोलन वापस क्यों लिया?

चौरी-चौरा की हिंसा के बाद गांधीजी को लगा कि देश अभी बड़े पैमाने पर अहिंसक आंदोलन के लिए आवश्यक अनुशासन के स्तर तक नहीं पहुँचा है।

गांधीजी के लिए अहिंसा केवल रणनीति नहीं बल्कि आंदोलन का मूल सिद्धांत थी।

इसी कारण उन्होंने आंदोलन को जारी रखने के बजाय वापस लेने का निर्णय किया।

12 फरवरी 1922 को असहयोग आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर रोक दिया गया।

परीक्षा में सबसे महत्वपूर्ण

चौरी-चौरा कांड → हिंसा → गांधीजी का निर्णय → असहयोग आंदोलन की वापसी


असहयोग आंदोलन की वापसी के परिणाम

आंदोलन की वापसी से कांग्रेस और राष्ट्रीय आंदोलन के भीतर मतभेद उत्पन्न हुए।

कई नेता मानते थे कि आंदोलन अपने चरम पर था और इसे अचानक रोकना उचित नहीं था। दूसरी ओर गांधीजी के लिए अहिंसा का सिद्धांत सर्वोच्च था।

आंदोलन के बाद राष्ट्रीय आंदोलन में आगे की रणनीति को लेकर नई बहस शुरू हुई।

इसी राजनीतिक परिस्थिति में सी. आर. दास और मोतीलाल नेहरू जैसे नेताओं ने बाद में विधान परिषदों के भीतर प्रवेश करके औपनिवेशिक शासन को चुनौती देने की रणनीति अपनाई, जिससे स्वराज पार्टी का गठन हुआ।


असहयोग आंदोलन के परिणाम

1. राष्ट्रीय आंदोलन का जनाधार बढ़ा

असहयोग आंदोलन ने राष्ट्रीय राजनीति को बड़े पैमाने पर जनता से जोड़ा।

2. कांग्रेस का स्वरूप बदला

कांग्रेस केवल शिक्षित राजनीतिक वर्ग की संस्था न रहकर व्यापक जनसंगठन के रूप में विकसित हुई।

3. विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार को बल मिला

स्वदेशी और खादी का प्रचार तेज हुआ।

4. राजनीतिक जागरूकता बढ़ी

किसानों, विद्यार्थियों, व्यापारियों, महिलाओं और अन्य वर्गों में राजनीतिक चेतना बढ़ी।

5. हिंदू-मुस्लिम एकता को कुछ समय के लिए बल मिला

खिलाफत और असहयोग आंदोलनों के संयुक्त प्रयास ने राष्ट्रीय आंदोलन में एकता की भावना को मजबूत किया।

6. गांधीजी का राष्ट्रीय नेतृत्व मजबूत हुआ

गांधीजी भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के सबसे प्रमुख जननेताओं में स्थापित हुए।

7. भविष्य के आंदोलनों के लिए आधार तैयार हुआ

असहयोग आंदोलन के अनुभवों ने आगे के सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे अभियानों के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक आधार तैयार किया।


असहयोग आंदोलन की सीमाएँ

आंदोलन की उपलब्धियों के साथ कुछ सीमाएँ भी थीं:

  • आंदोलन को अचानक वापस लेना पड़ा।
  • कई स्थानों पर आंदोलन का स्वरूप स्थानीय समस्याओं से जुड़ गया।
  • अहिंसक अनुशासन बनाए रखना कठिन साबित हुआ।
  • विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार की आर्थिक सीमाएँ थीं।
  • सरकारी संस्थाओं के विकल्प पर्याप्त रूप से विकसित नहीं हो पाए थे।
  • आंदोलन के भीतर अलग-अलग सामाजिक समूहों की अपेक्षाएँ अलग थीं।

असहयोग आंदोलन और सविनय अवज्ञा आंदोलन में अंतर

आधारअसहयोग आंदोलनसविनय अवज्ञा आंदोलन
प्रमुख काल1920–19221930–1934
प्रमुख नेतामहात्मा गांधीमहात्मा गांधी
प्रमुख तरीकासंस्थाओं/वस्तुओं का बहिष्कार और असहयोगअन्यायपूर्ण कानूनों का उल्लंघन
प्रमुख प्रतीकखादी, चरखा, बहिष्कारनमक सत्याग्रह
प्रमुख घटनाचौरी-चौरादांडी मार्च
वापसी/समापन से जुड़ा प्रमुख संदर्भचौरी-चौरा के बाद वापसीगांधी-इरविन समझौता और बाद की घटनाएँ

असहयोग आंदोलन की महत्वपूर्ण समयरेखा

वर्ष/तिथिघटना
1919रॉलेट एक्ट और जलियांवाला बाग हत्याकांड
1920खिलाफत और असहयोग की संयुक्त राजनीतिक पृष्ठभूमि
1 अगस्त 1920असहयोग कार्यक्रम का औपचारिक आरंभ
सितंबर 1920कलकत्ता विशेष अधिवेशन
दिसंबर 1920नागपुर अधिवेशन
1921आंदोलन का व्यापक विस्तार
4 फरवरी 1922चौरी-चौरा कांड
12 फरवरी 1922असहयोग आंदोलन की वापसी

महत्वपूर्ण सारणी: एक नजर में

प्रश्नउत्तर
असहयोग आंदोलन कब हुआ?1920–1922
प्रमुख नेता कौन थे?महात्मा गांधी
मुख्य सिद्धांत क्या था?अहिंसा और असहयोग
प्रमुख सहयोगी आंदोलनखिलाफत आंदोलन
कांग्रेस का विशेष अधिवेशनकलकत्ता, 1920
अंतिम अनुमोदननागपुर, 1920
प्रमुख घटनाचौरी-चौरा
चौरी-चौरा की तारीख4 फरवरी 1922
आंदोलन वापसी12 फरवरी 1922
मुख्य कार्यक्रमबहिष्कार, स्वदेशी, खादी
असहयोग आंदोलन Quick Revision Infographic
असहयोग आंदोलन Quick Revision Chart

असहयोग आंदोलन MCQs:

प्रश्न 1: असहयोग आंदोलन किस वर्ष शुरू हुआ?

A. 1917
B. 1919
C. 1920
D. 1922
उत्तर: C. 1920
व्याख्या: असहयोग आंदोलन का औपचारिक राजनीतिक आरंभ 1920 में हुआ और इसका प्रमुख नेतृत्व महात्मा गांधी ने किया।

प्रश्न 2: असहयोग आंदोलन के प्रमुख नेता कौन थे?

A. बाल गंगाधर तिलक
B. महात्मा गांधी
C. सुभाष चंद्र बोस
D. जवाहरलाल नेहरू
उत्तर: B. महात्मा गांधी
व्याख्या: असहयोग आंदोलन गांधीजी के नेतृत्व में चलाया गया प्रमुख अखिल भारतीय जन-आंदोलन था।

प्रश्न 3: असहयोग आंदोलन का मुख्य आधार क्या था?

A. सशस्त्र संघर्ष
B. अहिंसक असहयोग
C. संवैधानिक सुधार
D. क्रांतिकारी हिंसा
उत्तर: B. अहिंसक असहयोग
व्याख्या: गांधीजी ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध अहिंसा और असहयोग को आंदोलन का प्रमुख आधार बनाया।

प्रश्न 4: असहयोग प्रस्ताव को कांग्रेस के किस अधिवेशन में स्वीकार किया गया?

A. लखनऊ
B. कलकत्ता विशेष अधिवेशन
C. लाहौर
D. कराची
उत्तर: B. कलकत्ता विशेष अधिवेशन
व्याख्या: सितंबर 1920 के कलकत्ता विशेष अधिवेशन में असहयोग प्रस्ताव स्वीकार किया गया।

प्रश्न 5: असहयोग कार्यक्रम को अंतिम रूप से किस अधिवेशन में अनुमोदित किया गया?

A. नागपुर अधिवेशन
B. सूरत अधिवेशन
C. लखनऊ अधिवेशन
D. मद्रास अधिवेशन
उत्तर: A. नागपुर अधिवेशन
व्याख्या: दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन में असहयोग कार्यक्रम को अंतिम स्वीकृति मिली।

प्रश्न 6: असहयोग आंदोलन का संबंध किस आंदोलन से था?

A. स्वदेशी आंदोलन
B. खिलाफत आंदोलन
C. भारत छोड़ो आंदोलन
D. होमरूल आंदोलन
उत्तर: B. खिलाफत आंदोलन
व्याख्या: गांधीजी ने खिलाफत नेताओं के साथ सहयोग किया और दोनों आंदोलनों ने कुछ समय के लिए व्यापक राष्ट्रीय लामबंदी को मजबूत किया।

प्रश्न 7: चौरी-चौरा कांड किस वर्ष हुआ?

A. 1919
B. 1920
C. 1921
D. 1922
उत्तर: D. 1922
व्याख्या: चौरी-चौरा की घटना 4 फरवरी 1922 को हुई थी।

प्रश्न 8: चौरी-चौरा कांड के बाद गांधीजी ने क्या किया?

A. आंदोलन तेज किया
B. सविनय अवज्ञा शुरू की
C. असहयोग आंदोलन वापस लिया
D. कांग्रेस छोड़ दी
उत्तर: C. असहयोग आंदोलन वापस लिया
व्याख्या: चौरी-चौरा की हिंसा गांधीजी की अहिंसा की नीति के विरुद्ध थी, इसलिए उन्होंने आंदोलन को रोकने का निर्णय लिया।

प्रश्न 9: चौरी-चौरा किस वर्तमान राज्य में स्थित है?

A. बिहार
B. उत्तर प्रदेश
C. मध्य प्रदेश
D. राजस्थान
उत्तर: B. उत्तर प्रदेश
व्याख्या: चौरी-चौरा वर्तमान उत्तर प्रदेश के गोरखपुर क्षेत्र में स्थित है।

प्रश्न 10: असहयोग आंदोलन की वापसी किस तिथि को हुई?

A. 4 फरवरी 1922
B. 8 फरवरी 1922
C. 12 फरवरी 1922
D. 15 फरवरी 1922
उत्तर: C. 12 फरवरी 1922
व्याख्या: चौरी-चौरा की हिंसक घटना के बाद गांधीजी ने 12 फरवरी 1922 को आंदोलन रोक दिया।

प्रश्न 11: असहयोग आंदोलन में किसका बहिष्कार किया गया?

A. विदेशी वस्तुओं का
B. भारतीय वस्तुओं का
C. कृषि उत्पादों का
D. खादी का
उत्तर: A. विदेशी वस्तुओं का
व्याख्या: विदेशी वस्तुओं, विशेषकर विदेशी कपड़ों का बहिष्कार आंदोलन का प्रमुख कार्यक्रम था।

प्रश्न 12: असहयोग आंदोलन में किसे बढ़ावा दिया गया?

A. विदेशी कपड़ा
B. खादी
C. ब्रिटिश शिक्षा
D. आयातित वस्तुएँ
उत्तर: B. खादी
व्याख्या: खादी और चरखा स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और आर्थिक राष्ट्रवाद के प्रतीक बने।

प्रश्न 13: निम्न में से कौन खिलाफत आंदोलन के प्रमुख नेताओं में थे?

A. मुहम्मद अली और शौकत अली
B. भगत सिंह और राजगुरु
C. दादाभाई नौरोजी और गोखले
D. तिलक और लाजपत राय
उत्तर: A. मुहम्मद अली और शौकत अली
व्याख्या: अली बंधु खिलाफत आंदोलन के प्रमुख नेताओं में थे और गांधीजी ने खिलाफत प्रश्न को असहयोग आंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया।

प्रश्न 14: असहयोग आंदोलन में वकीलों से क्या अपील की गई?

A. ब्रिटिश न्यायालयों का बहिष्कार करें
B. सरकारी पद लें
C. विदेशी वस्तुएँ बेचें
D. परिषदों में ही रहें
उत्तर: A. ब्रिटिश न्यायालयों का बहिष्कार करें
व्याख्या: आंदोलन के कार्यक्रम में ब्रिटिश न्यायालयों के बहिष्कार की अपील शामिल थी।

प्रश्न 15: असहयोग आंदोलन के दौरान किसे प्रोत्साहित किया गया?

A. विदेशी शिक्षा
B. राष्ट्रीय शिक्षा
C. औपनिवेशिक उपाधियाँ
D. विदेशी कपड़ा
उत्तर: B. राष्ट्रीय शिक्षा
व्याख्या: सरकारी शिक्षण संस्थानों के बहिष्कार के साथ राष्ट्रीय शिक्षण संस्थाओं को प्रोत्साहित किया गया।

प्रश्न 16: असहयोग आंदोलन के दौरान गांधीजी का प्रमुख सिद्धांत क्या था?

A. हिंसा
B. अहिंसा
C. सैन्य संघर्ष
D. गुप्त क्रांति
उत्तर: B. अहिंसा
व्याख्या: गांधीजी के लिए अहिंसा आंदोलन का मूल सिद्धांत था और चौरी-चौरा के बाद आंदोलन वापस लेने में इसकी निर्णायक भूमिका रही।

प्रश्न 17: असहयोग आंदोलन का एक प्रमुख परिणाम क्या था?

A. कांग्रेस का जनाधार कमजोर हुआ
B. जनता की राजनीतिक भागीदारी बढ़ी
C. ब्रिटिश शासन समाप्त हो गया
D. भारत तुरंत स्वतंत्र हो गया
उत्तर: B. जनता की राजनीतिक भागीदारी बढ़ी
व्याख्या: आंदोलन ने राष्ट्रीय राजनीति को बड़ी संख्या में आम लोगों से जोड़ा और कांग्रेस के जनाधार को विस्तृत किया।

प्रश्न 18: असहयोग आंदोलन के बाद सी. आर. दास और मोतीलाल नेहरू किस राजनीतिक रणनीति से जुड़े?

A. स्वराज पार्टी
B. मुस्लिम लीग
C. होमरूल लीग
D. आजाद हिंद फौज
उत्तर: A. स्वराज पार्टी
व्याख्या: आंदोलन की वापसी के बाद परिषदों के भीतर प्रवेश करके औपनिवेशिक शासन को चुनौती देने की रणनीति से स्वराजवादी राजनीति का विकास हुआ।

प्रश्न 19: असहयोग आंदोलन का मुख्य आर्थिक संदेश क्या था?

A. विदेशी वस्तुओं को अपनाना
B. स्वदेशी और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार
C. केवल कृषि पर निर्भरता
D. औद्योगिक उत्पादन बंद करना
उत्तर: B. स्वदेशी और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार
व्याख्या: आंदोलन ने विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार तथा स्वदेशी और खादी के उपयोग को बढ़ावा दिया।

प्रश्न 20: निम्न में से कौन-सा असहयोग आंदोलन से संबंधित सही क्रम है?

A. चौरी-चौरा → असहयोग → कलकत्ता
B. कलकत्ता → नागपुर → चौरी-चौरा
C. नागपुर → कलकत्ता → चौरी-चौरा
D. चौरी-चौरा → नागपुर → कलकत्ता
उत्तर: B. कलकत्ता → नागपुर → चौरी-चौरा
व्याख्या: 1920 में कलकत्ता विशेष अधिवेशन में प्रस्ताव स्वीकार हुआ, दिसंबर 1920 में नागपुर में अंतिम स्वीकृति मिली और 1922 में चौरी-चौरा की घटना हुई।


असहयोग आंदोलन Previous Year Questions (PYQs)

PYQ 1: असहयोग आंदोलन कब से कब तक चलाया गया था?

Exam: SSC CHSL
उत्तर: सितंबर 1920 से फरवरी 1922
व्याख्या: SSC CHSL के प्रश्नपत्र में असहयोग आंदोलन की अवधि से संबंधित प्रश्न पूछा गया था। उपलब्ध प्रश्नपत्र में सही उत्तर सितंबर 1920 से फरवरी 1922 दिया गया है।

PYQ 2: असहयोग आंदोलन किस वर्ष शुरू किया गया था?

Exam: SSC CHSL
उत्तर: 1920
व्याख्या: SSC के पिछले प्रश्नों के संग्रह में गांधीजी द्वारा असहयोग आंदोलन शुरू करने का वर्ष 1920 पूछा गया है।

PYQ 3: असहयोग आंदोलन को किस घटना के बाद वापस लिया गया?

Exam: SSC CGL
उत्तर: चौरी-चौरा कांड
व्याख्या: चौरी-चौरा की हिंसक घटना के बाद गांधीजी ने असहयोग आंदोलन वापस लिया। यह SSC की तैयारी सामग्री में सीधे पूछा गया महत्वपूर्ण प्रश्न है।

PYQ 4: खिलाफत के समर्थन में असहयोग आंदोलन शुरू करने के लिए गांधीजी को समझाने वाले नेताओं में कौन प्रमुख थे?

Exam: SSC CGL Tier-I
उत्तर: शौकत अली
व्याख्या: शौकत अली खिलाफत आंदोलन के प्रमुख नेताओं में थे और गांधीजी को खिलाफत के समर्थन में असहयोग आंदोलन से जोड़ने के प्रयास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।

PYQ 5: चौरी-चौरा घटना किस वर्ष हुई थी?

Exam: SSC CHSL Previous Paper
उत्तर: 1922
व्याख्या: चौरी-चौरा की घटना असहयोग आंदोलन के दौरान हुई और इसी हिंसक घटना के बाद गांधीजी ने आंदोलन वापस लेने का निर्णय किया।

असहयोग आंदोलन FAQs:

  1. असहयोग आंदोलन क्या था?

    असहयोग आंदोलन 1920 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में चलाया गया अहिंसक जन-आंदोलन था, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन के साथ भारतीय जनता का सहयोग समाप्त करना था।

  2. असहयोग आंदोलन कब शुरू हुआ?

    असहयोग आंदोलन का औपचारिक कार्यक्रम 1 अगस्त 1920 को शुरू हुआ। कांग्रेस ने सितंबर 1920 के कलकत्ता विशेष अधिवेशन में प्रस्ताव स्वीकार किया और दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन में इसे अंतिम स्वीकृति दी।

  3. असहयोग आंदोलन क्यों शुरू किया गया था?

    इसके पीछे रॉलेट एक्ट, जलियांवाला बाग हत्याकांड, खिलाफत प्रश्न, युद्धोत्तर आर्थिक कठिनाइयाँ और स्वराज्य की मांग जैसे प्रमुख कारण थे।

  4. असहयोग आंदोलन क्यों वापस लिया गया?

    4 फरवरी 1922 के चौरी-चौरा कांड में हिंसा होने के बाद गांधीजी ने अहिंसा के सिद्धांत के कारण आंदोलन वापस लेने का निर्णय किया।

  5. चौरी-चौरा कांड कब हुआ था?

    4 फरवरी 1922 को चौरी-चौरा में हिंसक घटना हुई थी। सरकारी जिला स्रोत इसे गोरखपुर क्षेत्र, उत्तर प्रदेश से संबंधित बताता है।

  6. असहयोग आंदोलन के प्रमुख कार्यक्रम क्या थे?

    सरकारी उपाधियों का त्याग, सरकारी शिक्षण संस्थानों और न्यायालयों का बहिष्कार, विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार, खादी-चरखे का प्रचार और राष्ट्रीय शिक्षा को बढ़ावा देना प्रमुख कार्यक्रम थे।

  7. असहयोग आंदोलन और खिलाफत आंदोलन का क्या संबंध था?

    गांधीजी ने खिलाफत नेताओं के साथ सहयोग करके खिलाफत प्रश्न को व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ा। इससे हिंदू-मुस्लिम एकता और राष्ट्रीय लामबंदी को कुछ समय के लिए बल मिला।

  8. असहयोग आंदोलन का सबसे बड़ा परिणाम क्या था?

    इसका प्रमुख प्रभाव यह था कि भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का जनाधार बहुत व्यापक हुआ और कांग्रेस एक अधिक प्रभावी जनसंगठन के रूप में विकसित हुई।

निष्कर्ष

असहयोग आंदोलन 1920–1922 के बीच भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण जन-आंदोलन था। महात्मा गांधी ने अहिंसा और असहयोग को इसका आधार बनाया तथा विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार, खादी, राष्ट्रीय शिक्षा और ब्रिटिश संस्थाओं से दूरी जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से जनता को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ा।

रॉलेट एक्ट, जलियांवाला बाग हत्याकांड, खिलाफत प्रश्न और युद्धोत्तर आर्थिक कठिनाइयाँ इसकी पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण थीं। कलकत्ता विशेष अधिवेशन और नागपुर अधिवेशन ने इसे कांग्रेस के व्यापक राजनीतिक कार्यक्रम का रूप दिया।

4 फरवरी 1922 का चौरी-चौरा कांड इस आंदोलन का निर्णायक मोड़ बना। हिंसा के बाद गांधीजी ने अहिंसा के सिद्धांत को सर्वोच्च मानते हुए 12 फरवरी 1922 को आंदोलन वापस ले लिया।

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