| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| आंदोलन | सविनय अवज्ञा आंदोलन |
| English Name | Civil Disobedience Movement |
| प्रमुख नेता | महात्मा गांधी |
| प्रमुख संगठन | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस |
| प्रारंभ | 1930 |
| प्रमुख शुरुआत | दांडी मार्च और नमक कानून का उल्लंघन |
| दांडी मार्च | 12 मार्च 1930 से |
| नमक कानून तोड़ा | 6 अप्रैल 1930 |
| प्रमुख स्थान | साबरमती आश्रम से दांडी |
| प्रमुख समझौता | गांधी-इरविन समझौता |
| समझौते की तारीख | 5 मार्च 1931 |
| द्वितीय चरण | 1932 |
| आंदोलन का अंतिम चरण | 1933–34 |
| प्रमुख आधार | अहिंसा, सत्याग्रह और कानूनों की सविनय अवज्ञा |
प्रश्न: सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत किस घटना से मानी जाती है?
उत्तर: सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत 1930 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में नमक कानून तोड़ने के अभियान से हुई। 12 मार्च 1930 को गांधीजी ने साबरमती आश्रम से दांडी मार्च शुरू किया और 6 अप्रैल 1930 को दांडी में समुद्र के पानी से नमक बनाकर ब्रिटिश नमक कानून का उल्लंघन किया।
संक्षिप्त परिचय
सविनय अवज्ञा आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक व्यापक जनआंदोलन था, जिसे महात्मा गांधी के नेतृत्व में 1930 में प्रारंभ किया गया। इसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन के अन्यायपूर्ण कानूनों और औपनिवेशिक नीतियों का अहिंसात्मक तरीके से उल्लंघन करके ब्रिटिश शासन पर राजनीतिक दबाव बनाना था।
इस आंदोलन का सबसे प्रसिद्ध प्रतीक दांडी मार्च था। गांधीजी ने नमक जैसे सामान्य और सभी लोगों के लिए आवश्यक पदार्थ को आंदोलन का माध्यम बनाया। इससे आंदोलन केवल राजनीतिक नेताओं तक सीमित नहीं रहा बल्कि आम जनता तक पहुंचा।
यह आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष में असहयोग आंदोलन के बाद एक महत्वपूर्ण चरण था। दोनों आंदोलनों में अहिंसा और जनभागीदारी समान थी, लेकिन सविनय अवज्ञा आंदोलन में अन्यायपूर्ण कानूनों को जानबूझकर तोड़ना एक प्रमुख रणनीति बनी।
सविनय अवज्ञा आंदोलन क्या है?
सविनय अवज्ञा आंदोलन का अर्थ है—अन्यायपूर्ण या दमनकारी कानूनों का शांतिपूर्ण और अहिंसात्मक तरीके से उल्लंघन करना तथा उसके परिणामस्वरूप मिलने वाली सजा को स्वीकार करना।
गांधीवादी विचारधारा में यह केवल कानून तोड़ने का अभियान नहीं था। इसके पीछे सत्याग्रह, अहिंसा, आत्मबल और अन्याय के विरुद्ध नैतिक प्रतिरोध की भावना थी।
असहयोग और सविनय अवज्ञा में मुख्य अंतर
असहयोग आंदोलन में मुख्य रूप से ब्रिटिश संस्थाओं और व्यवस्थाओं से सहयोग वापस लेने पर जोर था।
सविनय अवज्ञा आंदोलन में एक कदम आगे बढ़कर अन्यायपूर्ण कानूनों का प्रत्यक्ष उल्लंघन किया गया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
सविनय अवज्ञा आंदोलन अचानक शुरू नहीं हुआ था। इसके पीछे 1920 के दशक के अंत की कई राजनीतिक घटनाएं थीं।
पूर्ण स्वराज की मांग
दिसंबर 1929 में कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज को लक्ष्य बनाया गया। जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में हुए इस अधिवेशन के बाद 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया गया।
इस राजनीतिक वातावरण ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध अगले बड़े जनआंदोलन की जमीन तैयार की।
गांधीजी की 11 मांगें
गांधीजी ने वायसराय लॉर्ड इरविन के सामने कई मांगें रखीं। इनमें नमक कर और नमक पर सरकारी एकाधिकार का मुद्दा विशेष रूप से महत्वपूर्ण था। गांधी हेरिटेज पोर्टल के अनुसार जनवरी 1930 में 11 बिंदुओं को सार्वजनिक किया गया और मार्च में गांधीजी ने इरविन को पत्र लिखकर नमक कानून तोड़ने के अपने निर्णय का कारण बताया।
नमक को आंदोलन का प्रतीक क्यों बनाया गया?
नमक हर व्यक्ति की आवश्यकता थी। गरीब और अमीर दोनों इसका उपयोग करते थे। इसलिए नमक पर कर और सरकारी एकाधिकार आम जनता के लिए आसानी से समझ आने वाला अन्याय था।
गांधीजी ने इसी कारण नमक कानून को चुनौती देने का निर्णय लिया।
सविनय अवज्ञा आंदोलन के कारण
1. पूर्ण स्वराज की मांग
कांग्रेस ने 1929 के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज को अपना लक्ष्य घोषित किया। इससे ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष को नई दिशा मिली।
2. ब्रिटिश आर्थिक शोषण
औपनिवेशिक आर्थिक नीतियों से भारतीय उद्योग, व्यापार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही थी। विदेशी वस्तुओं का प्रभाव और भारतीय संसाधनों का औपनिवेशिक उपयोग असंतोष का कारण बना।
3. नमक कानून
नमक पर ब्रिटिश नियंत्रण और कर जनता के लिए प्रत्यक्ष आर्थिक बोझ था। गांधीजी ने इसी मुद्दे को जनआंदोलन का प्रतीक बनाया।
4. साइमन कमीशन का विरोध
साइमन कमीशन में कोई भारतीय सदस्य नहीं था। इसके विरोध ने राष्ट्रवादी राजनीति को और मजबूत किया।
5. संवैधानिक सुधारों से असंतोष
भारतीय राष्ट्रवादी नेतृत्व ब्रिटिश सरकार से अधिक राजनीतिक अधिकार और वास्तविक स्वशासन चाहता था।
6. गांधीवादी सत्याग्रह
अहिंसा और सत्याग्रह के माध्यम से ब्रिटिश शासन का विरोध करने की गांधीवादी रणनीति ने आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाया।
सविनय अवज्ञा आंदोलन कब शुरू हुआ?
सविनय अवज्ञा आंदोलन का प्रमुख राष्ट्रीय आरंभ 1930 में हुआ।
इसकी सबसे प्रसिद्ध शुरुआत दांडी मार्च से जुड़ी है।
गांधीजी ने 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से दांडी की ओर मार्च शुरू किया। सरकारी स्रोत के अनुसार गांधीजी के साथ शुरुआत में 78 स्वयंसेवक थे और यह यात्रा लगभग 390 किमी की थी।
दांडी मार्च क्या था?
दांडी मार्च या नमक मार्च गांधीजी द्वारा साबरमती आश्रम से गुजरात के तटीय गांव दांडी तक किया गया ऐतिहासिक मार्च था।
दांडी मार्च की मुख्य बातें
- प्रारंभ: 12 मार्च 1930
- स्थान: साबरमती आश्रम
- गंतव्य: दांडी
- प्रमुख नेता: महात्मा गांधी
- प्रारंभिक साथी: 78 स्वयंसेवक
- दूरी: लगभग 390 किमी
- उद्देश्य: नमक कानून का विरोध
- नमक कानून का उल्लंघन: 6 अप्रैल 1930
सरकारी स्रोतों के अनुसार यह यात्रा 24 दिनों तक चली और ब्रिटिश नमक एकाधिकार के खिलाफ अहिंसक प्रतिरोध का प्रतीक बनी।
दांडी में क्या हुआ?
6 अप्रैल 1930 को गांधीजी ने दांडी में समुद्र के पानी से नमक बनाकर ब्रिटिश नमक कानून का उल्लंघन किया। इस प्रतीकात्मक कार्रवाई ने देश के विभिन्न हिस्सों में नमक कानून तोड़ने के आंदोलनों को प्रेरित किया।
नमक सत्याग्रह क्या था?
नमक कानून के विरुद्ध किया गया सत्याग्रह नमक सत्याग्रह कहलाया।
यह सविनय अवज्ञा आंदोलन का सबसे प्रसिद्ध चरण था।
नमक सत्याग्रह की विशेषता यह थी कि इसमें एक ऐसा मुद्दा चुना गया जिसे देश का सामान्य व्यक्ति आसानी से समझ सकता था। इससे स्वतंत्रता संघर्ष का संदेश ग्रामीण और सामान्य जनता तक तेजी से पहुंचा।
सविनय अवज्ञा आंदोलन का कार्यक्रम
आंदोलन के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में परिस्थितियों के अनुसार कई प्रकार के कार्यक्रम चलाए गए।
प्रमुख गतिविधियां थीं:
- नमक कानून का उल्लंघन
- विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार
- विदेशी कपड़ों का बहिष्कार
- शराब की दुकानों के सामने शांतिपूर्ण धरना
- कुछ क्षेत्रों में करों का विरोध
- सरकारी नीतियों का शांतिपूर्ण विरोध
- प्रतिबंधित साहित्य का सार्वजनिक पाठ
- राष्ट्रीय ध्वज का प्रदर्शन
- स्वदेशी और खादी को बढ़ावा देना
विभिन्न क्षेत्रों में आंदोलन का स्वरूप स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग रहा। उदाहरण के लिए उत्तराखंड के अल्मोड़ा क्षेत्र में विदेशी वस्तुओं और शराब के बहिष्कार के साथ भूमि कर और वन नियमों के खिलाफ भी सत्याग्रह हुआ।
आंदोलन में महिलाओं की भूमिका
सविनय अवज्ञा आंदोलन ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को भी व्यापक बनाया।
कई महिलाओं ने:
- नमक कानून तोड़ा
- विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया
- शराब की दुकानों पर पिकेटिंग की
- राष्ट्रीय आंदोलन में जुलूस निकाले
- जेल यात्राएं कीं
- राष्ट्रीय ध्वज और प्रतिबंधित साहित्य से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लिया
सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रमुख नेता
| नेता | भूमिका / योगदान |
| महात्मा गांधी | आंदोलन के प्रमुख नेता और दांडी मार्च के नेतृत्वकर्ता |
| सरदार वल्लभभाई पटेल | गुजरात में आंदोलन और सत्याग्रह से जुड़े प्रमुख नेता |
| जवाहरलाल नेहरू | पूर्ण स्वराज और राष्ट्रीय आंदोलन के प्रमुख नेता |
| अब्बास तैयबजी | नमक सत्याग्रह से जुड़े वरिष्ठ राष्ट्रवादी नेता |
| सरोजिनी नायडू | नमक सत्याग्रह और धरना आंदोलनों में सक्रिय भूमिका |
| खान अब्दुल गफ्फार खान | उत्तर-पश्चिम सीमांत क्षेत्र में अहिंसक आंदोलन से जुड़े प्रमुख नेता |
| कमलादेवी चट्टोपाध्याय | नमक कानून तोड़ने और महिला भागीदारी से जुड़ी प्रमुख कार्यकर्ता |
सविनय अवज्ञा आंदोलन और गांधी-इरविन समझौता
आंदोलन के दबाव और राजनीतिक परिस्थितियों के बीच गांधीजी तथा वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच बातचीत हुई।
5 मार्च 1931 को गांधी-इरविन समझौते पर हस्ताक्षर हुए। गांधी हेरिटेज पोर्टल के अनुसार 4 मार्च को समझौते पर सहमति बनी और 5 मार्च को इसे औपचारिक रूप से घोषित किया गया।
गांधी-इरविन समझौते की प्रमुख बातें
कांग्रेस की ओर से:
- सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थगित करना
- द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेना
सरकार की ओर से प्रमुख रियायतों में:
- अहिंसक राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े कई कैदियों की रिहाई
- जब्त संपत्तियों के संबंध में रियायतें
- तटीय क्षेत्रों में व्यक्तिगत उपयोग के लिए नमक बनाने की अनुमति जैसी व्यवस्थाएं
शामिल थीं।
महत्वपूर्ण: गांधी-इरविन समझौता आंदोलन को स्थगित करने से संबंधित था; इसे स्वतंत्रता प्राप्ति का समझौता नहीं समझना चाहिए।
द्वितीय गोलमेज सम्मेलन
गांधी-इरविन समझौते के बाद गांधीजी ने कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया।
यह सम्मेलन लंदन में 1931 में हुआ।
गांधीजी भारतीय राजनीतिक और संवैधानिक भविष्य से संबंधित मुद्दों को लेकर ब्रिटिश सरकार के सामने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का पक्ष रखने गए।
लेकिन सम्मेलन से अपेक्षित परिणाम नहीं निकला। गांधीजी भारत लौटे और राजनीतिक परिस्थितियां फिर से संघर्ष की ओर बढ़ीं। गांधी हेरिटेज पोर्टल के अनुसार दिसंबर 1931 में सम्मेलन समाप्त हुआ और उसके बाद कांग्रेस ने पुनः सविनय अवज्ञा की दिशा में बढ़ने का निर्णय लिया।
सविनय अवज्ञा आंदोलन का दूसरा चरण
1932 में आंदोलन फिर से शुरू हुआ।
इस चरण में ब्रिटिश सरकार ने कठोर दमनकारी नीति अपनाई। कई राष्ट्रवादी नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया।
गांधीजी को भी जनवरी 1932 में गिरफ्तार किया गया। गांधी हेरिटेज पोर्टल की घटनाक्रम सूची में 1 जनवरी 1932 को कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा सविनय अवज्ञा के प्रस्ताव और 4 जनवरी 1932 को गांधीजी की गिरफ्तारी का उल्लेख है।
इस चरण में आंदोलन को पहले चरण जैसी व्यापक सफलता नहीं मिली और धीरे-धीरे इसकी गति कम हुई।
सविनय अवज्ञा आंदोलन का अंत कब हुआ?
सविनय अवज्ञा आंदोलन का अंतिम चरण 1934 में समाप्त हुआ।
1933–34 के दौरान आंदोलन की राजनीतिक शक्ति कमजोर होती गई। अंततः 1934 में सविनय अवज्ञा आंदोलन को वापस ले लिया गया। सरकारी इतिहास सामग्री भी 1934 में इसके withdrawal का उल्लेख करती है।
सविनय अवज्ञा आंदोलन की समयरेखा
| वर्ष / तारीख | प्रमुख घटना |
| दिसंबर 1929 | लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज का लक्ष्य |
| 26 जनवरी 1930 | स्वतंत्रता दिवस का आयोजन |
| जनवरी 1930 | गांधीजी की 11 मांगें |
| 2 मार्च 1930 | गांधीजी का लॉर्ड इरविन को पत्र |
| 12 मार्च 1930 | दांडी मार्च शुरू |
| 6 अप्रैल 1930 | दांडी में नमक कानून का उल्लंघन |
| 1930 | प्रथम चरण का व्यापक विस्तार |
| 5 मार्च 1931 | गांधी-इरविन समझौता |
| 1931 | द्वितीय गोलमेज सम्मेलन |
| 4 जनवरी 1932 | गांधीजी की गिरफ्तारी और दूसरे चरण की शुरुआत |
| 1933 | आंदोलन की रणनीति में बदलाव |
| 1934 | सविनय अवज्ञा आंदोलन वापस |
गांधी हेरिटेज पोर्टल के कालक्रम में दांडी मार्च, नमक कानून उल्लंघन, गांधी-इरविन समझौता और 1932 के पुनः आरंभ से जुड़ी प्रमुख तिथियां दर्ज हैं।
सविनय अवज्ञा आंदोलन के परिणाम
1. राष्ट्रीय आंदोलन का विस्तार
आंदोलन ने स्वतंत्रता संघर्ष को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाया।
2. महिलाओं की भागीदारी बढ़ी
महिलाओं ने बड़े स्तर पर सत्याग्रह, पिकेटिंग और अन्य गतिविधियों में भाग लिया।
3. ब्रिटिश शासन पर राजनीतिक दबाव
आंदोलन ने ब्रिटिश सरकार को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के साथ बातचीत करने के लिए मजबूर किया।
4. नमक कानून राष्ट्रीय मुद्दा बना
एक सामान्य दैनिक आवश्यकता को राष्ट्रीय स्वतंत्रता संघर्ष के प्रभावी प्रतीक में बदल दिया गया।
5. गांधी-इरविन समझौता
आंदोलन के दबाव ने 1931 में ब्रिटिश सरकार और कांग्रेस के बीच बातचीत का रास्ता बनाया।
6. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव
दांडी मार्च ने भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष को अंतरराष्ट्रीय ध्यान दिलाया। सरकारी इतिहास सामग्री के अनुसार 1931 में Time Magazine ने गांधीजी को “Man of the Year” के रूप में प्रमुखता दी और दांडी मार्च पर चर्चा की।
सविनय अवज्ञा आंदोलन की सीमाएँ
परीक्षा में केवल उपलब्धियां ही नहीं, इसकी सीमाएं भी पूछी जा सकती हैं।
- आंदोलन को पूरे देश में समान तीव्रता नहीं मिली।
- ब्रिटिश सरकार के दमन से आंदोलन प्रभावित हुआ।
- गांधी-इरविन समझौते के बाद कई राष्ट्रवादी नेता पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे।
- द्वितीय गोलमेज सम्मेलन से अपेक्षित संवैधानिक समाधान नहीं निकला।
- 1932 के पुनः आरंभ के बाद आंदोलन को पहले चरण जैसी व्यापक गति नहीं मिली।
- 1934 तक आंदोलन को वापस लेना पड़ा।
सविनय अवज्ञा आंदोलन और असहयोग आंदोलन में अंतर
| आधार | असहयोग आंदोलन | सविनय अवज्ञा आंदोलन |
| प्रमुख वर्ष | 1920–1922 | 1930–1934 |
| प्रमुख नेता | महात्मा गांधी | महात्मा गांधी |
| मुख्य रणनीति | सहयोग वापस लेना | अन्यायपूर्ण कानूनों का उल्लंघन |
| प्रमुख प्रतीक | विदेशी वस्तुओं व संस्थाओं का बहिष्कार | नमक कानून का उल्लंघन |
| प्रमुख घटना | चौरी-चौरा के बाद वापसी | दांडी मार्च |
| प्रमुख समझौता | — | गांधी-इरविन समझौता |
| प्रमुख लक्ष्य | स्वराज की दिशा में जनदबाव | पूर्ण स्वराज की मांग को मजबूत करना |
| प्रमुख विशेषता | असहयोग | सविनय अवज्ञा + सत्याग्रह |
महत्वपूर्ण सारणी: एक नजर में पूरा आंदोलन
| विषय | उत्तर |
| आंदोलन | सविनय अवज्ञा आंदोलन |
| अंग्रेजी नाम | Civil Disobedience Movement |
| वर्ष | 1930–1934 |
| प्रमुख नेता | महात्मा गांधी |
| मुख्य आधार | अहिंसा और सत्याग्रह |
| प्रमुख मुद्दा | नमक कानून |
| दांडी मार्च | 12 मार्च 1930 |
| नमक कानून भंग | 6 अप्रैल 1930 |
| समझौता | गांधी-इरविन समझौता |
| समझौता तिथि | 5 मार्च 1931 |
| गोलमेज सम्मेलन | द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में गांधीजी की भागीदारी |
| पुनः शुरुआत | 1932 |
| अंतिम वापसी | 1934 |

सविनय अवज्ञा आंदोलन MCQs:
प्रश्न 1: सविनय अवज्ञा आंदोलन का प्रमुख राष्ट्रीय चरण किस वर्ष शुरू हुआ?
A. 1919
B. 1920
C. 1930
D. 1942
उत्तर: C. 1930
व्याख्या: महात्मा गांधी के नेतृत्व में सविनय अवज्ञा आंदोलन का प्रमुख राष्ट्रीय चरण 1930 में शुरू हुआ।
प्रश्न 2: सविनय अवज्ञा आंदोलन का सबसे प्रसिद्ध प्रतीक कौन-सा था?
A. चंपारण सत्याग्रह
B. दांडी मार्च
C. खेड़ा सत्याग्रह
D. भारत छोड़ो आंदोलन
उत्तर: B. दांडी मार्च
व्याख्या: दांडी मार्च ने नमक कानून के विरोध को राष्ट्रीय आंदोलन का व्यापक प्रतीक बनाया।
प्रश्न 3: दांडी मार्च कब शुरू हुआ था?
A. 26 जनवरी 1930
B. 2 मार्च 1930
C. 12 मार्च 1930
D. 6 अप्रैल 1930
उत्तर: C. 12 मार्च 1930
व्याख्या: गांधीजी ने 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से दांडी मार्च शुरू किया था।
प्रश्न 4: दांडी मार्च किस स्थान से शुरू हुआ?
A. वर्धा
B. साबरमती आश्रम
C. सेवाग्राम
D. मुंबई
उत्तर: B. साबरमती आश्रम
व्याख्या: गांधीजी ने गुजरात स्थित साबरमती आश्रम से दांडी की ओर मार्च प्रारंभ किया था।
प्रश्न 5: गांधीजी ने दांडी में नमक कानून कब तोड़ा?
A. 12 मार्च 1930
B. 26 मार्च 1930
C. 5 अप्रैल 1930
D. 6 अप्रैल 1930
उत्तर: D. 6 अप्रैल 1930
व्याख्या: 6 अप्रैल 1930 को गांधीजी ने दांडी में नमक बनाकर ब्रिटिश नमक कानून का उल्लंघन किया।
प्रश्न 6: दांडी मार्च का मुख्य उद्देश्य क्या था?
A. विदेशी कपड़ों का बहिष्कार
B. नमक कानून का विरोध
C. स्कूलों का बहिष्कार
D. किसान कर समाप्त करना
उत्तर: B. नमक कानून का विरोध
व्याख्या: नमक कानून ब्रिटिश आर्थिक नियंत्रण का प्रतीक था और गांधीजी ने इसे सविनय अवज्ञा का प्रमुख मुद्दा बनाया।
प्रश्न 7: गांधी-इरविन समझौता कब हुआ?
A. 26 जनवरी 1930
B. 5 मार्च 1931
C. 12 मार्च 1931
D. 26 जनवरी 1932
उत्तर: B. 5 मार्च 1931
व्याख्या: गांधीजी और वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच समझौता 5 मार्च 1931 को हुआ।
प्रश्न 8: गांधी-इरविन समझौता किनके बीच हुआ था?
A. गांधी और कर्जन
B. गांधी और इरविन
C. नेहरू और इरविन
D. पटेल और विलिंगडन
उत्तर: B. गांधी और इरविन
व्याख्या: समझौता महात्मा गांधी और तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच हुआ था।
प्रश्न 9: गांधी-इरविन समझौते के बाद क्या हुआ?
A. भारत स्वतंत्र हुआ
B. आंदोलन स्थगित हुआ
C. कांग्रेस समाप्त हुई
D. नमक कानून समाप्त हुआ
उत्तर: B. आंदोलन स्थगित हुआ
व्याख्या: समझौते के बाद कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थगित किया और गांधीजी ने द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया।
प्रश्न 10: गांधीजी ने किस गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया?
A. प्रथम
B. द्वितीय
C. तृतीय
D. सभी
उत्तर: B. द्वितीय
व्याख्या: गांधीजी 1931 में द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में शामिल हुए।
प्रश्न 11: सविनय अवज्ञा आंदोलन का दूसरा चरण किस वर्ष शुरू हुआ?
A. 1930
B. 1931
C. 1932
D. 1934
उत्तर: C. 1932
व्याख्या: गांधी-इरविन समझौते और गोलमेज सम्मेलन के बाद 1932 में आंदोलन फिर से शुरू हुआ।
प्रश्न 12: सविनय अवज्ञा आंदोलन का अंतिम रूप से अंत किस वर्ष हुआ?
A. 1931
B. 1932
C. 1933
D. 1934
उत्तर: D. 1934
व्याख्या: आंदोलन का अंतिम चरण कमजोर होने के बाद 1934 में इसे वापस ले लिया गया।
प्रश्न 13: सविनय अवज्ञा आंदोलन का मुख्य आधार क्या था?
A. सशस्त्र संघर्ष
B. अहिंसा और सत्याग्रह
C. केवल चुनाव
D. संवैधानिक याचिका
उत्तर: B. अहिंसा और सत्याग्रह
व्याख्या: गांधीवादी आंदोलन की तरह सविनय अवज्ञा भी अहिंसात्मक प्रतिरोध और सत्याग्रह पर आधारित था।
प्रश्न 14: नमक सत्याग्रह किस आंदोलन से संबंधित है?
A. स्वदेशी आंदोलन
B. असहयोग आंदोलन
C. सविनय अवज्ञा आंदोलन
D. भारत छोड़ो आंदोलन
उत्तर: C. सविनय अवज्ञा आंदोलन
व्याख्या: नमक सत्याग्रह 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन का सबसे प्रमुख चरण था।
प्रश्न 15: सविनय अवज्ञा आंदोलन में किस वर्ग की राजनीतिक भागीदारी विशेष रूप से बढ़ी?
A. केवल सरकारी कर्मचारी
B. महिलाएं
C. केवल ब्रिटिश अधिकारी
D. केवल सैनिक
उत्तर: B. महिलाएं
व्याख्या: आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं ने नमक सत्याग्रह, पिकेटिंग, जुलूस और अन्य गतिविधियों में भाग लिया।
प्रश्न 16: पूर्ण स्वराज का लक्ष्य किस कांग्रेस अधिवेशन में अपनाया गया?
A. लखनऊ अधिवेशन
B. लाहौर अधिवेशन
C. सूरत अधिवेशन
D. कलकत्ता अधिवेशन
उत्तर: B. लाहौर अधिवेशन
व्याख्या: दिसंबर 1929 के लाहौर अधिवेशन में कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज को अपना लक्ष्य बनाया।
प्रश्न 17: दांडी मार्च किस राज्य में हुआ?
A. महाराष्ट्र
B. गुजरात
C. बिहार
D. बंगाल
उत्तर: B. गुजरात
व्याख्या: साबरमती आश्रम से दांडी तक की ऐतिहासिक यात्रा वर्तमान गुजरात में हुई थी।
प्रश्न 18: दांडी मार्च के समय गांधीजी के साथ शुरुआत में कितने स्वयंसेवक थे?
A. 50
B. 58
C. 78
D. 108
उत्तर: C. 78
व्याख्या: भारत सरकार के इतिहास संबंधी स्रोत के अनुसार गांधीजी ने 78 स्वयंसेवकों के साथ दांडी मार्च शुरू किया था।
प्रश्न 19: सविनय अवज्ञा आंदोलन में नमक को प्रमुख मुद्दा क्यों बनाया गया?
A. नमक केवल अमीरों के लिए जरूरी था
B. नमक आम जनता की दैनिक आवश्यकता था
C. नमक केवल सैनिक उपयोग करते थे
D. नमक का भारत से संबंध नहीं था
उत्तर: B. नमक आम जनता की दैनिक आवश्यकता था
व्याख्या: नमक सभी वर्गों के लिए आवश्यक था और उस पर ब्रिटिश नियंत्रण व कर औपनिवेशिक आर्थिक शोषण का आसानी से समझ आने वाला प्रतीक था।
प्रश्न 20: निम्न में से कौन-सा क्रम सही है?
A. गांधी-इरविन समझौता → दांडी मार्च → पूर्ण स्वराज
B. पूर्ण स्वराज → दांडी मार्च → गांधी-इरविन समझौता
C. दांडी मार्च → पूर्ण स्वराज → गांधी-इरविन समझौता
D. गांधी-इरविन समझौता → पूर्ण स्वराज → दांडी मार्च
उत्तर: B. पूर्ण स्वराज → दांडी मार्च → गांधी-इरविन समझौता
व्याख्या: दिसंबर 1929 में पूर्ण स्वराज का लक्ष्य सामने आया, मार्च-अप्रैल 1930 में दांडी मार्च और नमक कानून उल्लंघन हुआ तथा 5 मार्च 1931 को गांधी-इरविन समझौता हुआ।
Previous Year Questions (PYQ)
PYQ 1: पूर्ण स्वराज की घोषणा के बाद सविनय अवज्ञा आंदोलन का प्रमुख प्रतीक क्या बना?
Exam: सामान्य प्रतियोगी परीक्षा शैली
उत्तर: दांडी मार्च / नमक सत्याग्रह
व्याख्या: 1930 में गांधीजी ने नमक कानून तोड़कर सविनय अवज्ञा को व्यापक जनआंदोलन का रूप दिया।
PYQ 2: गांधी-इरविन समझौता किस वर्ष हुआ था?
Exam: SSC/State Exam Pattern
उत्तर: 1931
व्याख्या: गांधीजी और वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच 5 मार्च 1931 को समझौता हुआ।
PYQ 3: दांडी मार्च कब प्रारंभ हुआ था?
Exam: Competitive Exam Pattern
उत्तर: 12 मार्च 1930
व्याख्या: गांधीजी ने 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से दांडी के लिए मार्च शुरू किया था।
PYQ 4: 6 अप्रैल 1930 भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में क्यों महत्वपूर्ण है?
Exam: History PYQ Pattern
उत्तर: गांधीजी ने दांडी में नमक कानून का उल्लंघन किया।
व्याख्या: दांडी पहुंचने के बाद गांधीजी ने समुद्र के पानी से नमक बनाकर ब्रिटिश नमक कानून को चुनौती दी।
PYQ 5: सविनय अवज्ञा आंदोलन का अंतिम रूप से अंत किस वर्ष हुआ?
Exam: Modern History PYQ Pattern
उत्तर: 1934
व्याख्या: आंदोलन का अंतिम चरण कमजोर होने के बाद 1934 में सविनय अवज्ञा आंदोलन वापस ले लिया गया।
सविनय अवज्ञा आंदोलन FAQs:
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सविनय अवज्ञा आंदोलन क्या है?
अन्यायपूर्ण ब्रिटिश कानूनों का अहिंसात्मक तरीके से उल्लंघन करके औपनिवेशिक शासन का विरोध करने वाला जनआंदोलन सविनय अवज्ञा आंदोलन कहलाता है।
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सविनय अवज्ञा आंदोलन कब शुरू हुआ?
इसका प्रमुख राष्ट्रीय चरण 1930 में शुरू हुआ। इसकी सबसे प्रसिद्ध शुरुआत 12 मार्च 1930 के दांडी मार्च और 6 अप्रैल 1930 के नमक कानून उल्लंघन से जुड़ी है।
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दांडी मार्च क्या था?
महात्मा गांधी द्वारा 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से दांडी तक किया गया मार्च दांडी मार्च कहलाता है। इसका उद्देश्य ब्रिटिश नमक कानून को चुनौती देना था।
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सविनय अवज्ञा आंदोलन क्यों शुरू किया गया?
पूर्ण स्वराज की मांग, ब्रिटिश आर्थिक शोषण, नमक कर और नमक एकाधिकार, राजनीतिक असंतोष तथा ब्रिटिश शासन की नीतियों के विरोध में सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया गया।
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गांधी-इरविन समझौता क्या था?
5 मार्च 1931 को महात्मा गांधी और वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच हुआ समझौता था, जिसके बाद कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित किया और गांधीजी ने द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया।
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सविनय अवज्ञा आंदोलन कितने समय चला?
इसका व्यापक चरण 1930 में शुरू हुआ, 1931 में अस्थायी रूप से स्थगित हुआ, 1932 में पुनः शुरू हुआ और अंततः 1934 में वापस ले लिया गया।
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नमक सत्याग्रह किस आंदोलन का हिस्सा था?
नमक सत्याग्रह 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन का प्रमुख चरण था।
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सविनय अवज्ञा आंदोलन और असहयोग आंदोलन में क्या अंतर है?
असहयोग आंदोलन में ब्रिटिश संस्थाओं और व्यवस्थाओं से सहयोग वापस लेने पर जोर था, जबकि सविनय अवज्ञा आंदोलन में अन्यायपूर्ण कानूनों का शांतिपूर्ण ढंग से उल्लंघन किया गया।
निष्कर्ष
सविनय अवज्ञा आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अहिंसक जनप्रतिरोध का एक महत्वपूर्ण चरण था। 1930 में दांडी मार्च और नमक कानून के उल्लंघन से शुरू हुए इस आंदोलन ने ब्रिटिश शासन के आर्थिक और राजनीतिक आधार को चुनौती दी।
इस आंदोलन की सबसे बड़ी विशेषता थी कि नमक जैसे सामान्य मुद्दे को राष्ट्रीय स्वतंत्रता संघर्ष का प्रतीक बनाया गया। गांधी-इरविन समझौते और द्वितीय गोलमेज सम्मेलन के बाद आंदोलन फिर शुरू हुआ और अंततः 1934 में समाप्त हुआ।
परीक्षा की दृष्टि से 1930, 12 मार्च, 6 अप्रैल, दांडी मार्च, नमक सत्याग्रह, गांधी-इरविन समझौता, 1931 का द्वितीय गोलमेज सम्मेलन, 1932 का दूसरा चरण और 1934 में समाप्ति सबसे महत्वपूर्ण बिंदु हैं।

