भारतीय न्यायपालिका Notes in Hindi | संरचना, कार्य, अनुच्छेद, MCQ एवं PYQ

भारतीय न्यायपालिका (Judiciary) Notes in Hindi | संविधान, संरचना, कार्य, शक्तियाँ, अनुच्छेद, MCQ एवं PYQ

Table of Contents

एक नजर में

विषयविवरण
विषयभारतीय न्यायपालिका
संविधान का भागभाग V एवं भाग VI
सर्वोच्च न्यायालयभारत का सर्वोच्च न्यायालय
स्थापना28 जनवरी 1950
मुख्यालयनई दिल्ली
मुख्य उद्देश्यसंविधान की रक्षा एवं न्याय प्रदान करना
सर्वोच्च न्यायालय संबंधी अनुच्छेद124–147
उच्च न्यायालय संबंधी अनुच्छेद214–231
प्रमुख शक्तिन्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review)

प्रश्न: भारतीय न्यायपालिका क्या है?

उत्तर:
भारतीय न्यायपालिका सरकार का वह स्वतंत्र अंग है जो संविधान की रक्षा करता है, कानूनों की व्याख्या करता है, नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा करता है तथा न्याय प्रदान करता है। इसका सर्वोच्च संस्थान सर्वोच्च न्यायालय है।


संक्षिप्त परिचय

भारतीय लोकतंत्र तीन प्रमुख अंगों—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका—पर आधारित है। इनमें न्यायपालिका को संविधान का संरक्षक (Guardian of the Constitution) कहा जाता है।

भारतीय न्यायपालिका की सबसे बड़ी विशेषता इसकी स्वतंत्रता है। यही कारण है कि सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय सरकार द्वारा बनाए गए किसी भी कानून की संवैधानिक वैधता की जांच कर सकते हैं।

सरकारी परीक्षाओं जैसे SSC, Railway, CET, Police, REET, CTET, Banking एवं UPSC में न्यायपालिका से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।


भारतीय न्यायपालिका क्या है?

भारतीय न्यायपालिका (Judiciary) वह संवैधानिक संस्था है जो देश में कानून के शासन (Rule of Law) को सुनिश्चित करती है।

यह केवल अपराधियों को दंड देने का कार्य नहीं करती, बल्कि—

  • संविधान की रक्षा करती है।
  • नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा करती है।
  • सरकार के विभिन्न अंगों के बीच विवादों का समाधान करती है।
  • कानूनों की व्याख्या करती है।
  • न्याय सुनिश्चित करती है।

इसी कारण भारतीय न्यायपालिका को लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है।


न्यायपालिका का संवैधानिक आधार

भारतीय संविधान में न्यायपालिका का विस्तृत वर्णन किया गया है।

विषयअनुच्छेद
सर्वोच्च न्यायालय124–147
उच्च न्यायालय214–231
अधीनस्थ न्यायालय233–237
मौलिक अधिकारों की सुरक्षाअनुच्छेद 32
उच्च न्यायालय की रिट शक्तिअनुच्छेद 226

संविधान निर्माताओं ने न्यायपालिका को स्वतंत्र रखा ताकि वह किसी भी राजनीतिक दबाव के बिना निष्पक्ष निर्णय दे सके।


भारतीय न्यायपालिका की संरचना

भारत में न्यायपालिका एक एकीकृत (Integrated Judiciary) प्रणाली है।

इसकी तीन प्रमुख स्तर हैं—

1. सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court)

यह भारत का सर्वोच्च न्यायालय है।

मुख्य विशेषताएँ—

  • स्थापना : 28 जनवरी 1950
  • मुख्यालय : नई दिल्ली
  • भारत का सर्वोच्च न्यायिक संस्थान
  • संविधान का संरक्षक
  • अंतिम अपीलीय न्यायालय

2. उच्च न्यायालय (High Court)

प्रत्येक राज्य अथवा राज्यों के समूह के लिए उच्च न्यायालय की स्थापना की जाती है।

मुख्य कार्य—

  • राज्य स्तर पर न्याय प्रदान करना
  • अधीनस्थ न्यायालयों की निगरानी करना
  • रिट जारी करना (अनुच्छेद 226)

3. अधीनस्थ न्यायालय (Subordinate Courts)

ये जिला एवं तहसील स्तर पर कार्य करते हैं।

इनमें शामिल हैं—

  • जिला न्यायालय
  • सत्र न्यायालय
  • सिविल न्यायालय
  • पारिवारिक न्यायालय
  • लोक अदालत
  • ग्राम न्यायालय

भारतीय न्यायपालिका की प्रमुख विशेषताएँ

भारतीय न्यायपालिका को विश्व की सबसे शक्तिशाली न्यायिक व्यवस्थाओं में माना जाता है।

मुख्य विशेषताएँ—

  • स्वतंत्र न्यायपालिका
  • एकीकृत न्यायिक व्यवस्था
  • संविधान की सर्वोच्चता की रक्षा
  • न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति
  • मौलिक अधिकारों की सुरक्षा
  • निष्पक्ष न्याय
  • विधि का शासन
  • न्यायपालिका की स्वतंत्र नियुक्ति प्रक्रिया
  • न्यायिक सक्रियता
  • जनहित याचिका (PIL)

न्यायपालिका के प्रमुख कार्य

भारतीय न्यायपालिका के कार्य केवल विवादों का निपटारा करना नहीं हैं।

इसके प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—

कानूनों की व्याख्या

संविधान और कानूनों का सही अर्थ स्पष्ट करना।

न्याय प्रदान करना

दीवानी एवं फौजदारी मामलों का निष्पक्ष निर्णय देना।

संविधान की रक्षा

यदि कोई कानून संविधान के विरुद्ध है तो उसे असंवैधानिक घोषित किया जा सकता है।

मौलिक अधिकारों की सुरक्षा

अनुच्छेद 32 के अंतर्गत नागरिक सीधे सर्वोच्च न्यायालय जा सकते हैं।

केंद्र एवं राज्यों के विवादों का समाधान

संघीय व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने हेतु विवादों का निपटारा करना।

राष्ट्रपति को सलाह देना

अनुच्छेद 143 के अंतर्गत राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय से सलाह मांग सकते हैं।


भारतीय न्यायपालिका की शक्तियाँ

1. न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review)

सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय संविधान के विरुद्ध कानूनों को निरस्त कर सकते हैं।


2. रिट जारी करने की शक्ति

सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 32) तथा उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 226) निम्नलिखित पाँच रिट जारी कर सकते हैं—

  • हेबियस कॉर्पस
  • मण्डामस
  • प्रोहीबिशन
  • सर्टियोरारी
  • क्वो वारंटो

3. अवमानना की शक्ति

न्यायालय अपने आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अवमानना की कार्यवाही कर सकता है।


4. सलाहकारी अधिकार

राष्ट्रपति के अनुरोध पर सर्वोच्च न्यायालय कानूनी मामलों में सलाह देता है।


सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति

भारत के मुख्य न्यायाधीश तथा अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

वर्तमान में नियुक्ति प्रक्रिया कोलेजियम प्रणाली के माध्यम से संचालित होती है।

कोलेजियम में सामान्यतः—

  • भारत के मुख्य न्यायाधीश
  • सर्वोच्च न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीश

शामिल होते हैं।


सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को केवल महाभियोग (Impeachment) की प्रक्रिया द्वारा हटाया जा सकता है।

हटाने के आधार—

  • सिद्ध कदाचार (Proved Misbehaviour)
  • अक्षमता (Incapacity)

यह प्रक्रिया संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पारित होने के बाद राष्ट्रपति द्वारा पूर्ण होती है।


न्यायपालिका की स्वतंत्रता क्यों आवश्यक है?

यदि न्यायपालिका स्वतंत्र न हो तो नागरिकों के अधिकार सुरक्षित नहीं रहेंगे।

स्वतंत्र न्यायपालिका—

  • लोकतंत्र की रक्षा करती है।
  • सरकार की मनमानी पर नियंत्रण रखती है।
  • नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा करती है।
  • संविधान की सर्वोच्चता बनाए रखती है।
  • विधि के शासन को मजबूत करती है।

न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review)

न्यायिक पुनरावलोकन वह शक्ति है जिसके माध्यम से न्यायालय संविधान के विरुद्ध बनाए गए कानूनों या सरकारी निर्णयों को असंवैधानिक घोषित कर सकता है।

यह भारतीय संविधान की मूल संरचना (Basic Structure) का महत्वपूर्ण भाग माना जाता है।


न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism)

जब न्यायालय जनहित एवं संविधान की रक्षा के लिए सक्रिय भूमिका निभाता है, तो इसे न्यायिक सक्रियता कहा जाता है।

भारत में पर्यावरण संरक्षण, मानवाधिकार और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण निर्णय न्यायिक सक्रियता के उदाहरण हैं।


जनहित याचिका (Public Interest Litigation – PIL)

जनहित याचिका ऐसी याचिका है जिसे कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक हित में दायर कर सकता है, भले ही वह स्वयं प्रभावित न हो।

PIL ने गरीब, वंचित और कमजोर वर्गों को न्याय तक पहुँच आसान बनाई है।


भारतीय न्यायपालिका के महत्वपूर्ण निर्णय

निर्णयमहत्व
केशवानंद भारती मामला (1973)मूल संरचना सिद्धांत
गोलकनाथ मामलासंसद की संशोधन शक्ति पर निर्णय
मिनर्वा मिल्स मामलासंविधान की मूल संरचना की पुनः पुष्टि
एस.आर. बोम्मई मामलासंघवाद एवं राष्ट्रपति शासन
मनेका गांधी मामलाअनुच्छेद 21 की व्यापक व्याख्या

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

  • सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 28 जनवरी 1950 को हुई।
  • सर्वोच्च न्यायालय का मुख्यालय नई दिल्ली में है।
  • अनुच्छेद 124 से 147 सर्वोच्च न्यायालय से संबंधित हैं।
  • अनुच्छेद 214 से 231 उच्च न्यायालय से संबंधित हैं।
  • अनुच्छेद 32 को डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान की “आत्मा और हृदय” कहा।
  • अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालय की रिट शक्ति से संबंधित है।
  • न्यायिक पुनरावलोकन भारतीय संविधान की मूल संरचना का हिस्सा है।
  • PIL की अवधारणा ने भारतीय न्याय व्यवस्था को अधिक जनोन्मुख बनाया।
  • भारत में एकीकृत न्यायपालिका की व्यवस्था अपनाई गई है।
  • न्यायपालिका लोकतंत्र का संरक्षक स्तंभ मानी जाती है।

निष्कर्ष

भारतीय न्यायपालिका लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की आधारशिला है। यह संविधान की रक्षा करती है, नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है तथा विधि के शासन को बनाए रखती है। भारतीय न्यायपालिका Notes का अध्ययन करते समय सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय, महत्वपूर्ण अनुच्छेद, न्यायिक पुनरावलोकन, न्यायिक सक्रियता, PIL तथा प्रमुख निर्णयों पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि यही विषय SSC, Railway, CET, Police, REET, CTET, Banking और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सबसे अधिक पूछे जाते हैं।

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भारतीय न्यायपालिका (20 महत्वपूर्ण MCQs)

प्रश्न 1: भारतीय संविधान के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय का उल्लेख किस अनुच्छेद से प्रारम्भ होता है?

A. अनुच्छेद 120
B. अनुच्छेद 124
C. अनुच्छेद 130
D. अनुच्छेद 136
उत्तर: B. अनुच्छेद 124
व्याख्या: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124 से 147 तक सर्वोच्च न्यायालय की संरचना, नियुक्ति, अधिकार एवं कार्यों का वर्णन किया गया है।

प्रश्न 2: भारत के सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना कब हुई थी?

A. 26 जनवरी 1950
B. 28 जनवरी 1950
C. 15 अगस्त 1947
D. 26 नवंबर 1949
उत्तर: B. 28 जनवरी 1950
व्याख्या: भारत का सर्वोच्च न्यायालय 28 जनवरी 1950 को अस्तित्व में आया और इसने फेडरल कोर्ट का स्थान लिया।

प्रश्न 3: भारतीय न्यायपालिका की सबसे प्रमुख विशेषता क्या है?

A. द्विस्तरीय न्यायपालिका
B. स्वतंत्र न्यायपालिका
C. राष्ट्रपति के अधीन कार्य करना
D. संसद के प्रति उत्तरदायी होना
उत्तर: B. स्वतंत्र न्यायपालिका
व्याख्या: भारतीय न्यायपालिका स्वतंत्र है, जिससे वह निष्पक्ष एवं संविधान के अनुरूप निर्णय दे सके।

प्रश्न 4: भारतीय संविधान का संरक्षक किसे माना जाता है?

A. संसद
B. राष्ट्रपति
C. सर्वोच्च न्यायालय
D. प्रधानमंत्री
उत्तर: C. सर्वोच्च न्यायालय
व्याख्या: सर्वोच्च न्यायालय संविधान की सर्वोच्चता बनाए रखने तथा उसकी रक्षा करने वाला सर्वोच्च न्यायिक संस्थान है।

प्रश्न 5: मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए सीधे सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार किस अनुच्छेद में दिया गया है?

A. अनुच्छेद 19
B. अनुच्छेद 21
C. अनुच्छेद 32
D. अनुच्छेद 226
उत्तर: C. अनुच्छेद 32
व्याख्या: अनुच्छेद 32 नागरिकों को मौलिक अधिकारों के संरक्षण हेतु सीधे सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार देता है।

प्रश्न 6: उच्च न्यायालय को रिट जारी करने की शक्ति किस अनुच्छेद के अंतर्गत प्राप्त है?

A. अनुच्छेद 32
B. अनुच्छेद 124
C. अनुच्छेद 214
D. अनुच्छेद 226
उत्तर: D. अनुच्छेद 226
व्याख्या: अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों सहित अन्य कानूनी अधिकारों की रक्षा हेतु रिट जारी कर सकता है।

प्रश्न 7: निम्नलिखित में से कौन भारतीय न्यायपालिका का स्तर नहीं है?

A. सर्वोच्च न्यायालय
B. उच्च न्यायालय
C. जिला एवं अधीनस्थ न्यायालय
D. संसद न्यायालय
उत्तर: D. संसद न्यायालय
व्याख्या: भारत में संसद न्यायालय नाम का कोई न्यायालय नहीं है।

प्रश्न 8: न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) का अर्थ क्या है?

A. न्यायाधीशों की नियुक्ति
B. कानूनों की संवैधानिक वैधता की जांच
C. संसद को भंग करना
D. राष्ट्रपति का चुनाव
उत्तर: B. कानूनों की संवैधानिक वैधता की जांच
व्याख्या: न्यायिक पुनरावलोकन के माध्यम से न्यायालय संविधान के विरुद्ध बने कानूनों को निरस्त कर सकता है।

प्रश्न 9: निम्नलिखित में से कौन-सा न्यायपालिका का कार्य नहीं है?

A. कानूनों की व्याख्या
B. विवादों का निपटारा
C. कानून बनाना
D. संविधान की रक्षा
उत्तर: C. कानून बनाना
व्याख्या: कानून बनाना विधायिका का कार्य है, जबकि न्यायपालिका उनका पालन एवं व्याख्या करती है।

प्रश्न 10: भारत में न्यायपालिका की व्यवस्था कैसी है?

A. पृथक न्यायपालिका
B. दोहरी न्यायपालिका
C. एकीकृत न्यायपालिका
D. सैन्य न्यायपालिका
उत्तर: C. एकीकृत न्यायपालिका
व्याख्या: भारत में सर्वोच्च न्यायालय से लेकर अधीनस्थ न्यायालय तक एकीकृत न्यायिक व्यवस्था है।

प्रश्न 11: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति कौन करता है?

A. प्रधानमंत्री
B. संसद
C. राष्ट्रपति
D. राज्यपाल
उत्तर: C. राष्ट्रपति
व्याख्या: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा कोलेजियम प्रणाली की अनुशंसा के आधार पर की जाती है।

प्रश्न 12: न्यायपालिका की स्वतंत्रता का मुख्य उद्देश्य क्या है?

A. सरकार को नियंत्रित करना
B. निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करना
C. चुनाव कराना
D. बजट बनाना
उत्तर: B. निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करना
व्याख्या: न्यायपालिका की स्वतंत्रता नागरिकों के अधिकारों की रक्षा तथा निष्पक्ष न्याय प्रदान करने के लिए आवश्यक है।

प्रश्न 13: जनहित याचिका (PIL) का मुख्य उद्देश्य क्या है?

A. व्यक्तिगत लाभ
B. सार्वजनिक हित की रक्षा
C. सरकारी योजनाओं का प्रचार
D. कर संग्रह
उत्तर: B. सार्वजनिक हित की रक्षा
व्याख्या: PIL के माध्यम से कोई भी व्यक्ति समाज के व्यापक हित में न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।

प्रश्न 14: निम्नलिखित में से कौन-सा सर्वोच्च न्यायालय का अधिकार है?

A. संविधान संशोधन करना
B. राष्ट्रपति का चुनाव कराना
C. न्यायिक पुनरावलोकन करना
D. बजट प्रस्तुत करना
उत्तर: C. न्यायिक पुनरावलोकन करना
व्याख्या: सर्वोच्च न्यायालय संविधान के विरुद्ध कानूनों की समीक्षा कर उन्हें निरस्त कर सकता है।

प्रश्न 15: उच्च न्यायालयों का उल्लेख संविधान के किस अनुच्छेद से प्रारम्भ होता है?

A. अनुच्छेद 124
B. अनुच्छेद 168
C. अनुच्छेद 214
D. अनुच्छेद 226
उत्तर: C. अनुच्छेद 214
व्याख्या: अनुच्छेद 214 से 231 तक उच्च न्यायालयों का वर्णन किया गया है।

प्रश्न 16: निम्नलिखित में से कौन-सी रिट व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करती है?

A. मण्डामस
B. सर्टियोरारी
C. हेबियस कॉर्पस
D. क्वो वारंटो
उत्तर: C. हेबियस कॉर्पस
व्याख्या: हेबियस कॉर्पस रिट अवैध हिरासत से व्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करती है।

प्रश्न 17: न्यायिक सक्रियता (Judicial Activism) का उद्देश्य क्या है?

A. संसद का स्थान लेना
B. संविधान एवं जनहित की रक्षा हेतु सक्रिय भूमिका निभाना
C. चुनाव आयोग का नियंत्रण करना
D. राष्ट्रपति को हटाना
उत्तर: B. संविधान एवं जनहित की रक्षा हेतु सक्रिय भूमिका निभाना
व्याख्या: न्यायिक सक्रियता के माध्यम से न्यायालय जनहित एवं संवैधानिक मूल्यों की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाता है।

प्रश्न 18: भारत में अधीनस्थ न्यायालयों का उल्लेख संविधान के किस अनुच्छेद में है?

A. 214–231
B. 233–237
C. 124–147
D. 148–151
उत्तर: B. 233–237
व्याख्या: अनुच्छेद 233 से 237 तक अधीनस्थ न्यायालयों से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं।

प्रश्न 19: निम्नलिखित में से कौन-सा मामला मूल संरचना सिद्धांत से संबंधित है?

A. मनेका गांधी मामला
B. एस. आर. बोम्मई मामला
C. केशवानंद भारती मामला
D. गोलकनाथ मामला
उत्तर: C. केशवानंद भारती मामला
व्याख्या: 1973 के केशवानंद भारती निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के मूल संरचना सिद्धांत की स्थापना की।

प्रश्न 20: भारतीय न्यायपालिका को लोकतंत्र का कौन-सा स्तंभ माना जाता है?

A. प्रथम
B. द्वितीय
C. तृतीय
D. चतुर्थ
उत्तर: C. तृतीय
व्याख्या: भारतीय लोकतंत्र के तीन प्रमुख अंग—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका—हैं, जिनमें न्यायपालिका को लोकतंत्र का तृतीय एवं स्वतंत्र स्तंभ माना जाता है।

भारतीय न्यायपालिका Previous Year Questions (PYQs)

PYQ 1: भारतीय संविधान में सर्वोच्च न्यायालय का उल्लेख किस अनुच्छेद से प्रारम्भ होता है?

परीक्षा: SSC CGL 2019 (Pattern Based)
उत्तर: अनुच्छेद 124
व्याख्या: संविधान के अनुच्छेद 124 से 147 तक सर्वोच्च न्यायालय की संरचना, नियुक्ति, शक्तियाँ एवं कार्यों का वर्णन किया गया है।


PYQ 2: संविधान का संरक्षक किसे कहा जाता है?

परीक्षा: RRB NTPC (Pattern Based)
उत्तर: सर्वोच्च न्यायालय
व्याख्या: सर्वोच्च न्यायालय संविधान की सर्वोच्चता बनाए रखता है तथा असंवैधानिक कानूनों को निरस्त कर सकता है।


PYQ 3: मौलिक अधिकारों के संरक्षण हेतु नागरिक सीधे सर्वोच्च न्यायालय किस अनुच्छेद के अंतर्गत जा सकते हैं?

परीक्षा: SSC CHSL (Pattern Based)
उत्तर: अनुच्छेद 32
व्याख्या: डॉ. भीमराव आंबेडकर ने अनुच्छेद 32 को संविधान की “आत्मा एवं हृदय” कहा था।


PYQ 4: न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) का संबंध किससे है?

परीक्षा: UPSC Prelims (Pattern Based)
उत्तर: कानूनों की संवैधानिक वैधता की जांच
व्याख्या: न्यायिक पुनरावलोकन के माध्यम से न्यायालय संविधान के विरुद्ध कानूनों को निरस्त कर सकता है।


PYQ 5: उच्च न्यायालय की रिट जारी करने की शक्ति किस अनुच्छेद में दी गई है?

परीक्षा: Rajasthan CET (Pattern Based)
उत्तर: अनुच्छेद 226
व्याख्या: अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों सहित अन्य कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए रिट जारी कर सकता है।


भारतीय न्यायपालिका FAQ (Frequently Asked Questions)

1. भारतीय न्यायपालिका क्या है?

भारतीय न्यायपालिका सरकार का स्वतंत्र अंग है जो संविधान की रक्षा करता है, कानूनों की व्याख्या करता है तथा न्याय प्रदान करता है।

2. भारतीय न्यायपालिका के कितने स्तर हैं?

भारतीय न्यायपालिका के तीन प्रमुख स्तर हैं—सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय तथा अधीनस्थ न्यायालय।

3. सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना कब हुई?

सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 28 जनवरी 1950 को हुई थी।

4. अनुच्छेद 32 किससे संबंधित है?

अनुच्छेद 32 मौलिक अधिकारों के संरक्षण हेतु सीधे सर्वोच्च न्यायालय जाने के अधिकार से संबंधित है।

5. न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) क्या है?

यह वह शक्ति है जिसके द्वारा न्यायालय संविधान के विरुद्ध बनाए गए कानूनों अथवा सरकारी निर्णयों को असंवैधानिक घोषित कर सकता है।

6. PIL का पूरा नाम क्या है?

PIL का पूरा नाम Public Interest Litigation (जनहित याचिका) है।

7. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति कौन करता है?

भारत के राष्ट्रपति, कोलेजियम प्रणाली की अनुशंसा के आधार पर, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति करते हैं।

8. भारतीय न्यायपालिका को स्वतंत्र क्यों रखा गया है?

ताकि न्यायपालिका बिना किसी राजनीतिक दबाव के निष्पक्ष निर्णय दे सके तथा संविधान और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा कर सके।

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