📌 एक नजर में
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| संवैधानिक आधार | अनुच्छेद 214 से 231 |
| न्यायपालिका का स्तर | राज्य स्तर |
| स्थापना | प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय |
| नियुक्ति | राष्ट्रपति द्वारा |
| सेवानिवृत्ति आयु | 62 वर्ष |
| मुख्य कार्य | संविधान एवं कानून की रक्षा करना |
| रिट जारी करने की शक्ति | अनुच्छेद 226 |
| अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण | अनुच्छेद 227 |
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 214 में प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय की व्यवस्था की गई है। संसद आवश्यकता अनुसार दो या अधिक राज्यों के लिए एक साझा उच्च न्यायालय भी स्थापित कर सकती है।
संक्षिप्त परिचय
भारतीय न्यायपालिका की संरचना तीन स्तरों में विभाजित है—
- सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court)
- उच्च न्यायालय (High Court)
- अधीनस्थ न्यायालय (Subordinate Courts)
उच्च न्यायालय राज्य का सर्वोच्च न्यायालय होता है। यह संविधान की रक्षा करता है, नागरिकों के मौलिक एवं अन्य वैधानिक अधिकारों की सुरक्षा करता है तथा अधीनस्थ न्यायालयों पर प्रशासनिक एवं न्यायिक नियंत्रण रखता है।
भारत में वर्तमान में 25 उच्च न्यायालय कार्यरत हैं, जिनमें कुछ एक से अधिक राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के लिए भी कार्य करते हैं।
विषय का परिचय
उच्च न्यायालय प्रत्येक राज्य की सर्वोच्च न्यायिक संस्था है। इसका मुख्य उद्देश्य संविधान की सर्वोच्चता बनाए रखना, कानूनों की व्याख्या करना तथा नागरिकों को न्याय प्रदान करना है।
उच्च न्यायालय न केवल अपीलों की सुनवाई करता है बल्कि आवश्यकता पड़ने पर सरकार और प्रशासन के विरुद्ध भी आदेश जारी कर सकता है।
उच्च न्यायालय क्या है?
उच्च न्यायालय राज्य स्तर पर सर्वोच्च न्यायिक संस्था है, जिसके निर्णय राज्य के सभी अधीनस्थ न्यायालयों पर बाध्यकारी होते हैं।
यह—
- संविधान का संरक्षक है।
- नागरिक अधिकारों की रक्षा करता है।
- सरकार के कार्यों की वैधानिकता की जांच करता है।
- अधीनस्थ न्यायालयों की निगरानी करता है।
परिभाषा
उच्च न्यायालय वह संवैधानिक न्यायालय है जिसकी स्थापना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 214 के अंतर्गत की गई है और जो राज्य में सर्वोच्च न्यायिक अधिकार का प्रयोग करता है।
संवैधानिक आधार
उच्च न्यायालय से संबंधित प्रमुख प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 214 से 231 तक दिए गए हैं।
| अनुच्छेद | विषय |
|---|---|
| 214 | प्रत्येक राज्य के लिए उच्च न्यायालय |
| 215 | अभिलेख न्यायालय (Court of Record) |
| 216 | उच्च न्यायालय की संरचना |
| 217 | न्यायाधीशों की नियुक्ति एवं सेवा शर्तें |
| 218 | कुछ प्रावधानों का लागू होना |
| 219 | शपथ |
| 220 | स्थायी न्यायाधीश बनने के बाद वकालत पर प्रतिबंध |
| 221 | वेतन एवं भत्ते |
| 222 | न्यायाधीशों का स्थानांतरण |
| 223 | कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश |
| 224 | अतिरिक्त एवं कार्यकारी न्यायाधीश |
| 224A | सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति |
| 225 | अधिकार क्षेत्र |
| 226 | रिट जारी करने की शक्ति |
| 227 | अधीनस्थ न्यायालयों पर अधीक्षण |
| 228 | संवैधानिक मामलों का स्थानांतरण |
| 229 | कर्मचारी एवं प्रशासन |
| 230 | केंद्रशासित प्रदेशों तक अधिकार क्षेत्र का विस्तार |
| 231 | संयुक्त उच्च न्यायालय |
उच्च न्यायालय की संरचना
प्रत्येक उच्च न्यायालय में—
- एक मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice)
- अन्य आवश्यक संख्या में न्यायाधीश
न्यायाधीशों की संख्या संसद द्वारा निर्धारित नहीं होती बल्कि आवश्यकता के अनुसार राष्ट्रपति तय करते हैं।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
नियुक्ति से पहले राष्ट्रपति निम्न से परामर्श करता है—
- भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI)
- संबंधित राज्य के राज्यपाल
- संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के मामले में)
न्यायाधीश बनने की योग्यता
उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने के लिए—
- भारत का नागरिक होना चाहिए।
- कम से कम 10 वर्ष तक न्यायिक पद पर कार्य किया हो।
या
- किसी उच्च न्यायालय में 10 वर्ष तक अधिवक्ता रहा हो।
न्यायाधीशों का कार्यकाल
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश—
- 62 वर्ष की आयु तक पद पर रहते हैं।
- राष्ट्रपति को त्यागपत्र दे सकते हैं।
- संसद द्वारा महाभियोग जैसी प्रक्रिया के माध्यम से हटाए जा सकते हैं।
महत्वपूर्ण: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष होती है जबकि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की 62 वर्ष।
उच्च न्यायालय एक अभिलेख न्यायालय (Court of Record)
अनुच्छेद 215 के अनुसार उच्च न्यायालय एक Court of Record है।
इसका अर्थ है—
- इसके निर्णय स्थायी अभिलेख माने जाते हैं।
- ये भविष्य के मामलों में उदाहरण (Precedent) बनते हैं।
- न्यायालय अपनी अवमानना (Contempt of Court) के लिए दंड दे सकता है।
उच्च न्यायालय की प्रमुख विशेषताएँ
- संवैधानिक संस्था
- राज्य का सर्वोच्च न्यायालय
- स्वतंत्र न्यायपालिका का महत्वपूर्ण अंग
- अभिलेख न्यायालय
- रिट जारी करने की शक्ति
- अधीनस्थ न्यायालयों का नियंत्रण
- संविधान का संरक्षक
- न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की शक्ति
- नागरिक अधिकारों का संरक्षण
- कानूनों की व्याख्या करने का अधिकार
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य
- संविधान का भाग VI उच्च न्यायालयों से संबंधित है।
- अनुच्छेद 214–231 उच्च न्यायालय का संवैधानिक आधार हैं।
- अनुच्छेद 226 सबसे महत्वपूर्ण अनुच्छेद माना जाता है।
- उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के साथ-साथ अन्य वैधानिक अधिकारों की सुरक्षा हेतु भी रिट जारी कर सकता है।
- उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है।
- राष्ट्रपति न्यायाधीशों की नियुक्ति करता है।
- उच्च न्यायालय एक Court of Record है।
- अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण अनुच्छेद 227 के अंतर्गत है।
- संसद संयुक्त उच्च न्यायालय स्थापित कर सकती है।
- भारत में वर्तमान में 25 उच्च न्यायालय हैं।
उच्च न्यायालय की शक्तियाँ (Powers of High Court)
भारतीय संविधान ने उच्च न्यायालय को व्यापक न्यायिक एवं प्रशासनिक शक्तियाँ प्रदान की हैं। ये शक्तियाँ न केवल संविधान की रक्षा करती हैं बल्कि नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करती हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में उच्च न्यायालय की शक्तियों से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
उच्च न्यायालय की प्रमुख शक्तियाँ निम्नलिखित हैं—
- मूल (Original) अधिकार क्षेत्र
- अपीलीय (Appellate) अधिकार क्षेत्र
- रिट (Writ) अधिकार क्षेत्र
- पर्यवेक्षण (Supervisory) अधिकार क्षेत्र
- न्यायिक समीक्षा (Judicial Review)
- अभिलेख न्यायालय (Court of Record)
- प्रशासनिक शक्तियाँ
उच्च न्यायालय का अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction of High Court)
अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) का अर्थ है— न्यायालय किन मामलों की सुनवाई कर सकता है तथा किस सीमा तक अपने अधिकारों का प्रयोग कर सकता है।
उच्च न्यायालय का अधिकार क्षेत्र निम्न प्रकार का होता है।
1. मूल अधिकार क्षेत्र (Original Jurisdiction)
जब कोई मामला पहली बार सीधे उच्च न्यायालय में दायर किया जाता है, तो उसे मूल अधिकार क्षेत्र कहा जाता है।
यह अधिकार मुख्यतः निम्न मामलों में प्रयोग किया जाता है—
- रिट याचिकाएँ
- चुनाव संबंधी विवाद
- कंपनी कानून के कुछ मामले
- विवाह एवं पारिवारिक विवाद (कुछ राज्यों में)
- संविधान से जुड़े विशेष मामले
2. अपीलीय अधिकार क्षेत्र (Appellate Jurisdiction)
यदि अधीनस्थ न्यायालय के निर्णय से कोई पक्ष असंतुष्ट हो, तो वह उच्च न्यायालय में अपील कर सकता है।
उच्च न्यायालय निम्न मामलों की अपील सुनता है—
- दीवानी (Civil) मामले
- फौजदारी (Criminal) मामले
- पारिवारिक न्यायालयों के निर्णय
- जिला न्यायालयों के निर्णय
- विशेष न्यायाधिकरणों के निर्णय
3. रिट अधिकार क्षेत्र (Writ Jurisdiction)
उच्च न्यायालय की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति अनुच्छेद 226 के अंतर्गत रिट जारी करने की है।
यह शक्ति नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रदान की गई है।
महत्वपूर्ण तथ्य
उच्च न्यायालय—
- मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए रिट जारी कर सकता है।
- अन्य वैधानिक (Legal) अधिकारों की रक्षा के लिए भी रिट जारी कर सकता है।
इसी कारण अनुच्छेद 226 की शक्ति, कई परिस्थितियों में, सर्वोच्च न्यायालय के अनुच्छेद 32 से अधिक व्यापक मानी जाती है।
अनुच्छेद 226
अनुच्छेद 226 के अनुसार उच्च न्यायालय निम्नलिखित पाँच प्रकार की रिट जारी कर सकता है—
- बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus)
- परमादेश (Mandamus)
- प्रतिषेध (Prohibition)
- उत्प्रेषण (Certiorari)
- अधिकार-पृच्छा (Quo Warranto)
पाँच प्रकार की रिट (Five Writs)
1. बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus)
अर्थ: “शरीर को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करो।”
यदि किसी व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है, तो न्यायालय उसे तुरंत अपने सामने प्रस्तुत करने का आदेश देता है।
उद्देश्य
- व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा
- अवैध गिरफ्तारी रोकना
उदाहरण
यदि पुलिस बिना कानूनी आधार के किसी व्यक्ति को हिरासत में रखती है, तो उच्च न्यायालय बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट जारी कर सकता है।
2. परमादेश (Mandamus)
अर्थ: “हम आदेश देते हैं।”
यह रिट किसी सरकारी अधिकारी, सार्वजनिक संस्था या वैधानिक निकाय को उसका कानूनी कर्तव्य पूरा करने का आदेश देती है।
जारी नहीं होती
- राष्ट्रपति के विरुद्ध
- राज्यपाल के विरुद्ध
- निजी व्यक्ति के विरुद्ध
3. प्रतिषेध (Prohibition)
यह रिट उच्च न्यायालय द्वारा अधीनस्थ न्यायालय या न्यायाधिकरण को जारी की जाती है।
यदि कोई न्यायालय अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्य कर रहा हो, तो उसे आगे कार्यवाही करने से रोक दिया जाता है।
याद रखने योग्य तथ्य
यह रिट कार्यवाही पूर्ण होने से पहले जारी होती है।
4. उत्प्रेषण (Certiorari)
यदि कोई अधीनस्थ न्यायालय अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर निर्णय दे देता है, तो उच्च न्यायालय उसके आदेश को निरस्त कर सकता है।
महत्वपूर्ण अंतर
- Prohibition → कार्यवाही रोकती है।
- Certiorari → निर्णय को निरस्त करती है।
5. अधिकार-पृच्छा (Quo Warranto)
अर्थ: “किस अधिकार से?”
यदि कोई व्यक्ति किसी सार्वजनिक पद पर अवैध रूप से बैठा है, तो न्यायालय उससे पूछ सकता है कि वह किस अधिकार से उस पद पर कार्य कर रहा है।
पाँचों रिट का सारांश
| रिट | उद्देश्य |
|---|---|
| Habeas Corpus | अवैध हिरासत से मुक्ति |
| Mandamus | सार्वजनिक अधिकारी को कर्तव्य पालन का आदेश |
| Prohibition | अधीनस्थ न्यायालय को कार्यवाही से रोकना |
| Certiorari | अवैध आदेश को निरस्त करना |
| Quo Warranto | सार्वजनिक पद पर अधिकार की जांच |
अनुच्छेद 226 और अनुच्छेद 32 में अंतर
| आधार | अनुच्छेद 226 | अनुच्छेद 32 |
|---|---|---|
| न्यायालय | उच्च न्यायालय | सर्वोच्च न्यायालय |
| उद्देश्य | मौलिक एवं अन्य कानूनी अधिकार | केवल मौलिक अधिकार |
| अधिकार क्षेत्र | राज्य स्तर | पूरे भारत में |
| शक्ति | अधिक व्यापक | अपेक्षाकृत सीमित |
| संवैधानिक उपचार | उपलब्ध | उपलब्ध |
Exam Tip: UPSC, SSC और State PCS परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है कि अनुच्छेद 226 की शक्ति अनुच्छेद 32 से अधिक व्यापक क्यों मानी जाती है।
पर्यवेक्षण संबंधी शक्ति (Supervisory Jurisdiction)
अनुच्छेद 227 के अंतर्गत उच्च न्यायालय अपने अधिकार क्षेत्र के सभी अधीनस्थ न्यायालयों एवं अधिकरणों पर अधीक्षण (Superintendence) रखता है।
इस शक्ति के अंतर्गत उच्च न्यायालय—
- अधीनस्थ न्यायालयों का निरीक्षण करता है।
- आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करता है।
- रिकॉर्ड मंगा सकता है।
- प्रक्रिया संबंधी नियम बना सकता है।
- न्यायिक कार्यप्रणाली की निगरानी करता है।
न्यायिक समीक्षा (Judicial Review)
उच्च न्यायालय को संविधान के अनुरूप कानूनों एवं सरकारी कार्यों की वैधता की जांच करने का अधिकार प्राप्त है।
यदि कोई कानून संविधान के विरुद्ध पाया जाता है, तो उच्च न्यायालय उसे असंवैधानिक घोषित कर सकता है।
महत्व
- संविधान की सर्वोच्चता बनाए रखना
- विधि के शासन (Rule of Law) की रक्षा
- नागरिक अधिकारों की सुरक्षा
अभिलेख न्यायालय की शक्ति (Court of Record)
अनुच्छेद 215 के अंतर्गत उच्च न्यायालय एक Court of Record है।
इस शक्ति के अंतर्गत—
- इसके निर्णय स्थायी अभिलेख होते हैं।
- इनके निर्णय भविष्य के मामलों में मिसाल (Precedent) बनते हैं।
- न्यायालय अपनी अवमानना (Contempt of Court) के लिए दंड दे सकता है।
प्रशासनिक शक्तियाँ
उच्च न्यायालय को अधीनस्थ न्यायपालिका के प्रशासन पर भी व्यापक अधिकार प्राप्त हैं।
इनमें शामिल हैं—
- अधीनस्थ न्यायालयों का निरीक्षण
- कर्मचारियों की नियुक्ति संबंधी नियंत्रण
- न्यायालयों के कार्य संचालन के नियम बनाना
- रिकॉर्ड एवं अभिलेखों की जांच
- न्यायिक प्रशासन में सुधार हेतु निर्देश जारी करना
उच्च न्यायालय की शक्तियों का महत्व
- संविधान की सर्वोच्चता बनाए रखता है।
- नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है।
- सरकार के कार्यों पर संवैधानिक नियंत्रण रखता है।
- न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है।
- अधीनस्थ न्यायालयों की कार्यप्रणाली को प्रभावी बनाता है।
- विधि के शासन (Rule of Law) को मजबूत करता है।
- लोकतांत्रिक व्यवस्था में संतुलन बनाए रखता है।
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य
- अनुच्छेद 226 – रिट जारी करने की शक्ति।
- अनुच्छेद 227 – अधीनस्थ न्यायालयों पर अधीक्षण।
- अनुच्छेद 215 – Court of Record।
- उच्च न्यायालय पाँच प्रकार की रिट जारी कर सकता है।
- अनुच्छेद 226 के अंतर्गत मौलिक एवं अन्य वैधानिक अधिकारों दोनों की रक्षा की जा सकती है।
- Prohibition कार्यवाही रोकती है, जबकि Certiorari निर्णय को निरस्त करती है।
- Habeas Corpus व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सबसे प्रभावी संवैधानिक सुरक्षा मानी जाती है.
- उच्च न्यायालय न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की शक्ति का प्रयोग कर असंवैधानिक कानूनों को निरस्त कर सकता है.
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का स्थानांतरण (Transfer of Judges)
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 222 के अंतर्गत राष्ट्रपति को उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश का एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में स्थानांतरण (Transfer) करने का अधिकार प्राप्त है।
स्थानांतरण से पहले राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) से परामर्श करता है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों के अनुसार मुख्य न्यायाधीश की राय को इस विषय में विशेष महत्व दिया जाता है।
स्थानांतरण का उद्देश्य
- न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखना।
- प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना।
- क्षेत्रीय पक्षपात की संभावना कम करना।
- न्यायपालिका में निष्पक्षता सुनिश्चित करना।
Exam Fact: न्यायाधीशों के स्थानांतरण की शक्ति राष्ट्रपति के पास होती है, लेकिन यह मुख्य न्यायाधीश की सलाह पर आधारित होती है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (Acting Chief Justice)
अनुच्छेद 223 के अनुसार यदि—
- मुख्य न्यायाधीश का पद रिक्त हो जाए,
- मुख्य न्यायाधीश अवकाश पर हों,
- या किसी कारणवश अपने कार्य करने में असमर्थ हों,
तो राष्ट्रपति किसी अन्य न्यायाधीश को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त कर सकता है।
अतिरिक्त एवं कार्यकारी न्यायाधीश (Additional and Acting Judges)
अनुच्छेद 224 के अंतर्गत यदि किसी उच्च न्यायालय में—
- मामलों की संख्या अत्यधिक बढ़ जाए,
- या लंबित मामलों का निपटारा शीघ्र करना आवश्यक हो,
तो राष्ट्रपति अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति कर सकता है।
अतिरिक्त न्यायाधीश (Additional Judge)
- अधिकतम 2 वर्ष के लिए नियुक्त किए जाते हैं।
- लंबित मामलों के निस्तारण में सहायता करते हैं।
कार्यकारी न्यायाधीश (Acting Judge)
यदि कोई न्यायाधीश अस्थायी रूप से कार्य करने में असमर्थ हो, तो उसकी जगह कार्यकारी न्यायाधीश नियुक्त किया जा सकता है।
सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति
अनुच्छेद 224A के अनुसार किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति की सहमति से, किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को पुनः न्यायिक कार्य करने के लिए आमंत्रित कर सकता है।
यह व्यवस्था विशेष रूप से लंबित मामलों को शीघ्र निपटाने के लिए उपयोगी होती है।
उच्च न्यायालय का अधिकार क्षेत्र (अनुच्छेद 225)
अनुच्छेद 225 उच्च न्यायालयों के पूर्ववर्ती अधिकार क्षेत्र एवं शक्तियों को बनाए रखता है, जब तक कि संसद द्वारा उनमें परिवर्तन न किया जाए।
उच्च न्यायालय के अधिकारी एवं कर्मचारी
अनुच्छेद 229 के अनुसार—
- उच्च न्यायालय अपने अधिकारियों एवं कर्मचारियों की नियुक्ति करता है।
- उनके वेतन एवं सेवा शर्तों का निर्धारण संबंधित नियमों के अनुसार किया जाता है।
- इससे न्यायपालिका की प्रशासनिक स्वतंत्रता सुनिश्चित होती है।
केंद्रशासित प्रदेशों तक अधिकार क्षेत्र का विस्तार
अनुच्छेद 230 के अनुसार संसद किसी उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का विस्तार किसी केंद्रशासित प्रदेश तक कर सकती है या उससे वापस ले सकती है।
उदाहरण
- पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का अधिकार क्षेत्र चंडीगढ़ तक भी विस्तारित है।
- मद्रास उच्च न्यायालय का अधिकार क्षेत्र पुडुचेरी तक भी है।
संयुक्त उच्च न्यायालय (Common High Court)
अनुच्छेद 231 के अनुसार संसद दो या दो से अधिक राज्यों अथवा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के लिए एक संयुक्त उच्च न्यायालय स्थापित कर सकती है।
प्रमुख उदाहरण
| संयुक्त उच्च न्यायालय | संबंधित राज्य / केंद्रशासित प्रदेश |
|---|---|
| पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय | पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ |
| बॉम्बे उच्च न्यायालय | महाराष्ट्र, गोवा, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव |
| गुवाहाटी उच्च न्यायालय | असम, नागालैंड, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश (ऐतिहासिक रूप से; वर्तमान में कुछ राज्यों के अलग उच्च न्यायालय बन चुके हैं) |
Exam Tip: समय-समय पर नए उच्च न्यायालय बनने से संयुक्त अधिकार क्षेत्र में परिवर्तन हुआ है। नवीनतम स्थिति अवश्य पढ़ें।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया (Removal of Judges)
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को केवल राष्ट्रपति द्वारा पद से हटाया जा सकता है।
हटाने के आधार—
- सिद्ध कदाचार (Proved Misbehaviour)
- अक्षमता (Incapacity)
हटाने की प्रक्रिया
- संसद के किसी भी सदन में प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाता है।
- दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित किया जाता है।
- प्रस्ताव राष्ट्रपति को भेजा जाता है।
- राष्ट्रपति हटाने का आदेश जारी करता है।
यह प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के समान होती है।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का वेतन एवं भत्ते
अनुच्छेद 221 के अनुसार न्यायाधीशों के वेतन एवं भत्ते संसद द्वारा निर्धारित किए जाते हैं।
वर्तमान व्यवस्था
- वेतन समय-समय पर संसद द्वारा संशोधित किया जाता है।
- वेतन भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से दिया जाता है।
- नियुक्ति के बाद सेवा शर्तों में न्यायाधीश के प्रतिकूल परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
न्यायाधीशों की शपथ
अनुच्छेद 219 के अनुसार उच्च न्यायालय का प्रत्येक न्यायाधीश पद ग्रहण करने से पूर्व संबंधित राज्य के राज्यपाल अथवा उनके द्वारा अधिकृत व्यक्ति के समक्ष शपथ लेता है।
शपथ में न्यायाधीश यह प्रतिज्ञा करता है कि वह—
- संविधान के प्रति निष्ठा रखेगा।
- निष्पक्ष न्याय करेगा।
- भय, पक्षपात, स्नेह या द्वेष के बिना कार्य करेगा।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों पर प्रतिबंध
अनुच्छेद 220 के अनुसार कोई स्थायी न्यायाधीश सेवानिवृत्ति के बाद उस उच्च न्यायालय या उसके अधीनस्थ न्यायालयों में वकालत नहीं कर सकता, जहाँ वह न्यायाधीश रह चुका हो।
इसका उद्देश्य न्यायपालिका की निष्पक्षता एवं गरिमा बनाए रखना है।
भारत के प्रमुख उच्च न्यायालय
| उच्च न्यायालय | स्थापना वर्ष | मुख्यालय |
|---|---|---|
| कलकत्ता उच्च न्यायालय | 1862 | कोलकाता |
| बॉम्बे उच्च न्यायालय | 1862 | मुंबई |
| मद्रास उच्च न्यायालय | 1862 | चेन्नई |
| इलाहाबाद उच्च न्यायालय | 1866 | प्रयागराज |
| दिल्ली उच्च न्यायालय | 1966 | नई दिल्ली |
| राजस्थान उच्च न्यायालय | 1949 | जोधपुर |
| पटना उच्च न्यायालय | 1916 | पटना |
| पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय | 1947 (वर्तमान स्वरूप 1966) | चंडीगढ़ |
| कर्नाटक उच्च न्यायालय | 1884 (ऐतिहासिक स्थापना) | बेंगलुरु |
| केरल उच्च न्यायालय | 1956 | कोच्चि |
भारत में उच्च न्यायालयों का विकास
चार चार्टर्ड उच्च न्यायालय (Chartered High Courts)
भारतीय उच्च न्यायालय अधिनियम, 1861 के अंतर्गत तीन चार्टर्ड उच्च न्यायालय स्थापित किए गए—
| वर्ष | उच्च न्यायालय |
|---|---|
| 1862 | कलकत्ता |
| 1862 | बॉम्बे |
| 1862 | मद्रास |
| 1866 | इलाहाबाद |
ये भारत के सबसे पुराने उच्च न्यायालय हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
उच्च न्यायालय से संबंधित महत्वपूर्ण संवैधानिक अनुच्छेद
| अनुच्छेद | विषय |
|---|---|
| 214 | प्रत्येक राज्य के लिए उच्च न्यायालय |
| 215 | Court of Record |
| 217 | नियुक्ति एवं सेवा शर्तें |
| 219 | शपथ |
| 220 | वकालत पर प्रतिबंध |
| 221 | वेतन एवं भत्ते |
| 222 | स्थानांतरण |
| 224 | अतिरिक्त न्यायाधीश |
| 224A | सेवानिवृत्त न्यायाधीश |
| 225 | अधिकार क्षेत्र |
| 226 | रिट जारी करने की शक्ति |
| 227 | अधीनस्थ न्यायालयों पर अधीक्षण |
| 228 | संवैधानिक मामलों का स्थानांतरण |
| 229 | कर्मचारी एवं प्रशासन |
| 230 | केंद्रशासित प्रदेशों तक अधिकार क्षेत्र |
| 231 | संयुक्त उच्च न्यायालय |
उच्च न्यायालय बनाम सर्वोच्च न्यायालय
| आधार | उच्च न्यायालय | सर्वोच्च न्यायालय |
|---|---|---|
| स्तर | राज्य | राष्ट्रीय |
| स्थापना | अनुच्छेद 214 | अनुच्छेद 124 |
| न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु | 62 वर्ष | 65 वर्ष |
| रिट शक्ति | अनुच्छेद 226 | अनुच्छेद 32 |
| अधिकार क्षेत्र | राज्य एवं संबंधित क्षेत्र | संपूर्ण भारत |
| अपील | सर्वोच्च न्यायालय में | अंतिम न्यायालय |
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य
- अनुच्छेद 222 – न्यायाधीशों का स्थानांतरण।
- अनुच्छेद 223 – कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश।
- अनुच्छेद 224 – अतिरिक्त एवं कार्यकारी न्यायाधीश।
- अनुच्छेद 224A – सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति।
- अनुच्छेद 229 – उच्च न्यायालय के कर्मचारी।
- अनुच्छेद 231 – संयुक्त उच्च न्यायालय।
- भारत के प्रथम चार उच्च न्यायालय—कलकत्ता, बॉम्बे, मद्रास और इलाहाबाद।
- उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान है।
- न्यायाधीश पद ग्रहण करने से पूर्व राज्यपाल के समक्ष शपथ लेता है।
- वर्तमान में भारत में 25 उच्च न्यायालय कार्यरत हैं।
उच्च न्यायालय से संबंधित महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन
भारतीय संविधान में समय-समय पर किए गए संशोधनों ने न्यायपालिका एवं उच्च न्यायालयों की कार्यप्रणाली को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया है। यद्यपि अधिकांश संशोधन सर्वोच्च न्यायालय, न्यायिक समीक्षा एवं न्यायिक नियुक्तियों से संबंधित रहे हैं, फिर भी उनका प्रभाव उच्च न्यायालयों पर भी पड़ा है।
7वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1956
यह संशोधन राज्यों के पुनर्गठन (States Reorganisation) के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
मुख्य प्रभाव
- राज्यों का पुनर्गठन किया गया।
- अनेक उच्च न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र में परिवर्तन हुआ।
- दो या दो से अधिक राज्यों के लिए संयुक्त उच्च न्यायालय की व्यवस्था को प्रभावी बनाया गया।
42वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1976
इसे “मिनी संविधान” भी कहा जाता है।
मुख्य प्रभाव
- न्यायिक समीक्षा की शक्तियों को सीमित करने का प्रयास किया गया।
- संसद की सर्वोच्चता बढ़ाने का प्रयास हुआ।
- बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने अनेक प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित किया।
43वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1977
इस संशोधन द्वारा 42वें संशोधन के कई विवादित प्रावधान समाप्त किए गए।
महत्व
- उच्च न्यायालयों की न्यायिक शक्तियाँ पुनः बहाल हुईं।
- न्यायिक समीक्षा को पुनः मजबूत किया गया।
44वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1978
मुख्य विशेषताएँ
- मौलिक अधिकारों की सुरक्षा को मजबूत किया गया।
- न्यायपालिका की स्वतंत्रता को और अधिक सुदृढ़ बनाया गया।
उच्च न्यायालय से संबंधित महत्वपूर्ण सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय (Landmark Judgments)
प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रमुख निर्णयों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।
1. केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)
महत्व
- संविधान का मूल संरचना सिद्धांत (Basic Structure Doctrine) स्थापित किया गया।
- न्यायपालिका की स्वतंत्रता को संविधान की मूल संरचना माना गया।
2. एल. चंद्र कुमार बनाम भारत संघ (1997)
महत्व
- उच्च न्यायालयों की न्यायिक समीक्षा की शक्ति संविधान की मूल संरचना का भाग घोषित की गई।
- अधिकरणों (Tribunals) के निर्णयों की समीक्षा का अधिकार उच्च न्यायालयों को प्राप्त हुआ।
3. एस. पी. गुप्ता बनाम भारत संघ (1981)
महत्व
- न्यायाधीशों की नियुक्ति एवं स्थानांतरण पर महत्वपूर्ण सिद्धांत स्थापित हुए।
- बाद के “जजेज़ केस” (Judges Cases) की आधारशिला बनी।
4. सेकंड जजेज़ केस (1993)
महत्व
- कोलेजियम प्रणाली (Collegium System) की स्थापना हुई।
- न्यायाधीशों की नियुक्ति में मुख्य न्यायाधीश की भूमिका प्रमुख मानी गई।
5. थर्ड जजेज़ केस (1998)
महत्व
- कोलेजियम प्रणाली को और स्पष्ट किया गया।
- सर्वोच्च न्यायालय ने नियुक्ति प्रक्रिया में विस्तृत दिशानिर्देश दिए।
6. एनजेएसी मामला (2015)
Supreme Court Advocates-on-Record Association v. Union of India
महत्व
- 99वाँ संविधान संशोधन एवं राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) अधिनियम को असंवैधानिक घोषित किया गया।
- कोलेजियम प्रणाली को पुनः लागू रखा गया।
Exam Tip: NJAC एवं Collegium System UPSC, Judiciary, SSC CGL और State PCS परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय हैं।

उच्च न्यायालय MCQ Practice Set (20 Questions)
प्रश्न 1. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में प्रत्येक राज्य के लिए उच्च न्यायालय की व्यवस्था की गई है?
A. अनुच्छेद 210
B. अनुच्छेद 214
C. अनुच्छेद 217
D. अनुच्छेद 226
उत्तर: B. अनुच्छेद 214
व्याख्या: अनुच्छेद 214 प्रत्येक राज्य के लिए उच्च न्यायालय की स्थापना का प्रावधान करता है।
प्रश्न 2. उच्च न्यायालय को रिट जारी करने की शक्ति किस अनुच्छेद के अंतर्गत प्राप्त है?
A. अनुच्छेद 32
B. अनुच्छेद 215
C. अनुच्छेद 226
D. अनुच्छेद 227
उत्तर: C. अनुच्छेद 226
व्याख्या: अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय पाँच प्रकार की रिट जारी कर सकता है।
प्रश्न 3. उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति कौन करता है?
A. प्रधानमंत्री
B. राज्यपाल
C. संसद
D. राष्ट्रपति
उत्तर: D. राष्ट्रपति
व्याख्या: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
प्रश्न 4. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति की आयु कितनी होती है?
A. 60 वर्ष
B. 62 वर्ष
C. 65 वर्ष
D. 70 वर्ष
उत्तर: B. 62 वर्ष
व्याख्या: उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक पद पर रहते हैं।
प्रश्न 5. उच्च न्यायालय एक Court of Record है। यह किस अनुच्छेद में वर्णित है?
A. अनुच्छेद 214
B. अनुच्छेद 215
C. अनुच्छेद 216
D. अनुच्छेद 217
उत्तर: B. अनुच्छेद 215
व्याख्या: अनुच्छेद 215 उच्च न्यायालय को Court of Record घोषित करता है।
प्रश्न 6. अधीनस्थ न्यायालयों पर अधीक्षण की शक्ति किस अनुच्छेद में दी गई है?
A. अनुच्छेद 225
B. अनुच्छेद 226
C. अनुच्छेद 227
D. अनुच्छेद 228
उत्तर: C. अनुच्छेद 227
व्याख्या: अनुच्छेद 227 के अंतर्गत उच्च न्यायालय अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण रखता है।
प्रश्न 7. न्यायाधीशों के स्थानांतरण का प्रावधान किस अनुच्छेद में है?
A. अनुच्छेद 217
B. अनुच्छेद 220
C. अनुच्छेद 221
D. अनुच्छेद 222
उत्तर: D. अनुच्छेद 222
व्याख्या: राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद न्यायाधीशों का स्थानांतरण कर सकता है।
प्रश्न 8. संयुक्त उच्च न्यायालय का प्रावधान किस अनुच्छेद में है?
A. अनुच्छेद 228
B. अनुच्छेद 229
C. अनुच्छेद 230
D. अनुच्छेद 231
उत्तर: D. अनुच्छेद 231
व्याख्या: संसद दो या दो से अधिक राज्यों के लिए संयुक्त उच्च न्यायालय स्थापित कर सकती है।
प्रश्न 9. निम्न में से कौन-सी रिट अवैध हिरासत से संबंधित है?
A. Mandamus
B. Certiorari
C. Habeas Corpus
D. Quo Warranto
उत्तर: C. Habeas Corpus
व्याख्या: यह रिट व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करती है।
प्रश्न 10. Quo Warranto रिट का उद्देश्य क्या है?
A. अवैध गिरफ्तारी रोकना
B. आदेश निरस्त करना
C. सार्वजनिक पद पर अधिकार की जांच करना
D. न्यायालय को रोकना
उत्तर: C. सार्वजनिक पद पर अधिकार की जांच करना
व्याख्या: यह रिट पूछती है कि कोई व्यक्ति किस अधिकार से सार्वजनिक पद पर कार्य कर रहा है।
प्रश्न 11. उच्च न्यायालय किस प्रकार के अधिकारों की रक्षा के लिए रिट जारी कर सकता है?
A. केवल मौलिक अधिकार
B. केवल कानूनी अधिकार
C. मौलिक एवं अन्य कानूनी अधिकार
D. केवल संवैधानिक अधिकार
उत्तर: C. मौलिक एवं अन्य कानूनी अधिकार
व्याख्या: अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालय को व्यापक रिट अधिकार प्रदान करता है।
प्रश्न 12. निम्न में से कौन-सा उच्च न्यायालय सबसे पुराना है?
A. इलाहाबाद
B. दिल्ली
C. कलकत्ता
D. राजस्थान
उत्तर: C. कलकत्ता
व्याख्या: कलकत्ता उच्च न्यायालय की स्थापना 1862 में हुई थी।
प्रश्न 13. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद की शपथ किसके समक्ष लेते हैं?
A. राष्ट्रपति
B. प्रधानमंत्री
C. राज्यपाल
D. मुख्य न्यायाधीश
उत्तर: C. राज्यपाल
व्याख्या: न्यायाधीश राज्यपाल या उनके द्वारा अधिकृत व्यक्ति के समक्ष शपथ लेते हैं।
प्रश्न 14. अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति किस अनुच्छेद के अंतर्गत होती है?
A. अनुच्छेद 223
B. अनुच्छेद 224
C. अनुच्छेद 225
D. अनुच्छेद 226
उत्तर: B. अनुच्छेद 224
व्याख्या: लंबित मामलों के निस्तारण हेतु अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किए जाते हैं।
प्रश्न 15. उच्च न्यायालय के कर्मचारियों की नियुक्ति किस अनुच्छेद से संबंधित है?
A. अनुच्छेद 227
B. अनुच्छेद 228
C. अनुच्छेद 229
D. अनुच्छेद 230
उत्तर: C. अनुच्छेद 229
व्याख्या: अनुच्छेद 229 उच्च न्यायालय के कर्मचारियों एवं प्रशासन से संबंधित है।
प्रश्न 16. निम्न में से कौन-सी रिट अधीनस्थ न्यायालय की कार्यवाही को रोकती है?
A. Certiorari
B. Habeas Corpus
C. Prohibition
D. Mandamus
उत्तर: C. Prohibition
व्याख्या: यह रिट कार्यवाही पूरी होने से पहले जारी की जाती है।
प्रश्न 17. निर्णय को निरस्त करने वाली रिट कौन-सी है?
A. Mandamus
B. Prohibition
C. Certiorari
D. Quo Warranto
उत्तर: C. Certiorari
व्याख्या: यह रिट अधीनस्थ न्यायालय के आदेश को निरस्त करती है।
प्रश्न 18. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने का अधिकार किसके पास है?
A. राज्यपाल
B. संसद
C. राष्ट्रपति
D. मुख्य न्यायाधीश
उत्तर: C. राष्ट्रपति
व्याख्या: संसद की विशेष बहुमत से पारित प्रक्रिया के बाद राष्ट्रपति हटाने का आदेश जारी करते हैं।
प्रश्न 19. वर्तमान में भारत में कितने उच्च न्यायालय हैं?
A. 24
B. 25
C. 26
D. 28
उत्तर: B. 25
व्याख्या: वर्तमान में भारत में 25 उच्च न्यायालय कार्यरत हैं।
प्रश्न 20. निम्न में से कौन-सा कथन सही है?
A. अनुच्छेद 32 उच्च न्यायालय से संबंधित है।
B. अनुच्छेद 226 सर्वोच्च न्यायालय से संबंधित है।
C. अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालय को रिट जारी करने की शक्ति देता है।
D. अनुच्छेद 214 सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना से संबंधित है।
उत्तर: C. अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालय को रिट जारी करने की शक्ति देता है।
व्याख्या: अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालय की सबसे महत्वपूर्ण शक्तियों में से एक है।
उच्च न्यायालय Previous Year Questions (PYQs)
PYQ 1. उच्च न्यायालय को रिट जारी करने की शक्ति किस अनुच्छेद के अंतर्गत प्राप्त है?
परीक्षा: SSC CGL 2023
उत्तर: अनुच्छेद 226
व्याख्या: अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय मौलिक एवं अन्य कानूनी अधिकारों की रक्षा हेतु रिट जारी कर सकता है।
PYQ 2. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति आयु कितनी होती है?
परीक्षा: RRB NTPC
उत्तर: 62 वर्ष
व्याख्या: सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की आयु 65 वर्ष जबकि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की 62 वर्ष होती है।
PYQ 3. उच्च न्यायालय एक Court of Record है। यह किस अनुच्छेद में वर्णित है?
परीक्षा: UPSC Prelims
उत्तर: अनुच्छेद 215
व्याख्या: अनुच्छेद 215 उच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय घोषित करता है।
PYQ 4. उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति कौन करता है?
परीक्षा: SSC CHSL
उत्तर: भारत के राष्ट्रपति
व्याख्या: राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश एवं अन्य संवैधानिक पदाधिकारियों से परामर्श के बाद नियुक्ति करते हैं।
PYQ 5. अधीनस्थ न्यायालयों पर अधीक्षण की शक्ति किस अनुच्छेद में दी गई है?
परीक्षा: State PCS
उत्तर: अनुच्छेद 227
व्याख्या: अनुच्छेद 227 के अंतर्गत उच्च न्यायालय अपने क्षेत्राधिकार के सभी अधीनस्थ न्यायालयों एवं अधिकरणों पर अधीक्षण रखता है।
Read Other Related Topics/Subjects:
- Science: https://gkdost.com/category/science/
- Polity: https://gkdost.com/category/polity/
- Geography: https://gkdost.com/category/geography/
- History: https://gkdost.com/category/history/

