| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| विषय | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस |
| स्थापना | 1885 |
| पहला अधिवेशन | बंबई (मुंबई) |
| प्रथम अधिवेशन की तिथि | 28–31 दिसंबर 1885 |
| प्रथम अध्यक्ष | डब्ल्यू. सी. बनर्जी |
| प्रमुख संस्थापक/संगठक | ए. ओ. ह्यूम |
| प्रारंभिक स्वरूप | राजनीतिक संगठन |
| प्रमुख प्रारंभिक नेता | दादाभाई नौरोजी, सुरेंद्रनाथ बनर्जी, फिरोजशाह मेहता, गोपाल कृष्ण गोखले |
| प्रमुख विभाजन | सूरत विभाजन, 1907 |
| पुनः एकता | लखनऊ अधिवेशन, 1916 |
| पूर्ण स्वराज्य का लक्ष्य | लाहौर अधिवेशन, 1929 |
| मौलिक अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण अधिवेशन | कराची अधिवेशन, 1931 |
| स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका | राष्ट्रीय आंदोलन का प्रमुख राजनीतिक मंच |
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का पहला अधिवेशन 28 से 31 दिसंबर 1885 तक बंबई में हुआ और इसकी अध्यक्षता डब्ल्यू. सी. बनर्जी ने की। आधिकारिक कांग्रेस archive भी प्रथम अधिवेशन को 1885 के बंबई अधिवेशन के रूप में दर्ज करता है और ए. ओ. ह्यूम को महासचिव बताता है।
प्रश्न: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना कब हुई और इसके प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की?
उत्तर: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई। इसका प्रथम अधिवेशन 28–31 दिसंबर 1885 को बंबई में आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता डब्ल्यू. सी. बनर्जी (W.C. Bonnerjee) ने की। ए. ओ. ह्यूम इसके गठन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले व्यक्तियों में थे।
संक्षिप्त परिचय
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस आधुनिक भारतीय इतिहास और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। प्रतियोगी परीक्षाओं में इससे संबंधित प्रश्न अक्सर कांग्रेस की स्थापना, प्रथम अधिवेशन, अध्यक्ष, प्रमुख अधिवेशन, नरम दल-गरम दल, सूरत विभाजन, लखनऊ समझौता, पूर्ण स्वराज्य और गांधी युग से पूछे जाते हैं।
कांग्रेस की शुरुआत एक ऐसे राजनीतिक मंच के रूप में हुई जहाँ भारतीयों की राजनीतिक मांगों और प्रशासन से जुड़ी समस्याओं को संगठित रूप से उठाया जा सके। समय के साथ इसका स्वरूप बदलता गया और यह ब्रिटिश शासन के विरुद्ध व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन का प्रमुख मंच बन गई।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस क्या है?
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस एक प्रमुख राजनीतिक संगठन था जिसने भारत के राष्ट्रीय आंदोलन को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसकी स्थापना 1885 में हुई।
शुरुआती दौर में कांग्रेस का नेतृत्व मुख्यतः शिक्षित भारतीयों के हाथ में था और उसकी मांगें संवैधानिक सुधार, प्रशासन में भारतीयों की भागीदारी तथा राजनीतिक अधिकारों के विस्तार से जुड़ी थीं।
बाद में कांग्रेस के भीतर विचारों में बदलाव आया। नरमपंथी राजनीति से आगे बढ़कर स्वदेशी, बहिष्कार, स्वराज्य और अंततः पूर्ण स्वतंत्रता की मांग मजबूत हुई।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1857 के विद्रोह के बाद भारत में ब्रिटिश शासन और अधिक केंद्रीकृत हुआ। 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में भारतीयों के बीच आधुनिक शिक्षा, प्रेस, राजनीतिक संगठनों और सामाजिक सुधार आंदोलनों के कारण राजनीतिक चेतना बढ़ने लगी।
कई क्षेत्रीय राजनीतिक संस्थाओं ने भारतीयों को संगठित करने का काम किया। इसी राजनीतिक वातावरण में एक अखिल भारतीय संगठन की आवश्यकता महसूस हुई।
ए. ओ. ह्यूम ने भारतीय नेताओं के साथ मिलकर ऐसा मंच बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो आगे चलकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस बना।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना कब हुई?
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई।
इसका पहला अधिवेशन पहले पूना में आयोजित करने की योजना थी, लेकिन हैजा/कोलेरा के प्रकोप के कारण इसे बंबई स्थानांतरित कर दिया गया। कांग्रेस के आधिकारिक archive में भी पूना से बंबई स्थानांतरण का कारण महामारी का प्रकोप बताया गया है।
स्थापना से जुड़े प्रमुख नाम
- ए. ओ. ह्यूम (A.O. Hume) – कांग्रेस के गठन में प्रमुख भूमिका
- डब्ल्यू. सी. बनर्जी – प्रथम अधिवेशन के अध्यक्ष
- दादाभाई नौरोजी – प्रारंभिक राष्ट्रीय नेतृत्व के प्रमुख व्यक्तियों में से एक
- दिनशॉ वाचा
- फिरोजशाह मेहता
- अन्य प्रमुख भारतीय राजनीतिक नेता
Exam Tip: प्रश्न में यदि पूछा जाए कि कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की, तो उत्तर डब्ल्यू. सी. बनर्जी होगा।
कांग्रेस का पहला अधिवेशन कहाँ हुआ?
कांग्रेस का पहला अधिवेशन बंबई (वर्तमान मुंबई) में आयोजित हुआ।
तिथि: 28–31 दिसंबर 1885
स्थान: गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज
अध्यक्ष: डब्ल्यू. सी. बनर्जी
पहली बैठक में लगभग 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारंभिक उद्देश्य
कांग्रेस के प्रारंभिक उद्देश्यों में प्रमुख रूप से निम्न बातें शामिल थीं:
- भारतीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं को एक साझा मंच देना।
- भारतीयों की राजनीतिक मांगों को संगठित करना।
- प्रशासन में भारतीयों की भागीदारी बढ़ाने की मांग करना।
- राजनीतिक जागरूकता का विस्तार करना।
- विभिन्न क्षेत्रों के भारतीय नेताओं के बीच संपर्क बढ़ाना।
- संवैधानिक सुधारों की मांग करना।
- राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करना।
कांग्रेस के प्रारंभिक चरण की विशेषताएँ
1885 से लगभग 1905 तक कांग्रेस पर नरमपंथी नेताओं का प्रभाव अधिक रहा।
इन नेताओं का विश्वास संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीकों में था।
नरमपंथी नेताओं की प्रमुख कार्यपद्धति
- प्रार्थना
- याचिका
- विरोध
- ज्ञापन
- संवैधानिक सुधारों की मांग
- ब्रिटिश प्रशासन के समक्ष राजनीतिक शिकायतों को रखना
इसे अक्सर Prayer, Petition and Protest की नीति के रूप में समझाया जाता है।
प्रमुख नरमपंथी नेता
- दादाभाई नौरोजी
- गोपाल कृष्ण गोखले
- फिरोजशाह मेहता
- सुरेंद्रनाथ बनर्जी
- एम. जी. रानाडे
- बदरुद्दीन तैयबजी
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में गरम दल का उदय
1905 के बंगाल विभाजन और स्वदेशी आंदोलन के बाद कांग्रेस में अधिक आक्रामक राजनीतिक विचारों का प्रभाव बढ़ने लगा।
गरम दल के नेता ब्रिटिश शासन के प्रति अधिक सक्रिय विरोध और स्वदेशी तथा बहिष्कार जैसी रणनीतियों पर जोर देते थे।
गरम दल के प्रमुख नेता
लाल-बाल-पाल के नाम से प्रसिद्ध:
- लाला लाजपत राय
- बाल गंगाधर तिलक
- बिपिन चंद्र पाल
इनके अलावा अरविंद घोष जैसे नेताओं ने भी उग्र राष्ट्रवादी विचारों को बल दिया।
नरम दल और गरम दल में अंतर
| आधार | नरम दल | गरम दल |
|---|---|---|
| प्रमुख नेता | गोखले, दादाभाई नौरोजी | तिलक, लाजपत राय, बिपिन पाल |
| तरीका | संवैधानिक | अधिक सक्रिय/उग्र विरोध |
| प्रमुख साधन | प्रार्थना, याचिका, ज्ञापन | स्वदेशी, बहिष्कार, जनआंदोलन |
| तत्काल लक्ष्य | राजनीतिक सुधार | स्वराज्य की अधिक स्पष्ट मांग |
| ब्रिटिश शासन के प्रति दृष्टिकोण | सुधारवादी | अधिक आलोचनात्मक |
सूरत विभाजन 1907 क्या था?
कांग्रेस के इतिहास में 1907 का सूरत अधिवेशन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
नरम दल और गरम दल के बीच मतभेद बढ़ते गए और 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस में विभाजन हो गया।
इस घटना को सूरत विभाजन (Surat Split) कहा जाता है।
सूरत विभाजन के कारण
- नेतृत्व को लेकर मतभेद
- राजनीतिक कार्यपद्धति को लेकर मतभेद
- स्वदेशी और बहिष्कार की रणनीति
- कांग्रेस के लक्ष्य को लेकर मतभेद
- नरम और गरम दल के बीच बढ़ता तनाव
Exam Fact:
1907 → सूरत विभाजन
लखनऊ अधिवेशन 1916 क्यों महत्वपूर्ण है?
1916 का लखनऊ अधिवेशन कांग्रेस के इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ था।
इस अधिवेशन में कांग्रेस के नरम और गरम दल के बीच पुनः एकता स्थापित हुई। इसी दौर में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच लखनऊ समझौता (Lucknow Pact) भी हुआ।
याद रखने की ट्रिक
1916 = लखनऊ = पुनः एकता + लखनऊ समझौता
गांधी युग और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
महात्मा गांधी के भारतीय राजनीति में प्रभावी रूप से आने के बाद कांग्रेस का चरित्र व्यापक जनआंदोलन की दिशा में बदल गया।
गांधीजी ने सत्याग्रह, अहिंसा और जनभागीदारी को राजनीतिक संघर्ष का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया।
कांग्रेस के माध्यम से विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ने का प्रयास हुआ।
गांधी युग से जुड़े प्रमुख आंदोलन
- असहयोग आंदोलन
- सविनय अवज्ञा आंदोलन
- नमक सत्याग्रह
- भारत छोड़ो आंदोलन
इन आंदोलनों का व्यापक अध्ययन गांधीवादी आंदोलन और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम जैसे अलग-अलग topic clusters के साथ किया जा सकता है।
नागपुर अधिवेशन 1920
1920 का नागपुर अधिवेशन कांग्रेस के संगठनात्मक इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण है।
इस दौर में कांग्रेस ने जनआधारित राजनीतिक आंदोलन को मजबूत किया और असहयोग आंदोलन के कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।
परीक्षा के लिए याद रखें
1920 → नागपुर → असहयोग आंदोलन
बेलगाम अधिवेशन 1924
1924 का बेलगाम अधिवेशन इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि इसकी अध्यक्षता महात्मा गांधी ने की थी।
यह कांग्रेस का वह अधिवेशन है जिसकी अध्यक्षता स्वयं गांधीजी ने की थी।
Exam Trick:
गांधी → अध्यक्ष → बेलगाम → 1924
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन 1929
1929 का लाहौर अधिवेशन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे महत्वपूर्ण कांग्रेस अधिवेशनों में से एक था।
इस अधिवेशन की अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की।
इस अधिवेशन में पूर्ण स्वराज्य को कांग्रेस के लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया गया।
इसके बाद 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने का आह्वान किया गया।
Exam Booster
1929 → लाहौर → जवाहरलाल नेहरू → पूर्ण स्वराज्य
कराची अधिवेशन 1931
1931 का कराची अधिवेशन सरदार वल्लभभाई पटेल की अध्यक्षता में हुआ।
यह अधिवेशन विशेष रूप से मौलिक अधिकारों और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम से संबंधित प्रस्तावों के लिए महत्वपूर्ण है।
इसमें नागरिक स्वतंत्रताओं, समानता तथा सामाजिक-आर्थिक न्याय से संबंधित विचारों को प्रमुखता दी गई।
याद रखने की ट्रिक
1931 → कराची → पटेल → मौलिक अधिकार
फैजपुर अधिवेशन 1937
1937 का फैजपुर अधिवेशन कांग्रेस के इतिहास में महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कांग्रेस का पहला ग्रामीण अधिवेशन माना जाता है।
इसकी अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की थी।
यह अधिवेशन किसानों और ग्रामीण भारत से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक विमर्श में प्रमुखता देने के संदर्भ में महत्वपूर्ण था।
हरिपुरा अधिवेशन 1938
1938 का हरिपुरा अधिवेशन सुभाष चंद्र बोस से संबंधित है।
इस अधिवेशन की अध्यक्षता सुभाष चंद्र बोस ने की।
Exam Fact
1938 → हरिपुरा → सुभाष चंद्र बोस
त्रिपुरी अधिवेशन 1939
1939 का त्रिपुरी अधिवेशन कांग्रेस के आंतरिक राजनीतिक मतभेदों के कारण महत्वपूर्ण है।
सुभाष चंद्र बोस पुनः कांग्रेस अध्यक्ष निर्वाचित हुए, लेकिन गांधीजी के समर्थक नेतृत्व के साथ मतभेद बढ़ गए। इसके बाद बोस ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।
याद रखें
1939 → त्रिपुरी → सुभाष चंद्र बोस → अध्यक्ष पद से इस्तीफा
रामगढ़ अधिवेशन 1940
1940 का रामगढ़ अधिवेशन मौलाना अबुल कलाम आजाद की अध्यक्षता में हुआ।
यह स्वतंत्रता आंदोलन के उस दौर में हुआ जब द्वितीय विश्व युद्ध और भारत की राजनीतिक स्थिति के कारण कांग्रेस की रणनीति महत्वपूर्ण थी।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख अधिवेशन
| वर्ष | स्थान | अध्यक्ष/प्रमुख व्यक्ति | प्रमुख घटना |
|---|---|---|---|
| 1885 | बंबई | डब्ल्यू. सी. बनर्जी | प्रथम अधिवेशन |
| 1886 | कलकत्ता | दादाभाई नौरोजी | कांग्रेस का विस्तार |
| 1905 | बनारस | गोपाल कृष्ण गोखले | स्वदेशी आंदोलन का प्रभाव |
| 1906 | कलकत्ता | दादाभाई नौरोजी | स्वराज्य की मांग प्रमुख |
| 1907 | सूरत | रास बिहारी घोष | सूरत विभाजन |
| 1916 | लखनऊ | अंबिका चरण मजूमदार | कांग्रेस एकता + लखनऊ समझौता |
| 1917 | कलकत्ता | एनी बेसेंट | पहली महिला अध्यक्ष |
| 1920 | नागपुर | सी. विजयराघवाचारियार | असहयोग आंदोलन को समर्थन |
| 1924 | बेलगाम | महात्मा गांधी | गांधी की अध्यक्षता |
| 1929 | लाहौर | जवाहरलाल नेहरू | पूर्ण स्वराज्य |
| 1931 | कराची | सरदार पटेल | मौलिक अधिकार व आर्थिक नीति |
| 1937 | फैजपुर | जवाहरलाल नेहरू | पहला ग्रामीण अधिवेशन |
| 1938 | हरिपुरा | सुभाष चंद्र बोस | बोस अध्यक्ष |
| 1939 | त्रिपुरी | सुभाष चंद्र बोस | कांग्रेस संकट |
| 1940 | रामगढ़ | मौलाना अबुल कलाम आजाद | महत्वपूर्ण युद्धकालीन अधिवेशन |
| 1946 | मेरठ | जे. बी. कृपलानी | स्वतंत्रता से पूर्व अंतिम महत्वपूर्ण अधिवेशन |
अधिवेशनों की विस्तृत सूची में 1885 के बंबई अधिवेशन से लेकर 1946 के मेरठ अधिवेशन तक अध्यक्षों और स्थानों का क्रम दर्ज है।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेता
दादाभाई नौरोजी
दादाभाई नौरोजी प्रारंभिक कांग्रेस के सबसे महत्वपूर्ण नेताओं में थे। उन्हें Grand Old Man of India कहा जाता है।
उन्होंने ब्रिटिश शासन की आर्थिक नीतियों की आलोचना करते हुए Drain Theory को लोकप्रिय बनाया।
वे कांग्रेस के 1906 के कलकत्ता अधिवेशन के अध्यक्ष भी रहे।
गोपाल कृष्ण गोखले
गोखले कांग्रेस के प्रमुख नरमपंथी नेताओं में शामिल थे।
वे संवैधानिक सुधारों और क्रमिक राजनीतिक विकास के समर्थक थे।
महात्मा गांधी ने गोखले को अपने राजनीतिक गुरु के रूप में सम्मान दिया।
बाल गंगाधर तिलक
बाल गंगाधर तिलक गरम दल के प्रमुख नेताओं में थे।
उनका प्रसिद्ध कथन था:
“स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा।”
उन्होंने जनता को राजनीतिक आंदोलन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
लाला लाजपत राय
लाला लाजपत राय गरम दल के प्रमुख नेताओं में थे और लाल-बाल-पाल त्रयी का हिस्सा थे।
बिपिन चंद्र पाल
बिपिन चंद्र पाल ने स्वदेशी आंदोलन और राष्ट्रवादी विचारों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
महात्मा गांधी
गांधीजी के नेतृत्व में कांग्रेस एक व्यापक जनआंदोलन का प्रमुख मंच बनी।
उनके नेतृत्व से जुड़े प्रमुख आंदोलन:
- असहयोग आंदोलन
- सविनय अवज्ञा आंदोलन
- भारत छोड़ो आंदोलन
जवाहरलाल नेहरू
जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में से एक थे।
1929 के लाहौर अधिवेशन में वे कांग्रेस अध्यक्ष बने और पूर्ण स्वराज्य के लक्ष्य को प्रमुखता मिली।
सुभाष चंद्र बोस
सुभाष चंद्र बोस कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में हरिपुरा (1938) और त्रिपुरी (1939) अधिवेशनों से जुड़े रहे।
कांग्रेस और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का इतिहास भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से गहराई से जुड़ा हुआ है।
इसके विकास को मोटे तौर पर निम्न चरणों में समझा जा सकता है:
1885–1905 → नरमपंथी चरण
↓
1905–1919 → गरम राष्ट्रवाद और राजनीतिक संघर्ष
↓
1919–1947 → गांधी के नेतृत्व में जनआंदोलन
इस दौरान कांग्रेस ने अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीतियों में परिवर्तन किया।
कांग्रेस के प्रमुख नेता
| नेता | कांग्रेस से जुड़ा प्रमुख पक्ष |
|---|---|
| ए. ओ. ह्यूम | गठन में प्रमुख भूमिका |
| डब्ल्यू. सी. बनर्जी | प्रथम अध्यक्ष |
| दादाभाई नौरोजी | नरमपंथी नेतृत्व, Drain Theory |
| गोपाल कृष्ण गोखले | नरमपंथी नेता |
| बाल गंगाधर तिलक | गरम दल |
| लाला लाजपत राय | गरम दल |
| बिपिन चंद्र पाल | गरम दल |
| महात्मा गांधी | जनआंदोलन का नेतृत्व |
| जवाहरलाल नेहरू | 1929 लाहौर अधिवेशन |
| सरदार पटेल | 1931 कराची अधिवेशन |
| सुभाष चंद्र बोस | 1938–39 कांग्रेस अध्यक्ष |
| मौलाना अबुल कलाम आजाद | 1940 रामगढ़ अधिवेशन |

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस MCQ Practice Set
प्रश्न 1: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
A. 1881
B. 1885
C. 1887
D. 1890
उत्तर: B. 1885
व्याख्या: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई थी। इसका पहला अधिवेशन 28 से 31 दिसंबर 1885 तक बंबई में आयोजित किया गया था।
प्रश्न 2: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की थी?
A. दादाभाई नौरोजी
B. ए. ओ. ह्यूम
C. डब्ल्यू. सी. बनर्जी
D. गोपाल कृष्ण गोखले
उत्तर: C. डब्ल्यू. सी. बनर्जी
व्याख्या: 1885 में बंबई में आयोजित कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता डब्ल्यू. सी. बनर्जी ने की थी। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष बने।
प्रश्न 3: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन कहाँ आयोजित हुआ था?
A. कलकत्ता
B. मद्रास
C. बंबई
D. पूना
उत्तर: C. बंबई
व्याख्या: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन 28–31 दिसंबर 1885 को बंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में आयोजित किया गया था।
प्रश्न 4: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गठन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले ब्रिटिश व्यक्ति कौन थे?
A. लॉर्ड कर्जन
B. ए. ओ. ह्यूम
C. लॉर्ड रिपन
D. लॉर्ड इरविन
उत्तर: B. ए. ओ. ह्यूम
व्याख्या: ए. ओ. ह्यूम ने भारतीय नेताओं के साथ मिलकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वे कांग्रेस के प्रारंभिक संगठन में प्रमुख व्यक्ति थे।
प्रश्न 5: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारंभिक चरण में किस विचारधारा के नेताओं का प्रभाव अधिक था?
A. क्रांतिकारी
B. समाजवादी
C. नरमपंथी
D. साम्यवादी
उत्तर: C. नरमपंथी
व्याख्या: कांग्रेस के प्रारंभिक चरण में नरमपंथी नेताओं का प्रभाव अधिक था। वे संवैधानिक सुधारों और प्रार्थना, याचिका तथा विरोध जैसे शांतिपूर्ण तरीकों में विश्वास रखते थे।
प्रश्न 6: निम्नलिखित में से कौन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नरमपंथी नेता थे?
A. बाल गंगाधर तिलक
B. बिपिन चंद्र पाल
C. गोपाल कृष्ण गोखले
D. लाला लाजपत राय
उत्तर: C. गोपाल कृष्ण गोखले
व्याख्या: गोपाल कृष्ण गोखले कांग्रेस के प्रमुख नरमपंथी नेताओं में से एक थे। वे संवैधानिक सुधारों और क्रमिक राजनीतिक विकास के समर्थक थे।
प्रश्न 7: ‘लाल-बाल-पाल’ में निम्नलिखित में से कौन शामिल नहीं थे?
A. लाला लाजपत राय
B. बाल गंगाधर तिलक
C. बिपिन चंद्र पाल
D. गोपाल कृष्ण गोखले
उत्तर: D. गोपाल कृष्ण गोखले
व्याख्या: लाल-बाल-पाल में लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल शामिल थे। गोपाल कृष्ण गोखले नरमपंथी नेता थे।
प्रश्न 8: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का सूरत विभाजन किस वर्ष हुआ था?
A. 1905
B. 1906
C. 1907
D. 1908
उत्तर: C. 1907
व्याख्या: 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के नरम दल और गरम दल के बीच गंभीर मतभेद के कारण विभाजन हो गया। इसे सूरत विभाजन कहा जाता है।
प्रश्न 9: 1907 का सूरत विभाजन मुख्य रूप से किन दो गुटों के बीच मतभेद का परिणाम था?
A. कांग्रेस और मुस्लिम लीग
B. नरम दल और गरम दल
C. कांग्रेस और क्रांतिकारी
D. किसान और मजदूर
उत्तर: B. नरम दल और गरम दल
व्याख्या: कांग्रेस के भीतर नरमपंथी और गरमपंथी नेताओं के बीच राजनीतिक कार्यपद्धति और नेतृत्व को लेकर मतभेद बढ़ गए थे। 1907 में यही विवाद सूरत विभाजन का कारण बना।
प्रश्न 10: 1916 का लखनऊ अधिवेशन किस घटना के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है?
A. पूर्ण स्वराज्य की घोषणा
B. कांग्रेस का सूरत विभाजन
C. कांग्रेस के नरम और गरम दल की पुनः एकता
D. भारत छोड़ो आंदोलन
उत्तर: C. कांग्रेस के नरम और गरम दल की पुनः एकता
व्याख्या: 1916 के लखनऊ अधिवेशन में कांग्रेस के नरम और गरम दल के बीच पुनः एकता हुई। इसी वर्ष कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच लखनऊ समझौता भी हुआ।
प्रश्न 11: कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष कौन थीं?
A. सरोजिनी नायडू
B. एनी बेसेंट
C. विजयलक्ष्मी पंडित
D. अरुणा आसफ अली
उत्तर: B. एनी बेसेंट
व्याख्या: एनी बेसेंट 1917 के कलकत्ता अधिवेशन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष बनीं।
प्रश्न 12: 1920 का नागपुर अधिवेशन किस आंदोलन से विशेष रूप से संबंधित है?
A. सविनय अवज्ञा आंदोलन
B. असहयोग आंदोलन
C. भारत छोड़ो आंदोलन
D. स्वदेशी आंदोलन
उत्तर: B. असहयोग आंदोलन
व्याख्या: 1920 के नागपुर अधिवेशन में कांग्रेस ने असहयोग आंदोलन के कार्यक्रम को आगे बढ़ाने और जनआधारित आंदोलन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए।
प्रश्न 13: महात्मा गांधी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के किस अधिवेशन की अध्यक्षता की थी?
A. लखनऊ अधिवेशन
B. बेलगाम अधिवेशन
C. लाहौर अधिवेशन
D. कराची अधिवेशन
उत्तर: B. बेलगाम अधिवेशन
व्याख्या: 1924 के बेलगाम अधिवेशन की अध्यक्षता महात्मा गांधी ने की थी। यह कांग्रेस का वह अधिवेशन था जिसकी अध्यक्षता गांधीजी ने की।
प्रश्न 14: 1929 के लाहौर अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की थी?
A. महात्मा गांधी
B. सरदार वल्लभभाई पटेल
C. जवाहरलाल नेहरू
D. सुभाष चंद्र बोस
उत्तर: C. जवाहरलाल नेहरू
व्याख्या: 1929 के लाहौर अधिवेशन की अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की थी। यह अधिवेशन पूर्ण स्वराज्य के लक्ष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था।
प्रश्न 15: पूर्ण स्वराज्य को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लक्ष्य के रूप में किस अधिवेशन में स्वीकार किया गया था?
A. नागपुर अधिवेशन, 1920
B. बेलगाम अधिवेशन, 1924
C. लाहौर अधिवेशन, 1929
D. कराची अधिवेशन, 1931
उत्तर: C. लाहौर अधिवेशन, 1929
व्याख्या: 1929 के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज्य को कांग्रेस के लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया गया। इसके बाद 26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने का आह्वान किया गया।
प्रश्न 16: 1931 के कराची अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की थी?
A. जवाहरलाल नेहरू
B. सरदार वल्लभभाई पटेल
C. महात्मा गांधी
D. राजेंद्र प्रसाद
उत्तर: B. सरदार वल्लभभाई पटेल
व्याख्या: 1931 के कराची अधिवेशन की अध्यक्षता सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी। यह अधिवेशन मौलिक अधिकारों और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम से संबंधित प्रस्तावों के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 17: 1931 का कराची अधिवेशन किस विषय से विशेष रूप से संबंधित है?
A. सूरत विभाजन
B. मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम
C. असहयोग आंदोलन
D. लखनऊ समझौता
उत्तर: B. मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम
व्याख्या: कराची अधिवेशन 1931 में मौलिक अधिकारों और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम से संबंधित महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए। इसलिए यह अधिवेशन स्वतंत्र भारत के सामाजिक-आर्थिक दृष्टिकोण के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 18: कांग्रेस का पहला ग्रामीण अधिवेशन किस स्थान पर आयोजित किया गया था?
A. हरिपुरा
B. फैजपुर
C. त्रिपुरी
D. रामगढ़
उत्तर: B. फैजपुर
व्याख्या: 1937 का फैजपुर अधिवेशन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का पहला ग्रामीण अधिवेशन माना जाता है। इसकी अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की थी।
प्रश्न 19: 1938 के हरिपुरा अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की थी?
A. जवाहरलाल नेहरू
B. सरदार पटेल
C. सुभाष चंद्र बोस
D. मौलाना अबुल कलाम आजाद
उत्तर: C. सुभाष चंद्र बोस
व्याख्या: 1938 के हरिपुरा अधिवेशन की अध्यक्षता सुभाष चंद्र बोस ने की थी। यह अधिवेशन कांग्रेस के इतिहास में बोस के नेतृत्व के कारण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 20: 1939 का त्रिपुरी अधिवेशन किस नेता से विशेष रूप से संबंधित है?
A. दादाभाई नौरोजी
B. सुभाष चंद्र बोस
C. गोपाल कृष्ण गोखले
D. सरदार पटेल
उत्तर: B. सुभाष चंद्र बोस
व्याख्या: 1939 का त्रिपुरी अधिवेशन सुभाष चंद्र बोस और कांग्रेस के तत्कालीन नेतृत्व के बीच राजनीतिक मतभेदों के कारण महत्वपूर्ण है। बाद में बोस ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस FAQs:
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना कब हुई?
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई थी। इसका पहला अधिवेशन 28–31 दिसंबर 1885 को बंबई में आयोजित हुआ।
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक कौन थे?
कांग्रेस के गठन में ए. ओ. ह्यूम की महत्वपूर्ण भूमिका थी। हालांकि कांग्रेस का गठन भारतीय नेताओं की सक्रिय भागीदारी से हुआ और इसे किसी एक व्यक्ति द्वारा स्थापित संस्था के रूप में समझना उचित नहीं है।
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कांग्रेस का पहला अधिवेशन कहाँ हुआ था?
कांग्रेस का पहला अधिवेशन बंबई (मुंबई) में हुआ था।
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कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष कौन थे?
कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन के अध्यक्ष डब्ल्यू. सी. बनर्जी थे।
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कांग्रेस का सूरत विभाजन कब हुआ?
कांग्रेस का सूरत विभाजन 1907 में हुआ था। इसमें नरम दल और गरम दल के बीच मतभेद प्रमुख कारण रहे।
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कांग्रेस का लखनऊ अधिवेशन 1916 क्यों महत्वपूर्ण है?
1916 का लखनऊ अधिवेशन कांग्रेस के नरम और गरम दल की पुनः एकता तथा कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच लखनऊ समझौते के लिए महत्वपूर्ण है।
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पूर्ण स्वराज्य का प्रस्ताव कब पारित हुआ?
1929 के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज्य को कांग्रेस के लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया गया।
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कांग्रेस के किस अधिवेशन की अध्यक्षता महात्मा गांधी ने की?
1924 के बेलगाम अधिवेशन की अध्यक्षता महात्मा गांधी ने की थी।
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कराची अधिवेशन 1931 क्यों प्रसिद्ध है?
कराची अधिवेशन मौलिक अधिकारों और राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम से संबंधित महत्वपूर्ण प्रस्तावों के लिए प्रसिद्ध है।
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कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष कौन थीं?
एनी बेसेंट कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष थीं। उन्होंने 1917 के कलकत्ता अधिवेशन की अध्यक्षता की।
निष्कर्ष
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई और धीरे-धीरे यह भारतीयों के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मंच से बढ़कर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रमुख संगठन बन गई। इसके इतिहास में नरम दल और गरम दल, 1907 का सूरत विभाजन, 1916 का लखनऊ अधिवेशन, 1929 का लाहौर अधिवेशन, 1931 का कराची अधिवेशन तथा गांधीजी के नेतृत्व में हुए जनआंदोलन विशेष महत्व रखते हैं।
परीक्षा की दृष्टि से 1885–बंबई–डब्ल्यू. सी. बनर्जी, 1907–सूरत विभाजन, 1916–लखनऊ, 1924–बेलगाम–गांधी, 1929–लाहौर–पूर्ण स्वराज्य, 1931–कराची–मौलिक अधिकार, 1937–फैजपुर, 1938–हरिपुरा और 1939–त्रिपुरी जैसे तथ्यों को विशेष रूप से याद रखना चाहिए। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्ययन आधुनिक भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम को समझने के लिए आधारभूत विषय है।

