एक नजर में
| विषय | विवरण |
|---|---|
| संविधान संशोधन | 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 |
| लागू | 24 अप्रैल 1993 |
| संबंधित भाग | भाग IX |
| संबंधित अनुच्छेद | 243 से 243-O |
| संबंधित अनुसूची | 11वीं अनुसूची |
| कुल विषय | 29 विषय |
| व्यवस्था | त्रिस्तरीय पंचायती राज |
| चुनाव | प्रत्येक 5 वर्ष में |
| आरक्षण | SC/ST एवं कम से कम 1/3 महिलाओं के लिए (कई राज्यों में 50%) |
| चुनाव कराता है | राज्य निर्वाचन आयोग |
| वित्तीय समीक्षा | राज्य वित्त आयोग |
प्रश्न: 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम क्या है?
उत्तर: 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के माध्यम से भारतीय संविधान में भाग IX (अनुच्छेद 243 से 243-O) तथा 11वीं अनुसूची जोड़ी गई। इसके द्वारा पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया तथा ग्रामीण स्थानीय स्वशासन को मजबूत बनाया गया। यह संशोधन 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ।
पंचायती राज क्या है?
पंचायती राज भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन (Local Self Government) की व्यवस्था है, जिसके माध्यम से गाँव के लोग अपने स्थानीय विकास एवं प्रशासन से जुड़े निर्णय स्वयं लेते हैं।
सरल शब्दों में,
“गाँव का शासन, गाँव के लोगों द्वारा और गाँव के लोगों के लिए” — यही पंचायती राज व्यवस्था का मूल उद्देश्य है।
यह व्यवस्था लोकतंत्र को केवल संसद और विधानसभाओं तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उसे गाँव के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का कार्य करती है।
आज लगभग प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा जैसे SSC, Railway, CET, REET, UPSC, राज्य पुलिस एवं राज्य लोक सेवा आयोग में पंचायती राज से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।
पंचायती राज की आवश्यकता क्यों पड़ी?
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत की अधिकांश आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती थी। विकास योजनाएँ ऊपर से बनाई जाती थीं, जिससे स्थानीय समस्याओं का समाधान प्रभावी ढंग से नहीं हो पाता था।
इस कारण एक ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता महसूस हुई जिसमें—
- गाँव के लोग स्वयं निर्णय ले सकें।
- स्थानीय विकास कार्यों में जनता की भागीदारी बढ़े।
- लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हों।
- ग्रामीण क्षेत्रों का संतुलित विकास हो।
- योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुँचे।
इसी सोच ने पंचायती राज व्यवस्था को जन्म दिया।
पंचायती राज का इतिहास
भारत में स्थानीय स्वशासन की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। वैदिक काल में गाँवों का प्रशासन ग्राम सभाओं द्वारा संचालित किया जाता था।
हालाँकि आधुनिक पंचायती राज व्यवस्था का विकास स्वतंत्र भारत में विभिन्न समितियों की सिफारिशों के आधार पर हुआ।
प्रमुख घटनाओं की समयरेखा
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1952 | सामुदायिक विकास कार्यक्रम प्रारम्भ |
| 1953 | राष्ट्रीय विस्तार सेवा (NES) |
| 1957 | बलवंत राय मेहता समिति का गठन |
| 1959 | राजस्थान के नागौर जिले से पंचायती राज की शुरुआत |
| 1978 | अशोक मेहता समिति |
| 1985 | जी.वी.के. राव समिति |
| 1986 | एल.एम. सिंहवी समिति |
| 1992 | 73वाँ संविधान संशोधन पारित |
| 24 अप्रैल 1993 | पूरे देश में लागू |
बलवंत राय मेहता समिति (1957)
यदि किसी परीक्षा में पूछा जाए कि “पंचायती राज का जनक किस समिति को माना जाता है?” तो उत्तर होगा—
बलवंत राय मेहता समिति (1957)
इस समिति का गठन सामुदायिक विकास कार्यक्रम की समीक्षा के लिए किया गया था।
समिति की प्रमुख सिफारिशें
- त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था लागू की जाए।
- ग्राम स्तर पर ग्राम पंचायत बनाई जाए।
- मध्य स्तर पर पंचायत समिति हो।
- जिला स्तर पर जिला परिषद बनाई जाए।
- विकास योजनाओं में जनता की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
इन्हीं सिफारिशों के आधार पर भारत में आधुनिक पंचायती राज व्यवस्था की नींव रखी गई।
भारत में पंचायती राज की शुरुआत कब हुई?
भारत में आधुनिक पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के नागौर जिले से हुई।
इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इस व्यवस्था का उद्घाटन किया।
याद रखने योग्य तथ्य
- पहला राज्य — राजस्थान
- पहला जिला — नागौर
- प्रारम्भ तिथि — 2 अक्टूबर 1959
73वाँ संविधान संशोधन क्या है?
भारत सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं को अधिक प्रभावी एवं संवैधानिक बनाने के लिए 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 पारित किया।
यह संशोधन 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ।
इसके बाद पहली बार पंचायती राज संस्थाओं को संविधान में स्पष्ट स्थान मिला।
इस संशोधन के अंतर्गत—
- संविधान में भाग IX जोड़ा गया।
- अनुच्छेद 243 से 243-O सम्मिलित किए गए।
- 11वीं अनुसूची जोड़ी गई।
- पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा मिला।
- नियमित चुनाव अनिवार्य किए गए।
- महिलाओं एवं अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया गया।
- राज्य निर्वाचन आयोग तथा राज्य वित्त आयोग की व्यवस्था की गई।
73वें संविधान संशोधन की प्रमुख विशेषताएँ
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| संवैधानिक दर्जा | पंचायती राज संस्थाओं को मिला |
| भाग IX | संविधान में जोड़ा गया |
| अनुच्छेद | 243 से 243-O |
| 11वीं अनुसूची | 29 विषय शामिल |
| चुनाव | प्रत्येक 5 वर्ष में |
| आरक्षण | SC, ST एवं महिलाओं के लिए |
| वित्त आयोग | राज्य वित्त आयोग |
| निर्वाचन आयोग | राज्य निर्वाचन आयोग |
73वाँ संशोधन किन राज्यों पर लागू नहीं होता?
कुछ राज्यों एवं क्षेत्रों में विशेष परिस्थितियों के कारण प्रारम्भ में यह संशोधन पूर्ण रूप से लागू नहीं किया गया।
इनमें मुख्यतः—
- नागालैंड
- मेघालय
- मिजोरम
- अनुसूचित एवं जनजातीय क्षेत्र (पाँचवीं अनुसूची के कुछ क्षेत्र)
- कुछ विशेष स्वायत्त परिषद वाले क्षेत्र
बाद में अनुसूचित क्षेत्रों के लिए PESA अधिनियम, 1996 लागू किया गया।
पंचायती राज से जुड़े महत्वपूर्ण अनुच्छेद
| अनुच्छेद | विषय |
|---|---|
| 243 | परिभाषाएँ |
| 243A | ग्राम सभा |
| 243B | पंचायतों का गठन |
| 243C | पंचायतों की संरचना |
| 243D | आरक्षण |
| 243E | कार्यकाल |
| 243F | सदस्यता की अयोग्यता |
| 243G | शक्तियाँ एवं दायित्व |
| 243H | वित्तीय शक्तियाँ |
| 243I | राज्य वित्त आयोग |
| 243K | राज्य निर्वाचन आयोग |
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प्रतियोगी परीक्षाओं में निम्न तथ्य सबसे अधिक पूछे जाते हैं—
- 73वाँ संशोधन — 1992
- लागू — 24 अप्रैल 1993
- भाग IX
- अनुच्छेद 243–243O
- 11वीं अनुसूची
- 29 विषय
- पहला पंचायती राज राज्य — राजस्थान
- पहला जिला — नागौर
- समिति — बलवंत राय मेहता समिति
पंचायती राज की त्रिस्तरीय व्यवस्था (Three-Tier Panchayati Raj System)
73वें संविधान संशोधन के बाद भारत में पंचायती राज व्यवस्था को त्रिस्तरीय (Three-Tier) स्वरूप दिया गया। इसका उद्देश्य गाँव से लेकर जिले तक लोकतांत्रिक प्रशासन को मजबूत बनाना है।
भारत में पंचायती राज की तीनों संस्थाएँ एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं तथा ग्रामीण विकास योजनाओं का संचालन करती हैं।
| स्तर | संस्था | कार्य क्षेत्र |
|---|---|---|
| प्रथम स्तर | ग्राम पंचायत | गाँव |
| द्वितीय स्तर | पंचायत समिति (ब्लॉक/खंड) | विकासखंड |
| तृतीय स्तर | जिला परिषद | जिला |
नोट: 20 लाख से कम जनसंख्या वाले राज्यों में मध्य स्तर (पंचायत समिति) बनाना अनिवार्य नहीं है।
पंचायती राज की संरचना
जिला परिषद
▲
│
पंचायत समिति
▲
│
ग्राम पंचायत
▲
│
ग्राम सभा
ग्राम सभा क्या है?
ग्राम सभा पंचायती राज व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण एवं सबसे निचली लोकतांत्रिक संस्था है।
ग्राम पंचायत क्षेत्र में रहने वाले 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी पंजीकृत मतदाता ग्राम सभा के सदस्य होते हैं।
इसे ग्रामीण लोकतंत्र की आत्मा कहा जाता है क्योंकि यहीं से जनभागीदारी की शुरुआत होती है।
संवैधानिक आधार
- अनुच्छेद 243A
ग्राम सभा के प्रमुख कार्य
- ग्राम पंचायत के कार्यों की समीक्षा करना।
- विकास योजनाओं को स्वीकृति देना।
- लाभार्थियों का चयन करना।
- ग्राम विकास योजनाओं पर चर्चा करना।
- सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) करना।
- पंचायत के आय-व्यय की जानकारी प्राप्त करना।
ग्राम सभा की विशेषताएँ
- सभी मतदाता सदस्य होते हैं।
- यह कोई निर्वाचित संस्था नहीं है।
- लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई है।
- पंचायत को जवाबदेह बनाती है।
- पारदर्शिता एवं जनभागीदारी सुनिश्चित करती है।
ग्राम पंचायत क्या है?
ग्राम पंचायत ग्राम स्तर पर कार्य करने वाली निर्वाचित स्थानीय स्वशासन संस्था है।
ग्राम सभा अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती है, जो मिलकर ग्राम पंचायत का गठन करते हैं।
संवैधानिक आधार
- अनुच्छेद 243B एवं 243C
ग्राम पंचायत का गठन
ग्राम पंचायत में—
- सरपंच (प्रधान)
- उपसरपंच
- वार्ड सदस्य (पंच)
शामिल होते हैं।
इनका चुनाव जनता द्वारा प्रत्यक्ष मतदान से किया जाता है।
ग्राम पंचायत के प्रमुख कार्य
- सड़क निर्माण
- नालियों का निर्माण
- पेयजल व्यवस्था
- स्वच्छता अभियान
- स्ट्रीट लाइट व्यवस्था
- जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण
- मनरेगा कार्यों का संचालन
- सार्वजनिक संपत्तियों का रखरखाव
- ग्रामीण विकास योजनाओं का क्रियान्वयन
ग्राम पंचायत की आय के स्रोत
| स्रोत | उदाहरण |
|---|---|
| स्थानीय कर | मकान कर, बाजार शुल्क |
| राज्य सरकार | अनुदान |
| केंद्र सरकार | वित्त आयोग अनुदान |
| योजनाएँ | मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना आदि |
| अन्य आय | लाइसेंस शुल्क, जल कर |
पंचायत समिति क्या है?
पंचायत समिति को मध्य स्तर (Intermediate Level) की पंचायत कहा जाता है।
इसे कई राज्यों में ब्लॉक पंचायत, जनपद पंचायत या खंड पंचायत भी कहा जाता है।
संवैधानिक आधार
- अनुच्छेद 243B
पंचायत समिति का क्षेत्र
यह एक विकासखंड (Block) के अंतर्गत आने वाली सभी ग्राम पंचायतों का समन्वय करती है।
पंचायत समिति के प्रमुख कार्य
- ग्राम पंचायतों के कार्यों की निगरानी
- विकास योजनाओं का समन्वय
- कृषि विकास कार्यक्रम
- स्वास्थ्य सेवाएँ
- शिक्षा कार्यक्रम
- सिंचाई परियोजनाएँ
- ग्रामीण रोजगार योजनाएँ
- तकनीकी सहायता प्रदान करना
पंचायत समिति के पदाधिकारी
- प्रधान / प्रमुख
- उपप्रधान
- निर्वाचित सदस्य
- विधायक एवं सांसद (राज्य नियमों के अनुसार)
- सरकारी अधिकारी
जिला परिषद क्या है?
जिला परिषद पंचायती राज व्यवस्था की सर्वोच्च ग्रामीण संस्था है।
यह पूरे जिले की सभी पंचायत समितियों का समन्वय करती है।
संवैधानिक आधार
- अनुच्छेद 243B
जिला परिषद के प्रमुख कार्य
- जिला स्तरीय विकास योजनाएँ बनाना।
- पंचायत समितियों के कार्यों का निरीक्षण।
- शिक्षा एवं स्वास्थ्य कार्यक्रमों का संचालन।
- जिला बजट का समन्वय।
- सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन।
- ग्रामीण अधोसंरचना (Infrastructure) का विकास।
जिला परिषद की संरचना
- अध्यक्ष
- उपाध्यक्ष
- निर्वाचित सदस्य
- सांसद
- विधायक
- जिला अधिकारी (प्रशासनिक भूमिका)
ग्राम सभा, ग्राम पंचायत, पंचायत समिति एवं जिला परिषद में अंतर
| आधार | ग्राम सभा | ग्राम पंचायत | पंचायत समिति | जिला परिषद |
|---|---|---|---|---|
| स्तर | गाँव | गाँव | विकासखंड | जिला |
| सदस्य | सभी मतदाता | निर्वाचित सदस्य | निर्वाचित प्रतिनिधि | निर्वाचित प्रतिनिधि |
| चुनाव | नहीं | होता है | होता है | होता है |
| प्रमुख | कोई नहीं | सरपंच | प्रमुख | अध्यक्ष |
| कार्य | निगरानी एवं अनुमोदन | स्थानीय प्रशासन | समन्वय | जिला स्तरीय विकास |
पंचायती राज में ग्राम सभा का महत्व
ग्राम सभा को पंचायती राज व्यवस्था की रीढ़ (Backbone) माना जाता है।
इसके कारण—
- लोकतंत्र मजबूत होता है।
- जनता सीधे निर्णय प्रक्रिया में भाग लेती है।
- भ्रष्टाचार पर नियंत्रण रहता है।
- विकास योजनाएँ पारदर्शी बनती हैं।
- सामाजिक उत्तरदायित्व बढ़ता है।
पंचायती राज की शक्तियाँ एवं कार्य
73वें संविधान संशोधन के तहत राज्यों को यह अधिकार दिया गया कि वे पंचायतों को स्थानीय विकास से संबंधित विषयों पर पर्याप्त शक्तियाँ प्रदान करें।
पंचायतों के प्रमुख कार्य—
- कृषि विकास
- पशुपालन
- लघु सिंचाई
- ग्रामीण सड़कें
- प्राथमिक शिक्षा
- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण
- पेयजल
- स्वच्छता
- महिला एवं बाल विकास
- गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम
- सामाजिक वानिकी
- ग्रामीण आवास
- सार्वजनिक वितरण प्रणाली
11वीं अनुसूची क्या है?
73वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में 11वीं अनुसूची जोड़ी गई।
इस अनुसूची में 29 विषय शामिल किए गए, जिन्हें पंचायतों को सौंपा जा सकता है।
11वीं अनुसूची के प्रमुख विषय
| क्रम | विषय |
|---|---|
| 1 | कृषि एवं कृषि विस्तार |
| 2 | भूमि सुधार |
| 3 | लघु सिंचाई एवं जल प्रबंधन |
| 4 | पशुपालन एवं डेयरी |
| 5 | मत्स्य पालन |
| 6 | सामाजिक वानिकी |
| 7 | लघु वन उत्पाद |
| 8 | लघु उद्योग |
| 9 | खादी एवं ग्रामोद्योग |
| 10 | ग्रामीण आवास |
| 11 | पेयजल |
| 12 | ईंधन एवं चारा |
| 13 | ग्रामीण सड़कें |
| 14 | ग्रामीण विद्युतीकरण |
| 15 | गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत |
| 16 | गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम |
| 17 | प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा |
| 18 | तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा |
| 19 | वयस्क शिक्षा |
| 20 | पुस्तकालय |
| 21 | सांस्कृतिक गतिविधियाँ |
| 22 | बाजार एवं मेले |
| 23 | स्वास्थ्य एवं स्वच्छता |
| 24 | परिवार कल्याण |
| 25 | महिला एवं बाल विकास |
| 26 | समाज कल्याण |
| 27 | कमजोर वर्गों का कल्याण |
| 28 | सार्वजनिक वितरण प्रणाली |
| 29 | सामुदायिक संपत्तियों का रखरखाव |
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य
- ग्राम सभा – अनुच्छेद 243A
- पंचायतों का गठन – अनुच्छेद 243B
- पंचायतों की संरचना – अनुच्छेद 243C
- 11वीं अनुसूची – 29 विषय
- त्रिस्तरीय व्यवस्था – ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद
- ग्राम सभा – सभी पंजीकृत मतदाताओं की संस्था
- जिला परिषद – पंचायती राज की सर्वोच्च ग्रामीण संस्था
- मध्य स्तर – पंचायत समिति (20 लाख से कम जनसंख्या वाले राज्यों में अनिवार्य नहीं)
पंचायती राज की प्रमुख विशेषताएँ
73वें संविधान संशोधन ने पंचायती राज व्यवस्था को केवल प्रशासनिक व्यवस्था न बनाकर संवैधानिक संस्था का दर्जा दिया। इसके बाद पंचायतों के गठन, चुनाव, आरक्षण, कार्यकाल एवं वित्तीय व्यवस्था को संविधान द्वारा सुरक्षित किया गया।
इस संशोधन की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
1. पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा
73वें संविधान संशोधन से पहले पंचायतों का गठन राज्यों की इच्छा पर निर्भर था।
संशोधन के बाद—
- संविधान में भाग IX जोड़ा गया।
- पंचायतों को संवैधानिक मान्यता मिली।
- सभी राज्यों के लिए पंचायतों का गठन अनिवार्य किया गया (कुछ अपवादों को छोड़कर)।
2. त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था
ग्रामीण क्षेत्रों में तीन स्तरों पर पंचायतों की व्यवस्था की गई—
- ग्राम पंचायत
- पंचायत समिति
- जिला परिषद
3. ग्राम सभा को संवैधानिक मान्यता
पहली बार ग्राम सभा को संविधान में स्थान दिया गया।
ग्राम सभा को स्थानीय लोकतंत्र की आधारशिला माना गया।
4. नियमित चुनाव की व्यवस्था
अब पंचायतों के चुनाव नियमित रूप से कराना अनिवार्य है।
यदि किसी पंचायत को समय से पहले भंग कर दिया जाए तो 6 माह के भीतर नए चुनाव कराना आवश्यक है।
5. निश्चित कार्यकाल
प्रत्येक पंचायत का कार्यकाल 5 वर्ष निर्धारित किया गया है।
संबंधित अनुच्छेद — 243E
6. आरक्षण की व्यवस्था
पंचायती राज संस्थाओं में निम्न वर्गों के लिए आरक्षण अनिवार्य किया गया—
- अनुसूचित जाति (SC)
- अनुसूचित जनजाति (ST)
- महिलाओं के लिए कम से कम एक-तिहाई (1/3) आरक्षण
वर्तमान में राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया गया है।
7. स्वतंत्र निर्वाचन व्यवस्था
पंचायत चुनावों के संचालन के लिए प्रत्येक राज्य में राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) की स्थापना की गई।
8. वित्तीय सुदृढ़ीकरण
पंचायतों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए प्रत्येक पाँच वर्ष में राज्य वित्त आयोग का गठन किया जाता है।
पंचायतों का कार्यकाल
अनुच्छेद 243E के अनुसार प्रत्येक पंचायत का कार्यकाल 5 वर्ष होता है।
यदि किसी कारण पंचायत का कार्यकाल समाप्त होने से पहले उसे भंग कर दिया जाता है, तो—
- 6 माह के भीतर पुनः चुनाव कराना अनिवार्य है।
- नई पंचायत शेष अवधि नहीं बल्कि पूर्ण 5 वर्ष के लिए कार्य करती है (यदि नियमित चुनाव हुए हों)।
पंचायतों में आरक्षण व्यवस्था
पंचायती राज व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।
आरक्षण की प्रमुख व्यवस्थाएँ
| वर्ग | आरक्षण |
|---|---|
| अनुसूचित जाति (SC) | जनसंख्या के अनुपात में |
| अनुसूचित जनजाति (ST) | जनसंख्या के अनुपात में |
| महिलाएँ | कम से कम 33% |
| अध्यक्ष पद | SC/ST एवं महिलाओं हेतु आरक्षित किए जा सकते हैं |
पंचायत चुनाव कैसे होते हैं?
पंचायतों के सदस्य जनता द्वारा प्रत्यक्ष मतदान से चुने जाते हैं।
चुनाव प्रक्रिया—
- मतदाता सूची तैयार होती है।
- उम्मीदवार नामांकन करते हैं।
- चुनाव प्रचार होता है।
- मतदान कराया जाता है।
- मतगणना होती है।
- विजेता घोषित किया जाता है।
राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission)
73वें संशोधन द्वारा पंचायत एवं नगर निकाय चुनावों के लिए प्रत्येक राज्य में राज्य निर्वाचन आयोग की स्थापना का प्रावधान किया गया।
संबंधित अनुच्छेद — 243K
प्रमुख कार्य
- पंचायत चुनाव कराना।
- निर्वाचन कार्यक्रम घोषित करना।
- मतदाता सूची तैयार कराना।
- चुनाव प्रक्रिया की निगरानी करना।
- निष्पक्ष एवं स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करना।
राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission)
पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए अनुच्छेद 243I के अंतर्गत राज्य वित्त आयोग की व्यवस्था की गई।
प्रत्येक 5 वर्ष में राज्यपाल राज्य वित्त आयोग का गठन करता है।
राज्य वित्त आयोग के कार्य
- पंचायतों की वित्तीय स्थिति का मूल्यांकन करना।
- करों एवं शुल्कों के बंटवारे की सिफारिश करना।
- राज्य सरकार को वित्तीय सुधारों के सुझाव देना।
- पंचायतों को मिलने वाले अनुदानों पर सलाह देना।
पंचायतों की आय के प्रमुख स्रोत
| स्रोत | विवरण |
|---|---|
| स्थानीय कर | मकान कर, बाजार शुल्क, जल कर आदि |
| राज्य सरकार | अनुदान एवं सहायता |
| केंद्र सरकार | वित्त आयोग एवं केंद्रीय योजनाएँ |
| योजनागत सहायता | मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन आदि |
| अन्य आय | लाइसेंस शुल्क, संपत्ति किराया, दान |
पंचायतों के प्रमुख कार्य
प्रशासनिक कार्य
- जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण
- ग्राम विकास योजनाएँ
- सार्वजनिक संपत्तियों का रखरखाव
- स्वच्छता व्यवस्था
आर्थिक कार्य
- कृषि विकास
- ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा
- रोजगार योजनाओं का संचालन
- गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम
सामाजिक कार्य
- प्राथमिक शिक्षा
- स्वास्थ्य सेवाएँ
- महिला एवं बाल विकास
- सामाजिक न्याय
- स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना
PESA अधिनियम, 1996 (Panchayats Extension to Scheduled Areas Act)
73वें संविधान संशोधन के बाद अनुसूचित जनजातीय क्षेत्रों की विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए PESA अधिनियम, 1996 बनाया गया।
इसका उद्देश्य पाँचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार प्रदान करना था।
PESA की प्रमुख विशेषताएँ
- ग्राम सभा को अधिक शक्तियाँ प्रदान की गईं।
- प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की गई।
- जनजातीय संस्कृति एवं परंपराओं की सुरक्षा।
- स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं में ग्राम सभा की प्रमुख भूमिका।
पंचायती राज से संबंधित प्रमुख समितियाँ
| समिति | वर्ष | प्रमुख सिफारिश |
|---|---|---|
| बलवंत राय मेहता समिति | 1957 | त्रिस्तरीय पंचायती राज |
| अशोक मेहता समिति | 1978 | द्विस्तरीय व्यवस्था एवं जिला को प्रमुख इकाई |
| जी.वी.के. राव समिति | 1985 | ग्रामीण विकास में पंचायतों की भूमिका बढ़ाने की सिफारिश |
| एल.एम. सिंहवी समिति | 1986 | पंचायतों को संवैधानिक दर्जा देने की सिफारिश |
| पी.के. थुंगन समिति | 1989 | संवैधानिक दर्जा एवं नियमित चुनाव |
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य
- 73वाँ संविधान संशोधन — 1992
- लागू — 24 अप्रैल 1993
- भाग IX — अनुच्छेद 243 से 243-O
- 11वीं अनुसूची — 29 विषय
- ग्राम सभा — अनुच्छेद 243A
- पंचायत चुनाव — अनुच्छेद 243K
- राज्य वित्त आयोग — अनुच्छेद 243I
- पंचायत कार्यकाल — 5 वर्ष
- चुनाव न होने पर — 6 माह के भीतर पुनः चुनाव
- महिलाओं का न्यूनतम आरक्षण — 33%
- PESA अधिनियम — 1996
Key Takeaways
- पंचायती राज ग्रामीण स्थानीय स्वशासन की संवैधानिक व्यवस्था है।
- 73वें संविधान संशोधन ने पंचायतों को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया।
- पंचायतों का कार्यकाल 5 वर्ष होता है।
- पंचायत चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग कराता है।
- पंचायतों की वित्तीय समीक्षा राज्य वित्त आयोग करता है।
- 11वीं अनुसूची में पंचायतों से संबंधित 29 विषय शामिल हैं।
- ग्राम सभा पंचायती राज व्यवस्था की आधारशिला है।
- PESA अधिनियम अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को विशेष अधिकार देता है।
Quick Revision Notes
- 73वाँ संशोधन → 1992
- लागू → 24 अप्रैल 1993
- भाग IX → पंचायत
- अनुच्छेद → 243–243O
- ग्राम सभा → 243A
- पंचायत गठन → 243B
- पंचायत संरचना → 243C
- आरक्षण → 243D
- कार्यकाल → 243E
- राज्य वित्त आयोग → 243I
- राज्य निर्वाचन आयोग → 243K
- 11वीं अनुसूची → 29 विषय
- कार्यकाल → 5 वर्ष
- महिलाओं का न्यूनतम आरक्षण → 33%
- PESA अधिनियम → 1996
One-Liner Revision Questions
- 73वाँ संविधान संशोधन कब पारित हुआ?
- पंचायती राज किस भाग में वर्णित है?
- पंचायतों का कार्यकाल कितना होता है?
- ग्राम सभा किस अनुच्छेद में वर्णित है?
- राज्य वित्त आयोग किस अनुच्छेद से संबंधित है?
- पंचायत चुनाव कौन कराता है?
- 11वीं अनुसूची में कितने विषय हैं?
- PESA अधिनियम कब लागू हुआ?
- महिलाओं के लिए न्यूनतम आरक्षण कितना है?
- पंचायती राज की सर्वोच्च ग्रामीण संस्था कौन-सी है?
Exam Booster Facts
✅ पंचायती राज का संवैधानिक दर्जा 73वें संशोधन से मिला।
✅ 24 अप्रैल को भारत में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है।
✅ ग्राम सभा लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई है।
✅ पंचायती राज व्यवस्था को लोकतंत्र की नर्सरी (Nursery of Democracy) भी कहा जाता है।
✅ बलवंत राय मेहता समिति को पंचायती राज का जनक माना जाता है।
✅ एल.एम. सिंहवी समिति ने पंचायतों को संवैधानिक दर्जा देने की सिफारिश की थी।
✅ 11वीं अनुसूची में पंचायतों को सौंपे जा सकने वाले 29 विषय शामिल हैं।
✅ अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों के लिए PESA अधिनियम, 1996 लागू होता है।

पंचायती राज (73वाँ संविधान संशोधन) MCQ Practice Set (20 Questions)
प्रश्न 1. 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम किस वर्ष पारित किया गया?
A. 1991
B. 1992
C. 1993
D. 1994
उत्तर: B. 1992
व्याख्या: 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम 1992 में पारित हुआ तथा 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ।
प्रश्न 2. 73वाँ संविधान संशोधन कब लागू हुआ?
A. 26 जनवरी 1993
B. 15 अगस्त 1993
C. 24 अप्रैल 1993
D. 2 अक्टूबर 1993
उत्तर: C. 24 अप्रैल 1993
व्याख्या: 24 अप्रैल 1993 से पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्राप्त हुआ। इसी दिन राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस भी मनाया जाता है।
प्रश्न 3. पंचायती राज व्यवस्था संविधान के किस भाग में वर्णित है?
A. भाग VII
B. भाग VIII
C. भाग IX
D. भाग X
उत्तर: C. भाग IX
व्याख्या: 73वें संशोधन द्वारा संविधान में भाग IX जोड़ा गया, जिसमें अनुच्छेद 243 से 243-O तक पंचायतों का वर्णन है।
प्रश्न 4. पंचायती राज से संबंधित अनुच्छेदों की सीमा क्या है?
A. अनुच्छेद 230–240
B. अनुच्छेद 243–243O
C. अनुच्छेद 250–260
D. अनुच्छेद 265–280
उत्तर: B. अनुच्छेद 243–243O
व्याख्या: पंचायती राज से संबंधित सभी संवैधानिक प्रावधान अनुच्छेद 243 से 243-O तक दिए गए हैं।
प्रश्न 5. 73वें संविधान संशोधन द्वारा कौन-सी अनुसूची जोड़ी गई?
A. 9वीं अनुसूची
B. 10वीं अनुसूची
C. 11वीं अनुसूची
D. 12वीं अनुसूची
उत्तर: C. 11वीं अनुसूची
व्याख्या: 11वीं अनुसूची में पंचायतों को सौंपे जा सकने वाले 29 विषय शामिल हैं।
प्रश्न 6. 11वीं अनुसूची में कुल कितने विषय शामिल हैं?
A. 18
B. 22
C. 29
D. 32
उत्तर: C. 29
व्याख्या: 11वीं अनुसूची में पंचायतों से संबंधित 29 विषयों का उल्लेख किया गया है।
प्रश्न 7. पंचायती राज व्यवस्था का आधार कौन-सी संस्था है?
A. ग्राम पंचायत
B. पंचायत समिति
C. जिला परिषद
D. ग्राम सभा
उत्तर: D. ग्राम सभा
व्याख्या: ग्राम सभा पंचायती राज व्यवस्था की सबसे मूल एवं लोकतांत्रिक संस्था है।
प्रश्न 8. ग्राम सभा का उल्लेख किस अनुच्छेद में किया गया है?
A. अनुच्छेद 243A
B. अनुच्छेद 243B
C. अनुच्छेद 243C
D. अनुच्छेद 243D
उत्तर: A. अनुच्छेद 243A
व्याख्या: अनुच्छेद 243A ग्राम सभा की शक्तियों एवं भूमिका का वर्णन करता है।
प्रश्न 9. पंचायतों के गठन का प्रावधान किस अनुच्छेद में है?
A. अनुच्छेद 243A
B. अनुच्छेद 243B
C. अनुच्छेद 243C
D. अनुच्छेद 243D
उत्तर: B. अनुच्छेद 243B
व्याख्या: अनुच्छेद 243B पंचायतों के गठन का प्रावधान करता है।
प्रश्न 10. पंचायतों का कार्यकाल कितना होता है?
A. 3 वर्ष
B. 4 वर्ष
C. 5 वर्ष
D. 6 वर्ष
उत्तर: C. 5 वर्ष
व्याख्या: अनुच्छेद 243E के अनुसार प्रत्येक पंचायत का कार्यकाल 5 वर्ष निर्धारित किया गया है।
प्रश्न 11. पंचायतों में महिलाओं के लिए न्यूनतम आरक्षण कितना है?
A. 25%
B. 30%
C. 33% (एक-तिहाई)
D. 50%
उत्तर: C. 33% (एक-तिहाई)
व्याख्या: संविधान के अनुसार महिलाओं के लिए कम से कम एक-तिहाई आरक्षण अनिवार्य है। कई राज्यों में इसे 50% तक बढ़ाया गया है।
प्रश्न 12. पंचायत चुनाव कौन कराता है?
A. भारत निर्वाचन आयोग
B. राज्यपाल
C. राज्य निर्वाचन आयोग
D. जिला परिषद
उत्तर: C. राज्य निर्वाचन आयोग
व्याख्या: अनुच्छेद 243K के अनुसार पंचायत चुनावों का संचालन राज्य निर्वाचन आयोग करता है।
प्रश्न 13. राज्य वित्त आयोग का उल्लेख किस अनुच्छेद में किया गया है?
A. अनुच्छेद 243G
B. अनुच्छेद 243H
C. अनुच्छेद 243I
D. अनुच्छेद 243J
उत्तर: C. अनुच्छेद 243I
व्याख्या: अनुच्छेद 243I राज्य वित्त आयोग के गठन एवं कार्यों का प्रावधान करता है।
प्रश्न 14. भारत में आधुनिक पंचायती राज व्यवस्था का शुभारम्भ कहाँ से हुआ?
A. जयपुर
B. नागौर
C. उदयपुर
D. अजमेर
उत्तर: B. नागौर
व्याख्या: 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के नागौर जिले से आधुनिक पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत हुई।
प्रश्न 15. आधुनिक पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत किस राज्य से हुई?
A. उत्तर प्रदेश
B. गुजरात
C. राजस्थान
D. मध्य प्रदेश
उत्तर: C. राजस्थान
व्याख्या: राजस्थान आधुनिक पंचायती राज व्यवस्था लागू करने वाला पहला राज्य था।
प्रश्न 16. पंचायती राज व्यवस्था का जनक किस समिति को माना जाता है?
A. सरकारिया समिति
B. अशोक मेहता समिति
C. बलवंत राय मेहता समिति
D. एल.एम. सिंहवी समिति
उत्तर: C. बलवंत राय मेहता समिति
व्याख्या: 1957 की बलवंत राय मेहता समिति ने त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की सिफारिश की थी।
प्रश्न 17. अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों के लिए कौन-सा अधिनियम लागू किया गया?
A. वन अधिकार अधिनियम
B. PESA अधिनियम, 1996
C. पंचायत अधिनियम, 1994
D. जनजातीय विकास अधिनियम
उत्तर: B. PESA अधिनियम, 1996
व्याख्या: PESA अधिनियम पाँचवीं अनुसूची के अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को विशेष अधिकार प्रदान करता है।
प्रश्न 18. पंचायती राज व्यवस्था की सर्वोच्च ग्रामीण संस्था कौन-सी है?
A. ग्राम सभा
B. ग्राम पंचायत
C. पंचायत समिति
D. जिला परिषद
उत्तर: D. जिला परिषद
व्याख्या: जिला परिषद जिला स्तर की सर्वोच्च पंचायत संस्था होती है।
प्रश्न 19. पंचायतों में आरक्षण का प्रावधान किस अनुच्छेद में है?
A. अनुच्छेद 243B
B. अनुच्छेद 243C
C. अनुच्छेद 243D
D. अनुच्छेद 243E
उत्तर: C. अनुच्छेद 243D
व्याख्या: अनुच्छेद 243D पंचायतों में SC, ST एवं महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान करता है।
प्रश्न 20. निम्नलिखित में से कौन-सा पंचायती राज का मध्य स्तर है?
A. ग्राम सभा
B. ग्राम पंचायत
C. पंचायत समिति
D. जिला परिषद
उत्तर: C. पंचायत समिति
व्याख्या: त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में पंचायत समिति विकासखंड (ब्लॉक) स्तर की मध्यवर्ती संस्था है।
पंचायती राज (73वाँ संविधान संशोधन) Previous Year Questions (PYQ)
PYQ 1: 73वें संविधान संशोधन द्वारा भारतीय संविधान में कौन-सा भाग जोड़ा गया?
परीक्षा: SSC CGL (Memory Based)
उत्तर: भाग IX (Part IX)
व्याख्या: 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा भारतीय संविधान में भाग IX जोड़ा गया, जिसमें अनुच्छेद 243 से 243-O तक पंचायतों से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
PYQ 2: पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा किस संविधान संशोधन द्वारा दिया गया?
परीक्षा: RRB NTPC (Memory Based)
उत्तर: 73वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992
व्याख्या: 73वें संशोधन के माध्यम से पंचायती राज संस्थाओं को पहली बार संवैधानिक मान्यता प्रदान की गई।
PYQ 3: पंचायती राज व्यवस्था से संबंधित 11वीं अनुसूची में कितने विषय शामिल हैं?
परीक्षा: SSC CHSL (Memory Based)
उत्तर: 29 विषय
व्याख्या: 11वीं अनुसूची में पंचायतों को सौंपे जा सकने वाले 29 विषय सूचीबद्ध हैं।
PYQ 4: ग्राम सभा का उल्लेख भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में किया गया है?
परीक्षा: UPSC Prelims (Concept Based)
उत्तर: अनुच्छेद 243A
व्याख्या: अनुच्छेद 243A ग्राम सभा की शक्तियों एवं कार्यों से संबंधित है।
PYQ 5: पंचायतों का कार्यकाल भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में निर्धारित किया गया है?
परीक्षा: UPPSC (Memory Based)
उत्तर: अनुच्छेद 243E
व्याख्या: अनुच्छेद 243E के अनुसार प्रत्येक पंचायत का कार्यकाल 5 वर्ष होता है।
PYQ 6: पंचायत चुनाव कराने का दायित्व किस संस्था का है?
परीक्षा: Rajasthan CET (Graduate Level)
उत्तर: राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission)
व्याख्या: अनुच्छेद 243K के अनुसार पंचायत चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग कराता है।
PYQ 7: आधुनिक पंचायती राज व्यवस्था का शुभारम्भ भारत के किस राज्य से हुआ?
परीक्षा: REET (Level-2)
उत्तर: राजस्थान
व्याख्या: 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के नागौर जिले से आधुनिक पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत हुई।
PYQ 8: बलवंत राय मेहता समिति का गठन किस वर्ष किया गया था?
परीक्षा: SSC MTS (Memory Based)
उत्तर: 1957
व्याख्या: इस समिति ने भारत में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की सिफारिश की थी।
PYQ 9: पंचायती राज व्यवस्था की सबसे छोटी लोकतांत्रिक इकाई कौन-सी है?
परीक्षा: Bihar PSC (Memory Based)
उत्तर: ग्राम सभा
व्याख्या: ग्राम सभा में गाँव के सभी पंजीकृत मतदाता शामिल होते हैं, इसलिए इसे स्थानीय लोकतंत्र की आधारशिला माना जाता है।
PYQ 10: अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों के विस्तार हेतु कौन-सा अधिनियम लागू किया गया?
परीक्षा: UPSC / State PSC (Concept Based)
उत्तर: PESA अधिनियम, 1996
व्याख्या: PESA (Panchayats Extension to Scheduled Areas Act), 1996 पाँचवीं अनुसूची के अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को विशेष अधिकार प्रदान करता है।
पंचायती राज (73वाँ संविधान संशोधन) Frequently Asked Questions (FAQs)
पंचायती राज क्या है?
पंचायती राज ग्रामीण स्थानीय स्वशासन की व्यवस्था है, जिसके माध्यम से गाँव के लोग अपने क्षेत्र के विकास एवं प्रशासन में प्रत्यक्ष भाग लेते हैं।
73वाँ संविधान संशोधन कब लागू हुआ?
73वाँ संविधान संशोधन 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ।
73वें संविधान संशोधन द्वारा कौन-सी अनुसूची जोड़ी गई?
इस संशोधन द्वारा 11वीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसमें पंचायतों से संबंधित 29 विषय शामिल हैं।
पंचायती राज व्यवस्था में कितने स्तर होते हैं?
भारत में पंचायती राज व्यवस्था त्रिस्तरीय है—
- ग्राम पंचायत
- पंचायत समिति
- जिला परिषद
ग्राम सभा और ग्राम पंचायत में क्या अंतर है?
ग्राम सभा सभी पंजीकृत मतदाताओं की संस्था है, जबकि ग्राम पंचायत जनता द्वारा चुनी गई निर्वाचित संस्था है।
पंचायत चुनाव कौन कराता है?
पंचायत चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा कराए जाते हैं।
पंचायतों का कार्यकाल कितना होता है?
प्रत्येक पंचायत का कार्यकाल 5 वर्ष होता है।
पंचायती राज में महिलाओं को कितना आरक्षण मिलता है?
संविधान के अनुसार कम से कम 33% आरक्षण अनिवार्य है। कई राज्यों में यह 50% तक बढ़ाया गया है।
इस लेख के साथ निम्न लेखों को जरुर पढ़े:
- भारत का संविधान → https://gkdost.com/polity/constitution-of-india/
- भारतीय संविधान की प्रस्तावना → https://gkdost.com/polity/bharatiya-samvidhan-ki-prastavana-notes/
- संविधान संशोधन → https://gkdost.com/polity/constitutional-amendment/
- भारतीय संविधान के प्रमुख भाग → https://gkdost.com/polity/bharatiya-samvidhan-ke-pramukh-bhag/
- भारतीय संविधान की अनुसूचियाँ → https://gkdost.com/polity/bharatiya-samvidhan-ki-anusuchiyan/
- राज्य के नीति निदेशक तत्व → https://gkdost.com/polity/rajyo-ke-niti-nirdeshak-tatva-dpsp/
- संसद → https://gkdost.com/polity/parliament-notes-hindi/
- राष्ट्रपति → https://gkdost.com/polity/president-of-india-notes-hindi/
- मौलिक अधिकार → https://gkdost.com/polity/maulik-adhikar/
- मौलिक कर्तव्य → https://gkdost.com/polity/fundamental-duties/

