भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन Notes, MCQ एवं महत्वपूर्ण तथ्य

भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन: पुर्तगाली, डच, अंग्रेज, डेनिश और फ्रांसीसी

बिंदुजानकारी
भारत आने वाली पहली प्रमुख यूरोपीय शक्तिपुर्तगाली
वास्को डी गामा का आगमन1498 ई.
वास्को डी गामा का आगमन स्थलकालीकट (वर्तमान कोझिकोड)
प्रमुख यूरोपीय शक्तियाँपुर्तगाली, डच, अंग्रेज, डेनिश, फ्रांसीसी
अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना1600 ई.
डच ईस्ट इंडिया कंपनी (VOC)1602 ई.
फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी1664 ई.
निर्णायक अंग्रेज-फ्रांसीसी संघर्षकर्नाटक युद्ध
निर्णायक युद्धवांडीवाश का युद्ध, 1760 ई.

प्रश्न: भारत में समुद्री मार्ग से आने वाली पहली प्रमुख यूरोपीय शक्ति कौन थी?

उत्तर: पुर्तगाली भारत में समुद्री मार्ग से आने वाली पहली प्रमुख यूरोपीय शक्ति थी। 20 मई 1498 ई. को वास्को डी गामा अफ्रीका के दक्षिणी सिरे केप ऑफ गुड होप से होकर कालीकट पहुँचा। इसके बाद पुर्तगालियों ने पश्चिमी तट पर व्यापारिक केंद्र और नौसैनिक प्रभाव स्थापित किया।


संक्षिप्त परिचय

भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक संबंध बहुत पुराने थे, लेकिन मध्यकाल के अंत में समुद्री मार्गों की खोज ने भारत के साथ यूरोपीय व्यापार को नया रूप दिया।

भारत के मसाले, वस्त्र, रेशम, नील, काली मिर्च और अन्य मूल्यवान वस्तुएँ यूरोपीय व्यापारियों के लिए अत्यंत आकर्षक थीं। यूरोपीय शक्तियाँ एशियाई व्यापार में बिचौलियों और पुराने स्थल मार्गों पर निर्भरता कम करना चाहती थीं।

1498 ई. में वास्को डी गामा के कालीकट पहुँचने के बाद यूरोपीय शक्तियों के लिए भारत तक सीधा समुद्री मार्ग खुला। इसके बाद पुर्तगाली, डच, अंग्रेज, डेनिश और फ्रांसीसी व्यापारिक कंपनियाँ भारत में आईं। शुरुआत में इनका उद्देश्य व्यापार था, लेकिन धीरे-धीरे व्यापारिक प्रतिस्पर्धा राजनीतिक और सैन्य संघर्ष में बदल गई।

यही प्रक्रिया आगे चलकर अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी के राजनीतिक प्रभुत्व और भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की स्थापना की पृष्ठभूमि बनी।


भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन क्यों हुआ?

यूरोपीय कंपनियों के भारत आने के पीछे केवल व्यापार ही कारण नहीं था। इसके पीछे कई आर्थिक, राजनीतिक और तकनीकी कारण थे।

मसालों और भारतीय वस्तुओं की मांग

यूरोप में भारतीय मसालों, विशेष रूप से काली मिर्च और अन्य सुगंधित पदार्थों की बहुत मांग थी। भारतीय सूती और रेशमी वस्त्र भी यूरोपीय बाजार में लोकप्रिय थे।

समुद्री मार्ग की खोज

अफ्रीका के दक्षिणी सिरे केप ऑफ गुड होप के रास्ते भारत पहुँचने का समुद्री मार्ग यूरोपीय व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि था। वास्को डी गामा इसी मार्ग से भारत पहुँचा।

व्यापार पर नियंत्रण

यूरोपीय शक्तियाँ एशिया के लाभदायक व्यापार पर अधिक से अधिक नियंत्रण चाहती थीं। इसलिए उन्होंने केवल व्यापार करने के बजाय अपने व्यापारिक केंद्रों और नौसैनिक शक्ति को मजबूत किया।

व्यापारिक कंपनियों का उदय

इंग्लैंड, नीदरलैंड और फ्रांस जैसी शक्तियों ने संगठित व्यापारिक कंपनियाँ स्थापित कीं। इन कंपनियों को विशेष व्यापारिक अधिकार और कई मामलों में सैन्य शक्ति भी प्राप्त थी।


यूरोपीय कंपनियों के आगमन का क्रम

प्रतियोगी परीक्षाओं में सबसे पहले आगमन का क्रम पूछा जाता है।

सामान्य परीक्षा-उपयोगी क्रम:

पुर्तगाली → डच → अंग्रेज → डेनिश → फ्रांसीसी

लेकिन यहाँ एक सावधानी जरूरी है। कंपनी की स्थापना का क्रम और भारत में पहली बार पहुँचने का क्रम अलग-अलग हो सकता है। उदाहरण के लिए English East India Company 1600 में स्थापित हुई, जबकि भारत में अंग्रेजी व्यापारिक गतिविधियाँ उसके बाद विकसित हुईं। VOC 1602 में स्थापित हुई और भारत में उसका व्यापार 17वीं शताब्दी के आरंभ में विकसित हुआ।


पुर्तगाली भारत कब आए?

पुर्तगाली भारत आने वाली पहली प्रमुख यूरोपीय समुद्री शक्ति थे।

वास्को डी गामा का भारत आगमन

20 मई 1498 ई. को पुर्तगाली नाविक वास्को डी गामा कालीकट पहुँचा। कालीकट के शासक को उस समय जमोरिन कहा जाता था।

वास्को डी गामा अफ्रीका के दक्षिणी सिरे केप ऑफ गुड होप से होकर भारत पहुँचा। इस समुद्री मार्ग ने यूरोप और भारत के बीच सीधे समुद्री व्यापार की संभावना को मजबूत किया।

पुर्तगालियों का प्रमुख उद्देश्य

पुर्तगालियों का उद्देश्य केवल व्यापार करना नहीं था। वे हिंद महासागर के समुद्री व्यापार पर अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते थे।

उनका विशेष ध्यान था:

  • मसालों का व्यापार
  • समुद्री मार्गों पर नियंत्रण
  • व्यापारिक केंद्रों की स्थापना
  • नौसैनिक शक्ति का विस्तार
  • अरब व्यापारियों की प्रतिस्पर्धा को कमजोर करना

फ्रांसिस्को डी अल्मीडा

फ्रांसिस्को डी अल्मीडा भारत में पुर्तगाली प्रशासन का पहला वायसराय माना जाता है। उसने समुद्री शक्ति को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया।

उसकी नीति को अक्सर Blue Water Policy के नाम से जाना जाता है।

इसका मुख्य उद्देश्य समुद्र पर पुर्तगाली नौसैनिक प्रभुत्व स्थापित करना था।

अल्फांसो डी अल्बुकर्क

अल्फांसो डी अल्बुकर्क पुर्तगाली शक्ति के विस्तार में अत्यंत महत्वपूर्ण था। उसने केवल समुद्री व्यापार के बजाय स्थायी राजनीतिक और क्षेत्रीय नियंत्रण पर अधिक जोर दिया।

1510 ई. में अल्बुकर्क के नेतृत्व में पुर्तगालियों ने गोवा पर अधिकार किया। गोवा बाद में भारत में पुर्तगाली शक्ति का प्रमुख केंद्र बन गया।

पुर्तगालियों के प्रमुख केंद्र

पुर्तगालियों ने भारत के पश्चिमी तट पर कई महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र विकसित किए।

प्रमुख केंद्र:

  • गोवा
  • कालीकट
  • कोचीन
  • कन्नानोर
  • दमन
  • दीव

पुर्तगाली लंबे समय तक भारत में अपनी उपस्थिति बनाए रखने में सफल रहे। 1961 में गोवा, दमन और दीव के भारत में विलय के साथ भारतीय क्षेत्र में पुर्तगाली शासन समाप्त हुआ। आधुनिक परीक्षा प्रश्नों में पुर्तगालियों को भारत आने वाली पहली और भारत से जाने वाली अंतिम यूरोपीय शक्ति के रूप में भी पूछा जाता है।


डच ईस्ट इंडिया कंपनी भारत कब आई?

डचों ने पुर्तगालियों के व्यापारिक प्रभुत्व को चुनौती दी।

Dutch East India Company (VOC) की स्थापना 1602 ई. में हुई थी। भारत में डच व्यापारिक गतिविधियाँ 17वीं शताब्दी के आरंभ में शुरू हुईं और मसुलीपट्टनम उनका प्रमुख शुरुआती केंद्र बना। भारत में VOC के व्यापार में वस्त्र, नील, मसाले और अन्य वस्तुएँ महत्वपूर्ण थीं।

डचों के प्रमुख केंद्र

  • मसुलीपट्टनम
  • पुलिकट
  • नागापट्टनम
  • सूरत
  • चिनसुरा
  • कोचीन

डचों का मुख्य लक्ष्य भारतीय उपमहाद्वीप में विशाल साम्राज्य बनाना नहीं बल्कि लाभदायक व्यापार पर नियंत्रण रखना था।

बाद में अंग्रेजों के बढ़ते प्रभाव और डच शक्ति के कमजोर होने के कारण भारत में डच राजनीतिक प्रभाव सीमित हो गया।


अंग्रेज भारत कब आए?

अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी का गठन 1600 ई. में हुआ। इसे इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ प्रथम से पूर्वी देशों के साथ व्यापार करने के लिए चार्टर प्राप्त हुआ था।

अंग्रेजों का भारत में आगमन और उनका राजनीतिक विस्तार भारतीय इतिहास का सबसे निर्णायक चरण बना।

भारत में अंग्रेजों की शुरुआती गतिविधियाँ

अंग्रेजों ने शुरुआत में व्यापारिक कोठियाँ स्थापित कीं और भारतीय शासकों से व्यापारिक अनुमति प्राप्त करने की कोशिश की।

सूरत अंग्रेजों के शुरुआती महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्रों में से एक बना।

कैप्टन विलियम हॉकिंस

विलियम हॉकिंस जहाँगीर के दरबार में पहुँचा और अंग्रेजों के व्यापारिक हितों के लिए अनुमति प्राप्त करने का प्रयास किया।

सर थॉमस रो

सर थॉमस रो जहाँगीर के दरबार में इंग्लैंड के राजदूत के रूप में आया। उसके प्रयासों से अंग्रेजों को भारत में व्यापारिक सुविधाएँ प्राप्त करने में सहायता मिली।

स्वाली का युद्ध

1612 ई. के आसपास स्वाली (Swally) के युद्ध में अंग्रेजों और पुर्तगालियों के बीच संघर्ष हुआ। अंग्रेजों की सफलता से भारत के पश्चिमी तट पर पुर्तगाली समुद्री प्रभुत्व को चुनौती मिली।

यह घटना अंग्रेजी व्यापार के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

अंग्रेजों के प्रमुख केंद्र

बाद में अंग्रेजों ने प्रमुख रूप से:

  • सूरत
  • मद्रास
  • बंबई
  • कलकत्ता

जैसे केंद्र विकसित किए।

इन केंद्रों के आसपास अंग्रेजी सत्ता का विस्तार हुआ और आगे चलकर कंपनी व्यापारिक संस्था से राजनीतिक शक्ति में बदल गई।


डेनिश ईस्ट इंडिया कंपनी

डेनमार्क ने भी भारत के साथ व्यापार करने के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी स्थापित की।

Danish East India Company की स्थापना 1616 ई. में हुई।

भारत में डेनिश गतिविधियों का प्रमुख केंद्र ट्रांक्वेबार (Tranquebar/त्रांकेबार) था, जो वर्तमान तमिलनाडु में स्थित है। बाद में सेरामपुर भी उनका महत्वपूर्ण केंद्र बना।

डेनिश शक्ति भारत में पुर्तगालियों, डचों, अंग्रेजों और फ्रांसीसियों की तुलना में सीमित रही।

अंततः डेनिश बस्तियाँ अंग्रेजों को बेच दी गईं और भारत में उनका राजनीतिक प्रभाव समाप्त हो गया।


फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी भारत कब आई?

फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1664 ई. में फ्रांस के राजा लुई XIV के शासनकाल में हुई। इसके संगठन में जीन बैप्टिस्ट कोलबेयर की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

फ्रांसीसियों ने भारत में व्यापारिक केंद्र स्थापित किए और दक्षिण भारत में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की।

फ्रांसीसियों के प्रमुख केंद्र

  • सूरत
  • पांडिचेरी
  • चंद्रनगर
  • माहे
  • करैकल
  • यानम

पांडिचेरी फ्रांसीसी शक्ति का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बना।


कर्नाटक युद्ध क्या थे?

भारत में अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के बीच संघर्ष का सबसे महत्वपूर्ण चरण कर्नाटक युद्ध थे।

18वीं शताब्दी में यूरोप की अंग्रेज-फ्रांसीसी प्रतिद्वंद्विता का प्रभाव भारत में भी दिखाई दिया। दोनों शक्तियाँ दक्षिण भारत में अपने व्यापारिक और राजनीतिक प्रभाव का विस्तार करना चाहती थीं। Read this: मराठा साम्राज्य

प्रथम कर्नाटक युद्ध — 1746–1748

यह युद्ध यूरोप के War of Austrian Succession से जुड़ा था।

इसका अंत ऐक्स-ला-शापेल की संधि (1748) से हुआ।

द्वितीय कर्नाटक युद्ध — 1749–1754

इस युद्ध में स्थानीय उत्तराधिकार विवादों में अंग्रेजों और फ्रांसीसियों ने अलग-अलग पक्षों का समर्थन किया।

इस चरण में रॉबर्ट क्लाइव का अंग्रेजी प्रभाव बढ़ा और फ्रांसीसी स्थिति कमजोर होने लगी।

तृतीय कर्नाटक युद्ध — 1756–1763

यह यूरोप के Seven Years’ War से जुड़ा था।

इस संघर्ष में अंग्रेजों ने निर्णायक बढ़त बनाई।

वांडीवाश का युद्ध — 1760

1760 ई. का वांडीवाश का युद्ध अंग्रेज-फ्रांसीसी संघर्ष का निर्णायक मोड़ था।

अंग्रेजों ने फ्रांसीसी सेना को पराजित किया। इसके बाद भारत में फ्रांसीसी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएँ काफी कमजोर हो गईं।

1763 की पेरिस की संधि के बाद फ्रांसीसियों को कुछ व्यापारिक केंद्र वापस मिले, लेकिन वे अंग्रेजों के समान राजनीतिक शक्ति नहीं बन सके।


यूरोपीय कंपनियों की तुलना

यूरोपीय शक्तिकंपनी की स्थापनाभारत में प्रमुख प्रारंभिक गतिविधि/केंद्रप्रमुख केंद्रअंतिम स्थिति
पुर्तगालीकालीकट, 1498 के बादगोवा, दमन, दीव1961 तक कुछ क्षेत्रों में शासन
अंग्रेज1600पश्चिमी तट पर व्यापारसूरत, मद्रास, बंबई, कलकत्ताभारत में प्रमुख औपनिवेशिक शक्ति
डच1602मसुलीपट्टनम क्षेत्रपुलिकट, नागापट्टनम, चिनसुराराजनीतिक प्रभाव समाप्त
डेनिश1616त्रांकेबारत्रांकेबार, सेरामपुरबस्तियाँ अंग्रेजों को बेचीं
फ्रांसीसी1664सूरतपांडिचेरी, चंद्रनगर, माहेराजनीतिक प्रतिस्पर्धा में अंग्रेजों से पीछे

नोट: स्थापना वर्ष और भारत में पहली फैक्ट्री/व्यापारिक गतिविधि का वर्ष अलग हो सकता है। परीक्षा में प्रश्न के शब्दों को ध्यान से पढ़ना चाहिए।


यूरोपीय कंपनियों का आगमन: आसान टाइमलाइन

वर्षघटना
1498वास्को डी गामा कालीकट पहुँचा
1510पुर्तगालियों ने गोवा पर अधिकार किया
1600अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना
1602डच VOC की स्थापना
1612स्वाली का युद्ध
1616डेनिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना
1664फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना
1746–48प्रथम कर्नाटक युद्ध
1749–54द्वितीय कर्नाटक युद्ध
1756–63तृतीय कर्नाटक युद्ध
1760वांडीवाश का युद्ध
1763पेरिस की संधि

यूरोपीय कंपनियों के प्रमुख केंद्र एक नजर में

कंपनीप्रमुख भारतीय केंद्र
पुर्तगालीगोवा, कालीकट, कोचीन, कन्नानोर, दमन, दीव
डचमसुलीपट्टनम, पुलिकट, नागापट्टनम, चिनसुरा
अंग्रेजसूरत, मद्रास, बंबई, कलकत्ता
डेनिशत्रांकेबार, सेरामपुर
फ्रांसीसीपांडिचेरी, चंद्रनगर, माहे, करैकल, यानम
भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन Timeline और Quick Revision Infographic
भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन | Timeline • Facts • Quick Revision

भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन MCQs:

प्रश्न 1: भारत में समुद्री मार्ग से आने वाली पहली प्रमुख यूरोपीय शक्ति कौन थी?

A. डच
B. अंग्रेज
C. पुर्तगाली
D. फ्रांसीसी
उत्तर: C. पुर्तगाली
व्याख्या: पुर्तगाली भारत में समुद्री मार्ग से आने वाली पहली प्रमुख यूरोपीय शक्ति थी। 1498 ई. में वास्को डी गामा कालीकट पहुँचा।

प्रश्न 2: वास्को डी गामा भारत कब पहुँचा था?

A. 1453 ई.
B. 1498 ई.
C. 1510 ई.
D. 1526 ई.
उत्तर: B. 1498 ई.
व्याख्या: वास्को डी गामा 20 मई 1498 ई. को समुद्री मार्ग से भारत के कालीकट पहुँचा।

प्रश्न 3: वास्को डी गामा भारत में कहाँ पहुँचा था?

A. गोवा
B. सूरत
C. कालीकट
D. कोचीन
उत्तर: C. कालीकट
व्याख्या: वास्को डी गामा 1498 ई. में मालाबार तट पर स्थित कालीकट पहुँचा था।

प्रश्न 4: कालीकट के शासक को किस नाम से जाना जाता था?

A. नवाब
B. जमोरिन
C. निजाम
D. पेशवा
उत्तर: B. जमोरिन
व्याख्या: वास्को डी गामा के भारत आगमन के समय कालीकट के शासक को जमोरिन कहा जाता था।

प्रश्न 5: पुर्तगालियों ने गोवा पर कब अधिकार किया?

A. 1498 ई.
B. 1505 ई.
C. 1510 ई.
D. 1526 ई.
उत्तर: C. 1510 ई.
व्याख्या: अल्फांसो डी अल्बुकर्क के नेतृत्व में पुर्तगालियों ने 1510 ई. में गोवा पर अधिकार किया। गोवा बाद में भारत में पुर्तगाली शक्ति का प्रमुख केंद्र बना।

प्रश्न 6: भारत में पहला पुर्तगाली वायसराय किसे माना जाता है?

A. अल्फांसो डी अल्बुकर्क
B. फ्रांसिस्को डी अल्मीडा
C. वास्को डी गामा
D. नीनो डी कुन्हा
उत्तर: B. फ्रांसिस्को डी अल्मीडा
व्याख्या: फ्रांसिस्को डी अल्मीडा को भारत में पुर्तगाली प्रशासन का पहला वायसराय माना जाता है। उसकी नीति समुद्री शक्ति को मजबूत करने पर केंद्रित थी।

प्रश्न 7: पुर्तगाली शक्ति के विस्तार में किसका महत्वपूर्ण योगदान था?

A. रॉबर्ट क्लाइव
B. सर थॉमस रो
C. अल्फांसो डी अल्बुकर्क
D. डुप्ले
उत्तर: C. अल्फांसो डी अल्बुकर्क
व्याख्या: अल्फांसो डी अल्बुकर्क ने भारत में पुर्तगाली क्षेत्रीय और राजनीतिक विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसके नेतृत्व में 1510 ई. में गोवा पर अधिकार किया गया।

प्रश्न 8: अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना कब हुई थी?

A. 1498 ई.
B. 1600 ई.
C. 1602 ई.
D. 1616 ई.
उत्तर: B. 1600 ई.
व्याख्या: अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1600 ई. में हुई थी और इसे इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ प्रथम से शाही चार्टर प्राप्त हुआ था।

प्रश्न 9: डच ईस्ट इंडिया कंपनी (VOC) की स्थापना कब हुई थी?

A. 1600 ई.
B. 1602 ई.
C. 1612 ई.
D. 1664 ई.
उत्तर: B. 1602 ई.
व्याख्या: डच ईस्ट इंडिया कंपनी को Vereenigde Oost-Indische Compagnie यानी VOC कहा जाता था। इसकी स्थापना 1602 ई. में हुई थी।

प्रश्न 10: भारत में डचों का प्रमुख केंद्र कौन-सा था?

A. गोवा
B. पुलिकट
C. पांडिचेरी
D. त्रांकेबार
उत्तर: B. पुलिकट
व्याख्या: पुलिकट भारत में डचों का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र था। डचों के अन्य केंद्रों में मसुलीपट्टनम, नागापट्टनम और चिनसुरा शामिल थे।

प्रश्न 11: डेनिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना कब हुई थी?

A. 1600 ई.
B. 1602 ई.
C. 1616 ई.
D. 1664 ई.
उत्तर: C. 1616 ई.
व्याख्या: डेनिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1616 ई. में हुई थी। भारत में त्रांकेबार डेनिश गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना।

प्रश्न 12: भारत में डेनिशों का प्रमुख केंद्र कौन-सा था?

A. त्रांकेबार
B. पुलिकट
C. गोवा
D. सूरत
उत्तर: A. त्रांकेबार
व्याख्या: त्रांकेबार, जिसे Tranquebar भी कहा जाता है, दक्षिण भारत में डेनिश व्यापारिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था।

प्रश्न 13: फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना कब हुई थी?

A. 1600 ई.
B. 1602 ई.
C. 1616 ई.
D. 1664 ई.
उत्तर: D. 1664 ई.
व्याख्या: फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1664 ई. में हुई थी। इसके गठन में जीन बैप्टिस्ट कोलबेयर की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

प्रश्न 14: भारत में फ्रांसीसियों का प्रमुख केंद्र कौन-सा था?

A. सूरत
B. पांडिचेरी
C. पुलिकट
D. गोवा
उत्तर: B. पांडिचेरी
व्याख्या: पांडिचेरी भारत में फ्रांसीसी शक्ति का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बना। फ्रांसीसियों के अन्य केंद्रों में चंद्रनगर, माहे, करैकल और यानम शामिल थे।

प्रश्न 15: स्वाली का युद्ध मुख्यतः किनके बीच हुआ था?

A. अंग्रेज और फ्रांसीसी
B. अंग्रेज और पुर्तगाली
C. डच और फ्रांसीसी
D. डच और अंग्रेज
उत्तर: B. अंग्रेज और पुर्तगाली
व्याख्या: 1612 ई. का स्वाली का युद्ध अंग्रेजों और पुर्तगालियों की समुद्री प्रतिस्पर्धा से जुड़ा था। इसमें अंग्रेजों की सफलता से पश्चिमी तट पर पुर्तगाली प्रभुत्व को चुनौती मिली।

प्रश्न 16: प्रथम कर्नाटक युद्ध का काल क्या था?

A. 1746–1748
B. 1749–1754
C. 1756–1763
D. 1760–1763
उत्तर: A. 1746–1748
व्याख्या: प्रथम कर्नाटक युद्ध 1746 से 1748 ई. तक चला। इसका संबंध यूरोप में चल रहे War of Austrian Succession से भी था।

प्रश्न 17: कर्नाटक युद्धों में मुख्य यूरोपीय प्रतिद्वंद्वी कौन थे?

A. पुर्तगाली और डच
B. अंग्रेज और फ्रांसीसी
C. डच और डेनिश
D. पुर्तगाली और फ्रांसीसी
उत्तर: B. अंग्रेज और फ्रांसीसी
व्याख्या: दक्षिण भारत में व्यापारिक और राजनीतिक प्रभुत्व के लिए अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के बीच तीन कर्नाटक युद्ध हुए।

प्रश्न 18: वांडीवाश का युद्ध कब हुआ था?

A. 1757 ई.
B. 1760 ई.
C. 1763 ई.
D. 1764 ई.
उत्तर: B. 1760 ई.
व्याख्या: 1760 ई. में वांडीवाश के युद्ध में अंग्रेजों ने फ्रांसीसी सेना को पराजित किया। यह अंग्रेज-फ्रांसीसी संघर्ष का निर्णायक मोड़ माना जाता है।

प्रश्न 19: निम्न में से कौन-सा भारत में प्रमुख यूरोपीय शक्तियों के आगमन का सामान्य परीक्षा-उपयोगी क्रम है?

A. अंग्रेज → पुर्तगाली → डच → फ्रांसीसी → डेनिश
B. पुर्तगाली → डच → अंग्रेज → डेनिश → फ्रांसीसी
C. डच → पुर्तगाली → अंग्रेज → फ्रांसीसी → डेनिश
D. फ्रांसीसी → डेनिश → अंग्रेज → डच → पुर्तगाली
उत्तर: B. पुर्तगाली → डच → अंग्रेज → डेनिश → फ्रांसीसी
व्याख्या: प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रमुख यूरोपीय शक्तियों का सामान्य क्रम पुर्तगाली → डच → अंग्रेज → डेनिश → फ्रांसीसी पढ़ाया जाता है। कंपनी की स्थापना और भारत में वास्तविक व्यापारिक गतिविधि के वर्ष अलग हो सकते हैं।

प्रश्न 20: यूरोपीय कंपनियों के भारत आने का प्रारंभिक प्रमुख उद्देश्य क्या था?

A. शिक्षा का प्रसार
B. धार्मिक सुधार
C. व्यापार
D. लोकतांत्रिक शासन की स्थापना
उत्तर: C. व्यापार
व्याख्या: यूरोपीय कंपनियाँ मुख्य रूप से भारतीय मसालों, वस्त्रों और अन्य मूल्यवान वस्तुओं के व्यापार तथा एशियाई व्यापार पर नियंत्रण के लिए भारत आई थीं।

भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन FAQs:

  1. भारत में सबसे पहले कौन-सी यूरोपीय कंपनी आई थी?

    भारत में सबसे पहले प्रमुख यूरोपीय समुद्री शक्ति के रूप में पुर्तगाली आए। 1498 में वास्को डी गामा कालीकट पहुँचा।

  2. वास्को डी गामा भारत कब आया था?

    वास्को डी गामा 20 मई 1498 को कालीकट पहुँचा था। वह केप ऑफ गुड होप के रास्ते समुद्री मार्ग से भारत आया।

  3. अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना कब हुई?

    English East India Company की स्थापना 1600 ई. में हुई थी।

  4. भारत में अंग्रेजों की पहली प्रमुख व्यापारिक गतिविधियाँ कहाँ हुईं?

    सूरत अंग्रेजों के शुरुआती महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्रों में से एक था। इसके बाद मद्रास, बंबई और कलकत्ता जैसे केंद्र अंग्रेजी शक्ति के प्रमुख आधार बने।

  5. फ्रांसीसियों का भारत में सबसे प्रमुख केंद्र कौन-सा था?

    पांडिचेरी फ्रांसीसी शक्ति का प्रमुख केंद्र था।

  6. कर्नाटक युद्ध क्यों हुए?

    कर्नाटक युद्ध अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के बीच दक्षिण भारत में व्यापारिक और राजनीतिक प्रभुत्व की प्रतिस्पर्धा से जुड़े थे और यूरोप में चल रहे अंग्रेज-फ्रांसीसी संघर्षों से भी प्रभावित थे।

  7. वांडीवाश का युद्ध क्यों महत्वपूर्ण है?

    1760 के वांडीवाश युद्ध में अंग्रेजों की विजय के बाद भारत में फ्रांसीसी राजनीतिक प्रभाव काफी कमजोर हो गया और अंग्रेजों की स्थिति मजबूत हुई।

निष्कर्ष

भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन आधुनिक भारतीय इतिहास की आधारभूत कड़ियों में से एक है। 1498 में वास्को डी गामा के कालीकट पहुँचने से शुरू हुई समुद्री यूरोपीय उपस्थिति धीरे-धीरे पुर्तगाली, डच, अंग्रेज, डेनिश और फ्रांसीसी व्यापारिक प्रतिस्पर्धा में बदल गई।

इन शक्तियों का प्रारंभिक उद्देश्य व्यापार था, लेकिन व्यापारिक हितों की सुरक्षा के लिए उन्होंने किले, फैक्ट्रियाँ, नौसेना और राजनीतिक गठजोड़ विकसित किए। अंग्रेज और फ्रांसीसी प्रतिस्पर्धा कर्नाटक युद्धों तक पहुँची और 1760 के वांडीवाश युद्ध के बाद अंग्रेजों की स्थिति निर्णायक रूप से मजबूत हुई।

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